राजस्थान उच्च न्यायालय ने रिपेनल के आधार पर पी.पी., ए.पी.पी, की नियुक्ति पर लगायी रोक सरकार को नोटिस जारी करने के आदेश 6 सप्ताह बाद होगी सुनवाई
पाराशर, राठौड, ईणानी की याचिका पर कोर्ट ने जारी किया आदेश
दिनांक 02.8.2024 अजमेर। राजस्थान उच्च न्यायालय के न्यायाधीश श्री अनिल कुमार उपमन ने अजमेर के लोक अभियोजक विवेक पाराशर, अपर लोक अभियोजक राजेश कुमार ईणानी, राजेन्द्र सिंह राठौड की याचिका पर सुनवाई करते हुए पी.पी, ए.पी.पी. के पदो पर रिपेनल के आधार पर नियुक्ति पर रोक लगाने के आदेश पारित करते हुए सरकार को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है तथा प्रकरण की सुनवाई 6 सप्ताह बाद करने के भी आदेश पारित किये है। याचिकाकर्ता की और से पैरवी उच्च न्यायालय के अधिवक्ता जावेद खान ने की। ज्ञातव्य रहे कि उक्त मामले को प्रतिपक्ष नेता टीकाराम जूली ने विधानसभा मे उठाया था और विधि मंत्री के पुत्र को अतिरिक्त महाअधिवक्ता के पद से इस्तीफा भी देना पडा था तथा जयपुर सहित राजस्थान के विभिन्न जिलो मे भाजपा संगठन के अधिवक्ताओ ने संघर्ष समिति का गठन कर आदोलन का बिगुल बजा रखा है। पाराशर ने भी इस संबंध मे ना केवल प्रधानमंत्री, गृहमंत्री, भारत सरकार सहित राज्य के मुख्यमंत्री, विधिमंत्री सहित सभी 194 विधायको को पूर्व मे ही पत्र भेजकर उक्त पदो पर नियुक्ति प्रक्रिया नये सिरे से विधिवत तरीके से प्रांरभ करने की मांग की थी।
पाराशर ने बताया कि याचिकाकर्ता द्वारा भारत सरकार जरिये चीफ सेक्रेटी, विशिष्ट शासन सचिव विधि एवं विधिक कार्य विभाग, राजस्थान सरकार, अतिरिक्त चीफ सेक्रेटी गृह विभाग राजस्थान सरकार व जिला कलेक्टर अजमेर को पक्षकार बनाकर विधिविरूद्व तरीके से राजस्थान मे लोक अभियोजक, अपर लोक अभियोजक, विशिष्ट लोक अभियोजक व राजकीय अधिवक्ता की नियुक्ति के लिये अपनायी जा रही प्रक्रिया को रिट के जरिये उच्च न्यायालय जयपुर मे चुनौती दी थी जिस पर न्यायालय ने आदेश पारित करते हुए राजस्थान सरकार के विधि एवं विधिक कार्य विभाग (राजकीय वादकारण) के शासन सचिव राजेश गुप्ता द्वारा दिनंाक 26.6.2024 को जिला कलेक्टरो को पत्र जारी कर उक्त पदो पर नियुक्ति हेतु अधिवक्ताओ का अतिरिक्त पैनल मांगने हेतु सबंधित जिला कलेक्टर को पत्र जारी किये थे जिसके संबंध मे नियुक्ति हेतु पैनल के अतिरिक्त शेष रहे आवेदको मे से प्रत्येक पद के लिए अतिरिक्त तीन और अधिकतम पांच योग्य अधिवक्ताओ का अतिरिक्त पैनल योग्यता के आधार पर संबंधित जिला एवं सैशन न्यायालय से परामर्श कर अनुशसा पत्र के साथ मांगे गये थे और तीन दिवस के भीतर आवश्यक रूप से विशेष वाहक से विभाग को भिजवाने हेतु सर्वोच्च प्राथमिकता के साथ पत्र जारी किया गया था जिस पर माननीय उच्च न्यायालय ने रोक लगाते हुए उक्त आधार पर नियुक्ति प्रक्रिया पर रोक लगाने के आदेश जारी कर सरकार व उसके विभागो से जवाब तलब किया गया है जिसकी सुनवाई 6 सप्ताह बाद के लिए भी शीर्ष अदालत ने निर्देश जारी किये है।
पाराशर ने बताया कि उक्त याचिका मे विधि एवं विधिक कार्य विभाग के मैन्यूवल 1999 व नागरिक न्याय सुरक्षा सहिता की धारा 18 के तहत उक्त पदो पर नये सिरे से आवेदन प्रक्रिया सरकार द्वारा जारी करते हुए नियुक्तियां करने की मांग की गयी है तथा सरकार द्वारा अपनायी गयी पूरी प्रक्रिया को ही विधिविरूद्व बताते हुए याचिका मे विविध कानूनी पहलूओ पर चुनौती दी गयी है। पाराशर ने बताया कि उनकी याचिका के अतिरिक्त भी अजमेर के अधिवक्ता सुनील समदरिया द्वारा अतिरिक्त महाअधिवक्ता पदमेश मिश्रा जो उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश मनोज मिश्रा के पुत्र है की नियुक्ति को भी लिटिगेशन पॉलिसी के विपरीत जाकर नियुक्ति करने को राजस्थान उच्च न्यायालय मे चुनौती दी है और दिनंाक 22.8.2024 को सरक्यूलेशन के जरिये मंत्रीमण्डल का निर्णय लेकर 10 वर्ष का अनुभव घटाकर 5 वर्ष कर अगले दिन 23.8.2024 को नियुक्ति करने पर भी सरकार भी नोटिस जारी किये गये है। उसके अतिरिक्त एक याचिका राज. उच्च न्यायालय जोधपुर मे भी जो नियुक्तियां सरकार द्वारा पी.पी, ए.पी.पी, राजकीय अधिवक्ताओ को लेकर की गयी है उसमे भी सुनवाई प्रक्रिया जारी है ऐसे मे सरकार की सम्पूर्ण नियुक्ति प्रक्रिया पर राजस्थान के उच्च न्यायालयो मे प्रश्नचिन्ह उत्पन्न कर दिया है जिस पर सम्पूर्ण नियुक्ति प्रक्रिया नये सिरे से प्रांरभ करने की राजकीय अधिवक्ता संघर्ष समिति ने मांग की है। इस सबंध मे राजकीय अधिवक्ता द्वारा माननीय उच्च न्यायालय के द्वारा पारित आदेश की प्रति राजस्थान सरकार, भारत सरकार सहित विशिष्ट शासन सचिव, जिला कलेक्टर को भेजकर उच्च न्यायालय के आदेश की पालना सुनिश्चित करने की मांग की गयी है। लोक अभियोजक विवेक पाराशर, सहित राजकीय अधिवक्ता राजेन्द्र सिंह राठौड, राजेश कुमार ईणानी, ब्रजेश कुमार पाण्डे, विक्रम सिंह शेखावत, मंजुर अली, गंगाराम रावत, अशरफ बुलंद खान, गुलाम नजमी फारूखी, रूपेन्द्र कुमार परिहार, अशोक गुर्जर इत्यादि मौजूद रहे।