‘किसान का राम और राज दोनों रूठे, आय दोगुनी का वादा निकला मृगमरीचिका”

“भाजपा सरकार पर बड़ा हमलाः अजमेर से 2024 लोकसभा कांग्रेस प्रत्याशी व डेयरी अध्यक्ष रामचंद्र चौधरी बोले- ‘किसान का राम और राज दोनों रूठे, आय दोगुनी का वादा निकला मृगमरीचिका”

अजमेर।
अजमेर से 2024 लोकसभा कांग्रेस प्रत्याशी व अजमेर डेयरी के अध्यक्ष रामचंद्र चौधरी ने किसानों और पशुपालकों की वर्तमान स्थिति को लेकर भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि “आज किसान का राम और राज दोनों रूठ गए हैं, और किसान की आँखों से आँसू बह रहे हैं।” उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री द्वारा 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने की घोषणा की गई थी, लेकिन यह घोषणा मृगमरीचिका साबित हुई। हालात ऐसे हैं कि किसानों को विगत वर्षों में मिलावटी खाद और नकली बीज ही नसीब हुए, जिससे उनकी मेहनत पर पानी फिर गया।
चौधरी ने आरोप लगाया कि देश में चारे की अच्छी फसलों के बीजों का किसानों को वितरण करने के बजाय निर्यात की अनुमति देकर पशुपालकों के साथ सीधा धोखा किया गया है। राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय सीड कॉर्पोरेशन पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि ये संस्थाएं “ऊँची दुकान फीका पकवान” साबित हो रही हैं, जो उन्नत बीज उपलब्ध कराने के बजाय किसानों को लुटते देखने का काम कर रही हैं।
उन्होंने फसल बीमा योजना और आपदा प्रबंधन को भी आड़े हाथों लेते हुए कहा कि किसानों को मिलने वाला मुआवजा “खोदा पहाड़ निकली चुहिया” जैसा सावित हो रहा है। बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने किसानों की कमर तोड़ दी है, लेकिन सरकार द्वारा समय पर मुआवजा और बीमा भुगतान नहीं किया जा रहा। हालात ऐसे हैं कि “नौ दिन चले अढ़ाई कोस” वाली कहावत चरितार्थ हो रही है और सरकार कुंभकर्ण की नींद सो रही है।
चौधरी ने आगे कहा कि बेमौसम बारिश से बचाव के लिए कृषि उपज मंडियों में किसी प्रकार के सुरक्षा उपाय नहीं किए गए, जिससे गेहूं और अन्य कृषि उत्पाद खराब हो गए। इसके बावजूद सरकार द्वारा खरीद में टालमटोल रवैया अपनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा बार-बार नई कृषि नीति से किसानों की आय दोगुनी करने के दावे किए गए, लेकिन हकीकत यह है कि नकली खाद और बीज के कारण किसान पूरी तरह लुट गया है।
उन्होंने पशुपालकों की स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि हरे चारे, रिजका और SSG ज्वार जैसे बीजों के निर्यात की अनुमति देकर पशुओं के मुंह का निवाला तक छीन लिया गया है। यह निर्णय किसानों और पशुपालकों के हितों के खिलाफ है।
उपरोक्त तथ्यों के अतिरिक्त चौधरी ने कहा कि भारत सरकार द्वारा अमेरिका के साथ किया गया व्यापारिक करार आने वाले समय में भारतीय किसानों के लिए घातक साबित हो सकता है। उनका आरोप है कि इस समझौते के कारण देश का किसान प्रतिस्पर्धा में पिछड़ जाएगा और आने वाले समय में कंगाल होने की स्थिति तक पहुंच सकता है।
चौधरी ने बताया कि पिछले वर्षों में प्राकृतिक आपदाओं के कारण किसानों की फसलें बर्बाद हो गई थीं, लेकिन भारत सरकार की आपदा प्रबंधन नीति के तहत मिलने वाला मुआवजा आज तक लंबित है। इतना ही नहीं, फसल बीमा का भुगतान भी कई जगह किसानों द्वारा जमा कराए गए प्रीमियम के बराबर तक नहीं हुआ है। प्रदेश के अधिकांश जिलों में फसल खरावे का मुआवजा और बीमा राशि अब तक अटकी हुई है।
उन्होंने मनरेगा के भुगतान में देरी को लेकर भी सरकार को घेरा और कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में लघु, सीमांत और भूमिहीन मजदूर आज भी भुगतान की आस लगाए बैठे हैं। इन सभी परिस्थितियों के कारण सरकार पर कटाक्ष करते हुए उन्होंने कहा कि यह सरकार केवल घोषणाओं तक सीमित रह गई है “मन के लड्डू फीके क्यों”, “ढाक के तीन पात” और “आसमान से गिरे खजूर में अटके” जैसी स्थिति बनी हुई है।
अंत में चौधरी ने कहा कि मौजूदा हालात यह साफ दर्शाते हैं कि किसान पूरी तरह उपेक्षित है और सरकारों की नीतियां जमीनी स्तर पर विफल साबित हो रही हैं। किसानों और पशुपालकों के हितों की अनदेखी अब बर्दाश्त के बाहर है और यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।

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