एक जि़द और जुनून भरा आंदोलन.. जो बुझाए ना बुझे लग रहा है

शाहीन.. यानि बाज़। जिसकी बाहों में आसमां होता है और ऊपर उडऩे का हौसला। नज़रें ज़मीन पर। अपनी परवाज़ में जैसे पूरी दुनिया को अपने पंखों में समेट लेना चाहता हो। पूरी ताकत से हवा को चीरता उंचाँ उड़ता बाज़ जैसी हिम्मत उन मुस्लिम महिलाओं ने दिखाई है जिनके बारे में कहा जाता रहा है कि उनमें इतनी ताकत कहाँ ? वो तो दबी, कुचली, घरों की चारदीवारी में कैद कमज़ोर औरत है। राजनीति किसी की भी हो लेकिन दिल्ली से लेकर जयपुर और हर राज्य की राजधानीयों, छोटे- बड़े शहरों में दिल्ली के शाहीन बा$ग की तजऱ् पर चौराहों, शहीद स्मारकों, गार्डनों में उमड़ रही हैं। लेकिन वही अपने बुर्के में, गैर मर्दो के सामने उसी लाज के साथ जिसका उनकी मज़हबी और घरेलू जि़दगीं से वास्ता रहा है।

मुजफ्फर अली
भले ही उनके साथ शौहर, भाई, पिता हों जो दूर बैठ जाते हैं और महिलाएं समूह में पूरी ताकत से संविधान बचाने, देश बचाने, सीएए कानून , एनआरसी के खिलाफ नारे लगाती जैसे अपने वजूद का अहसास कराना चाहती हैं। देश के इतिहास में इस तरह का पहला आंदोलन है जो मुस्लिम महिलाओं को उद्वेलित कर रहा है। बच्ची, युवा, बुजुर्ग हर उम्र की महिलाएं घरों से निकल प्रदर्शन में शामिल हो रही हैं। यह अप्रत्याशित है। हैरत है। ना मीडिया को ना सत्ता पक्ष को समझ में यह आ रहा कि आ$िखर क्यूं यह इतनी उग्र हैं ? किसने इन्हे कहा है कि तुम प्रदर्शन करो नही तो देश से निकाल दिए जाओगे ? यही वजह है कि अपने घर को बचाने और अपने वजूद का अहसास कराने महिलाओं ने एकजुट होकर सरकार के विरोध में मोर्चा खोल दिया है। जयपुर के शहीद स्मारक पर प्रदर्शन करतीं बुजुर्ग महिलाएं कहतीं है अब तो चाहे कुछ भी हो जाए जब तक सरकार कानून वापस नहीं लेगी हम नहीं मानेंगें। जब मीडियकर्मी उनसे सवाल करती है कि सरकार कह रही है कि कानून किसी भी मुस्लिम के खिलाफ नहीं है और ना ही किसी को निकाला जाएगा तो भीड़ कह उठती है हमें ऐसा कानून ही मंजूर नहीं जिसमें मुस्लिम वर्ग को शामिल ना किया जाए, सरकार कुछ भी कह ले, हम भी पीछे नहीं हटेंगें। प्रदर्शन स्थल पर माईक पर कोई ना कोई सामाजिक संगठन का कार्यकत्र्ता या किसी नेता का भाषण चलता रहता है, बीच बीच में अल्लामा इकबाल का कौमी तराना और देशभक्ति के नारे लगते रहते हैं। प्रदर्शन स्थल पर मौहम्मद आसिफ दाउदी, हाफिज़ मंज़ूर साहब, मौअज्ज्ज़म अली बताते हैं कि सुबह दस बजे महिलाएं और लोग जुडऩा शुरु हो जाते हैं जो रात आठ बजे तक रहते हैं। फिर रात को तीन चार सौ महिलाएं स्थल पर तकरीर करतीं, विरोध प्रदर्शन के नारे लगाती यहीं सो जाती हैं जिनके खाने पीने की व्यवस्था सामाजिक संगठनों के लोग मिलकर करते हैं। प्रदर्शन स्थल पर ही एक संगठन ने मेडिकल कैंप भी लगा रखा है। प्रदर्शन स्थल पर सुरक्षा के लिए पुलिस की तैनाती रहती है। यह आदोंलन दिखने में और दिखाने में भी मुस्लिम वर्ग का कहा जा रहा है जबकि इसमें भीम आर्मी से जुड़े दलित और अनेक छात्र संगठन शामिल हैं जिनमें जाट, राजपूत छात्र भी हैं। जयपुर शहीद स्मारक पर आंदोलन स्थल पर दिन रात व्यवस्था संभालने वाले और शहीद भगत सिंह सहित अनेक शहीदों के चित्र की रंगोली बनाने वाले, देश भक्ति नारे लगाने वाले आयुष भाटी, मनीषा रिनवां, रितांश आज़ाद, नूरैल जैसे अनेक छात्र आंदोलन में सहभागी बने हैं।

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