किसे मिलेगा अजमेर उत्तर का कांग्रेस टिकट?

लंबी कशमकश के बाद जैसे ही नरेन शहाणी भगत को नगर सुधार न्यास का सदर बनाया गया है, एक नई बहस शुरू हो गई है। कुछ लोगों का मानना है कि आगामी चुनाव में भगत को ही अजमेर उत्तर की टिकट मिलेगी तो कुछ का कहना है कि अब गैर सिंधी का दावा मजबूत हो जाएगा।

असल में नगर सुधार न्यास का अध्यक्ष बनने के लिए अनेक दावेदार कोशिश कर रहे थे। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के करीबी पूर्व विधायक डॉ. श्रीगोपाल बाहेती का नाम टॉप पर था, मगर बीस सूत्रीय कार्यक्रम क्रियान्वयन समिति में उपाध्यक्ष बनाए जाने के बाद उनकी संभावना कम हो गई थी।

हालांकि इसके बाद भी आखिरी समय तक उनका नाम चलता रहा। इसी प्रकार महेंद्र सिंह रलावता, डॉ. लाल थदानी, दीपक हासानी, ललित भाटी, डॉ. राजकुमार जयपाल आदि ने भी कम कोशिश नहीं की। रलावता को चूंकि शहर कांग्रेस अध्यक्ष बना दिया गया, इस कारण उनका नाम कटा हुआ माना जा रहा था। दीपक हासानी का नाम इस कारण कटा, चूंकि वे गहलोत के पुत्र वैभव गहलोत करीबी हैं और वैभव नाम जमीन घोटाले में घसीटा गया, इस कारण गहलोत हासानी को अध्यक्ष बना कर नई मुसीबत मोल नहीं लेना चाहते थे।

इसी प्रकार डॉ. राजकुमार जयपाल के नाम पर संचार राज्य मंत्री सचिन पायलट राजी नहीं थे। पूर्व उप मंत्री ललित भाटी को नरेगा की राष्ट्रीय सलाहकार समिति में लेने के कारण वे भी शांत हो गए।

कुल मिला कर बात यहां पर आ कर अटक गई कि सिंधी को अध्यक्ष बनाया जाए या वैश्य को। वैश्य समाज का कहना था कि यदि अध्यक्ष सिंधी को बनाते हैं तो टिकट हमें दिया जाए और वैश्य को अध्यक्ष बनाया जाता है तो हम टिकट की दावेदारी छोडऩे को राजी हैं। इसी जद्दोजहद के बीच किशनगढ़ के जाने-माने नेता रहे स्वर्गीय श्री किस्तूर चंद चौधरी के पुत्र पूर्व विधायक डॉ. के. सी.चौधरी का नाम उभरा, मगर अजमेर के वैश्य नेताओं ने उनका विरोध कर किसी स्थानीय वैश्य को बनाने का दबाव बना दिया। ऐसे में वैश्य महासभा के नेता कालीचरण खंडेलवाल का भी उभरा और उनका नाम ही फाइनल माना जा रहा था, मगर ऊपर उनकी शिकायत ये हुई कि वे संघ से जुड़े रहे हैं।

ऐसे में भगत की किस्मत चेत गई। भगत के अध्यक्ष बनने के साथ यह चर्चा आम हो गई है कि विधानसभा चुनाव में गैर सिंधी के रूप में डॉ. बाहेती को अजमेर उत्तर का टिकट देने के कारण सिंधियों में उपजी नाराजगी को दूर करने की कोशिश की गई है। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक ही है कि अब वैश्य समाज को खुश करने के लिए क्या कांग्रेस अजमेर उत्तर का टिकट किसी वैश्य को देगी। कम से कम वैश्य समाज का तो यही दावा है।

दूसरी ओर सिंधी समुदाय का मानना है कि भले ही भगत को पार्टी की सेवा का इनाम मिला हो, मगर इससे सिंधियों का दावा कमजोर नहीं हुआ है। कांग्रेस फिर से किसी वैश्य को टिकट दे कर हारने की रिस्क नहीं लेगी। उनका मानना है कि अब भगत दो साल में अपना ग्राउंड तैयार कर लेंगे और वे पहले से ज्यादा सशक्त दावेदार हो जाएंगे। सिंधी समुदाय में भी कुछ दावेदार ऐसे हैं जो यह कह कर आगे आने की कोशिश कर रहे हैं कि भगत को तो इनाम मिल गया, मगर अब उनको चांस दिया जाना चाहिए।

अपने कप्तान चपेट में आने पर चेती पुलिस अजमेर की पुलिस अपने कप्तान राजेश मीणा के एक प्राइवेट बस की चपेट में आ कर चोटिल होने पर चेती है। अब उसने रात 11 बजे तक शहर में भारी वाहनों के प्रवेश पर रोक को सख्ती से अमल में लाना शुरू कर दिया है।

ज्ञातव्य है कि गत दिनों मीणा रात साढ़े आठ बजे जब अपने निवास की ओर कार से जा रहे थे, तो सामने से आ रही एक प्राइवेट बस ने उन्हें टक्कर मार दी, जिससे कार बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गई और उन्हें इलाज के लिए जयपुर रेफर करना पड़ा।

उल्लेखनीय है कि रात दस बजे तक भारी वाहनों के प्रवेश पर रोक पहले से लगी हुई है, मगर पुलिस वाले ही अपनी जेबें गरम करने के लिए ढ़ीलाई बरत रहे थे। चूंकि भारी वाहन सुविधा शुल्क दे कर सुविधा हासिल कर रहे थे, इस कारण उनके तो शिकायत करने की कोई भी संभावना थी नहीं और आम लोगों को कोई मतलब नहीं था, इस कारण पुलिस वाले मौज कर रहे थे। नतीजतन प्रमुख मार्गों पर हर वक्त दुर्घटना की आशंका बनी रहती थी और यातायात प्रभावित होता था। मगर अब जब कि खुद पुलिस के ही कप्तान एक भारी वाहन की चपेट में आ गए तो पुलिस की पोल खुल गई। उसने कागजों पर बने नियमों पर अमल करना शुरू कर दिया है। यानि कि उसे आम जनता से कोई मतलब नहीं है। जब खुद के एसपी चपेट में आए तब जा कर ड्यूटी का होश आया है।

पहले रात दस बजे तक रोक थी, जिसे बढ़ा कर ग्यारह कर दिया गया है। पुलिस अब इतनी सख्त हो गई है कि वह ग्यारह बजे बाद भी भारी वाहनों को रोक रही है। ऐसे में व्यापारियों को परेशानी हो रही है। उन्हें शहर के बाहर ही भारी वाहन खाली करवा कर छोटे वाहनों में सामान लाना पड़ रहा है।

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