याद रहेगा ये दौर ए–हयात हमको, क्या खूब तरसे हैं सभी ‘कुर्सी’ के लिए..!!*

*किशनगढ।शहर में राजनीति के तंग गलियारे अब सडांध मारने लगे हैं।आम जन हैरान है..’कुर्सी’ की रस्सा कस्सी को देखते।चींटी के उग आये पर की तरह अभी हाल ही में चुने गये राजनीति के परिन्दे भी फडफडाने लगे हैं।*
*सभापति की कुर्सी के दिवानों ने शहर की राजनीति को गरमा दिया है।आज खुले तौर पर सभापति की कुर्सी को लेकर चल रही जंग में शामिल रणबांकुरों के नाम पर वैधानिक मोहर लग चुकी है..कांग्रेस से प्रदीप अग्रवाल और भाजपा की ओर से दिनेश सिंह राठोड आगामी 7 फरवरी को सभापति की कुर्सी को लेकर अपना अपना शक्ति प्रदर्शन(कूटनीति प्रदर्शन कहें तो अधिक अच्छा रहेगा) करेंगे।*
*उल्लेखनीय है कि किशनगढ परिषद के 60 वार्डों में भाजपा ने 34,कांग्रेस ने 17,निर्दलीय 8 तो एक सीटRLP ने हासिल की है।बाऊजूद इसके पद लोलुपता के चलते राजनीति के रणबांकुरों के बीच यह युध्द छिडा है।राजनीति में समाहित कूटनीति की गहरी चालें परवान चढी है।फौजें अस्तबल में कैद है।सभी एक-दूजै को शक की निगाह से देखने में लगे हैं।* *गर राजनीतिक गलियारे की बात करें तो वहां अटकलों की गर्माहट है।इस बात की चर्चा गरमा रही है कि भाजपा में भीतराघात होना तय है।वहीं दूसरी ओर विरोधी गुट कांग्रेस को जरुरत से कुछ अधिक वोटर मिल जाने की उम्मीद है..की चर्चायें भी जोर पकड रही है।कारण बताया जा रहा है कि भाजपा ने प्रारम्भ से ही सुरेश दगडा को अपना सभापति थरप दिया था।इसबीच पैराशूट राजनीति ने दिनेश सिंह राठोड का हाथ थाम लिया। परोसी थाली सरक जाने से सुरेश दगडा क्षुब्ध हुए।जबकि वे खुद भी सभापति बन जाने के लिए बरसों से छोडी राजनीति में दोबारा पैराशूट बन कर उतरे हैं।ऐसे में श्री दगडा को विधायक सुरेश टाक के साथ रही पुरानी पक्की दोस्ती याद आई…यहीं से भाजपा का समीकरण बिगडने लगा…चौबे जी छब्बे जी बनने से पहले ही दुबे जी बन कर रह गये।जमा जमाया सारा खेल खराब हुआ।गलियारे की चर्चाओं को सच मानें तो यहीं से कांग्रेस का फुदकना शुरु हुआ..उसमें हवा भरने का बीडा उठाया विधायक सुरेश टाक ने…क्यूंकि वे भी आम जन द्वारा प्रगति मंच को नकारा जाने से घायल हुए बैठे थे।कमोबेश किसी को दोस्ती याद आई तो किसी को दुश्मन भी दोस्त लगने लगे।फिलाहल 7 फरवरी तक शहर के राजनीतिक गलियारे में चर्चाओं का बाजार यूं ही गरमाता रहेगा और हम आपको वाकिफ कराते रहेंगे।बहरहाल शहर के राजनीतिक बहरुपियों के तरह तरह के नाटक शहरवासियों के सामने सरे आम हो रहे हैं।*
*_सर्वेश शर्मा✍️*
*संपादक..’कुछ अलग’*
*मो.9352489097*

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