मिजाज ए अजमेर

एक व्यक्ति मरने के बाद ऊपर गया। यमराज ने उसे सजा देने के लिए पहले उसे एक ठण्डे मकान में रखा जहां तापमान 4 डिग्री था। फिर भी वह आदमी हंसता हुआ बाहर आया और बोला कि एक पंखा और होता तो मजे आ जाते। अब यमराज ने उसे एक गर्म मकान में रखा, जहां का तापमान 45 डिग्री था और उसमें एक पंखा भी लगा दिया …फिर भी वह आदमी हंसता हुआ बाहर आया और बोला बिना पंखे के भी सही था। यमराज को गुस्सा आया और उस पर बारिश, ओले व तूफान आदि सब प्रयोग किये, लेकिन उसे कुछ नहीं हुआ तो फिर यमराज ने उसको एक गड्ढे और पानी से भरी डिग्गी में भेजा और बोला इसको पार करके आ…वो आदमी हंसता हुआ दूसरी तरफ से बाहर आकर बोला अपने शहर की याद आ गयी। वो बोला मैं अपने षहर की गलियों अक्सर ऐसे पार करता हूं। यमराज ने परेशान होकर चित्रगुप्त से कहा कि इसका रिकॉर्ड चैक करो…..चित्रगुप्त ने रिकॉर्ड देखकर कहा महाराज ये आदमी अजमेर का रहने वाला है। ये सब यातनाएं झेल कर अपने आप को हर तरह से डॅवलप कर चुका है।
ये 45 डिग्री के तापमान में भी गरमा गरम कचौरी खाता है। ठण्ड में भी मटके की कुल्फियां खाता है और गड्ढे और पानी से भरी सड़कों की आदत हो चुकी है इसे। ये इसका कुछ नही बिगाड़ सकती.. उसके बावजूद ये टैक्स भरता है। सहनशील ’अजमेर’ वासियो को पुनः समर्पित है।
यह आलेख कभी अजमेर में जनस्वास्थ अभियांत्रिकी विभाग में अधिषाशी इंजीनियर रहे इंजीनियर शिव शंकर गोयल ने भेजा है। वे सुपरिचित व्यंग्य लेखक हैं और वर्तमान में दिल्ली में रहते हैं। अजमेर से उनका गहरा लगाव है।

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