अजमेर पर गीत

पिछले दिनों सोशल मीडिया पर अजमेर शहर पर कुछ गीत खूब धूम मचाए हुए थे। चूंकि रचनाओं के साथ उनके लेखकों का नाम नहीं था, इस कारण यह पता नहीं लग पाया कि इनकी रचना किसने की है? अजमेर का परिचय कराने वाले इन गीतों को लिखने वाले अज्ञात रचनाकारों का बहुत बहुत साधुवाद। इनमें वर्तनी व व्याकरण की त्रुटियां थीं, जिन्हें दुरुस्त कर दिया गया है।

अजमेर की जो धरा है थोड़ा हटके जरा है
शहर ये खूबियों और रस-स्वादों से भरा है
स्टेशन के नए गेट से निकलते ही गांधी मार्केट दिखता है
जहां बिक्किलाल का शरबत बिकता है
मदार गेट में घुसते ही पुरानी मंडी नजर आती है
इस संकड़ी गली को देख रूह कांपती है
एक बात दिमाग को बरबस छील जाती है
कैसे इस गली में औरतें दोने चाटती हैं
ये गली प्राचीन अजमेर की याद दिलाती है
बुद्धामल के सोन हलवे से मिलवाती है
नया बाजार भी अपने दो रूप दिखाता है
दिन में ये सोने चांदी का गढ़ कहलाता है
शाम ढ़लते ही चौपाटी सा नजर आता है
सर्दी में चरी चाय और सूप लीजिये जनाब
गर्मी में मिल्क बादाम, फालूदा है लाजवाब
कड़ी कचोरी में अजमेर का नहीं है कोई तोड़
नया बाजार चौपड़ या केसरगंज के मोड़
बरसात का मौसम अलग मजा लाता है
बिसिट के दाल पकौड़ों में आनंद आता है
लोग कहते हैं, समझ समझ का फेर है
इसीलिए इस नगरी का नाम अजमेर हैै

लीजिए, एक और गीत सुनिये
वाह रे अजमेर
तेरे शहर में
जहां गली तो है तो
कड़क्का चौक भी है
नया बाजार की चमक के साथ
पुरानी मंडी भी है।
श्रीनगर तो कश्मीर में है
पर श्रीनगर रोड यहां है
आदर्श नगर का आदर्श है
पर मामले उलझने पर
कचहरी रोड भी यहीं है
हाथीभाटा में कोई हाथी या भाटा नहीं
तो लोहागल में भी कोई लोहा गलता नहीं
चूनपचान गली में कोई हो हल्ला नहीं
तो झूला मोहल्ला में भी कोई झूला नहीं
नला बाजार में नाले के
पानी का बहाव है
प्यास बुझाने के लिये
गोल प्याऊ का ठहराव है
नवाब का बेड़ा से नवाबी तो गयी
पर साथ में ठठेरा चौक की ठक ठक भी गयी
आशाओं भरा आशा गंज तो है
पर बगैर किसी रंज के
सिर्फ गंज भी यहीं है।
डिग्गी तलाब तो तलाव न रहा
साथ में खारी कुई पता नहीं
अब भी खारी है कि नहीं
इमाम बाड़ा शांत तो
तोपदड़ा में भी कोई तोप का शोर नहीं
पूराने शहर के बाहर
दिल्ली गेट, आगरा गेट भी है
शहर के भीतर
अंदर कोट भी है
घसेटी और चूनपचान
जैसी गलियों में पेट न भरे तो
लंगर खाना गली भी है
चलते चलते अब थका हूं
ठहराव के लिये
पड़ाव आया हूं
पता नहीं कौन आ कर पड़ाव करते थे
अब तो आवाजाही, गहमा रही है।

तेजवानी गिरधर
7742067000

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