“मिच्छामि दुक्कडम्”
मन की गलियों में धूल बहुत है, शब्दों में भी कभी भूल बहुत है। अनजाने में जो आघात हुए, उनके कारण रिश्ते खंडित हुए। आज अहंकार सब त्याग रहा हूँ, तेरे चरणों में सिर झुका रहा हूँ। क्रोध, ईर्ष्या के हर आलम से, मुक्ति माँगता हूँ अपने कर्म से। मिच्छामि दुक्कडम् कहता हूँ दिल से, … Read more