आत्मचिंतन की दिवाली
दिवाली रोशनी का पर्व है, लेकिन सच्ची रोशनी तो तब आती है जब हमारे मन के अंधेरे मिटते हैं। हम हर साल अपने घरों की सफाई करते हैं — दीवारें धोते हैं, नए कपड़े पहनते हैं, दीप जलाते हैं। पर क्या कभी हमने अपने भीतर झांका है? क्या हमने अपने मन के कोनों में जमा … Read more