राजस्थान आवासन मंडल के अधिकारीयों पर की कार्यवाही की मांग

अजमेर दिनांक 29 सितम्बर, 2017, राजस्थान आवासन मंडल द्वारा मनमाना रवैया अपनाते हुए विभाग से मांगी जाने वाली सूचना के अधिकार के तहत सूचनाओं के आवेदन पर भी 18% जीएसटी लगाने की घोषणा किया जाना न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है | वर्तमान में आरटीआई के आवेदन के साथ 10/- रूपये का पोस्टल आर्डर लगता है किन्तु उक्त घोषणा के उपरांत आवदेनकर्ता को 12/- रूपये का पोस्टल आर्डर लगाना पढ़ रहा है |
अजमेर जिला कांग्रेस कमेटी के सीए प्रकोष्ठ के अध्यक्ष सी. ए . विकास अग्रवाल ने बताया कि जीएसटी का जो प्रावधान है व सूचना के अधिकार पर लागू नहीं होता है क्योंकि जीएसटी वस्तु एवं सेवा पर देय कर है और ऐसे में हाउसिंग बोर्ड द्वारा आरटीआई के आवेदन शुल्क पर ही 18 प्रतिशत जीएसटी वसूलना मनमाना व तानाशाह रवैया है और कानून के विपरीत है | हाउसिंग बोर्ड के अधिकारीयों द्वारा बिना चार्टर्ड अकाउंटेंट से सलाह लिए व बिना वित्त नियमों को पढ़े, गलत तरीके से आरटीआई में जीएसटी शुल्क वसूल कर कमाई का नया रास्ता ढूंढ रहे हैं परन्तु उन्हें अभी तक जीएसटी का मतलब तक पता नहीं है | सीए अग्रवाल के अनुसार जीएसटी पूर्णतया व्यावसायिक गतिविधियों पर आधारित कर है | वही दूसरी और पूर्व लोक अभियोजक विवेक पाराशर ने राजस्थान आवासन मंडल द्वारा आरजीएसटी व सीजीएसटी का शुल्क आरटीआई आवेदन में वसूल कर गैर कानूनी रवैया प्रदर्शित कर दिया है जबकि सूचना के अधिकार अधिनियम में ही 10/- रूपये आवेदन शुल्क का उल्लेख है | बिना आरटीआई अधिनियम में संशोधन के बिना कोई शुल्क अतिरिक्त रूप से वसूल नहीं किया जा सकता है फिर भी हाउसिंग बोर्ड नहीं माना तो उनके विरुद्ध कानूनी कार्यवाही की जाएगी | वही तीसरी और प्रदेश राजीव गाँधी यूथ फेडरेशन के प्रदेश संयोजक कमल गंगवाल ने बताया कि हाउसिंग बोर्ड विभाग ही बंद होने के कगार पर है और हाउसिंग बोर्ड की कॉलोनियों में विकास की दर शुन्य प्रतिशत है | ऐसे में हाउसिंग बोर्ड द्वारा आरटीआई पर जीएसटी शुल्क वसूल कर सरकार का पहला लुटेरा बोर्ड हो गया है ऐसे में गंगवाल ने बोर्ड को ही बंद कर देने की मांग की है क्योंकि हाउसिंग बोर्ड का कोई औचित्य ही नहीं रह गया है |
अग्रवाल, पाराशर व गंगवाल ने बताया कि इस सम्बन्ध में हाउसिंग बोर्ड के गैर जिम्मेदाराना रवैये को व आरटीआई में जीएसटी शुल्क वसूलने के सम्बन्ध में प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर दोषी अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने की मांग की है और भविष्य में सभी सरकारी विभागों को इस सम्बन्ध में दिशा निर्देश जारी करने की मांग की है ताकि घटना की पुनरावृति ना हो |

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