ट्रेड एसोसिएशन का उत्तर प्रदेश में ई.सिगरेट के प्रतिबंध पर समीक्षा का आग्रह

ऽ ऐसोसिएशन ने पत्र में इस तथ्य की ओर मुख्यमंत्री का ध्यान आकृष्ट किया गया है कि भारत सरकार ने एक अध्यादेश के माध्यम से पारंपरिक सिगरेट के लिए एक सुरक्षित विकल्प पर प्रतिबंध लगाया जा रहा है। यह एक ऐसा विकल्प है जो उत्तर प्रदेश में सिगरेट पीने वाले 11 लाख लोगों को उपलब्ध कराया जाना चाहिए

ऽ ऐसोसिएशन ने उत्तर प्रदेश सरकार से आग्रह किया है कि वह नागरिकों के हितों में काम करते हुए केन्द्र सरकार से कहे कि राज्य के स्वास्थ्य विभाग को पारम्परिक सिगरेट के उभरते हुए विकल्प ई सिगरेट का मूल्यांकन करने के लिए स्वतंत्र अध्ययन करने की अनुमति प्रदान करे जिसे 70 से अधिक देशों ने प्रतिबंधित करने के बजाय उसका नियमन किया है

लखनऊ, 1 नवम्बर 2019ः भारत में ई-सिगरेट पर प्रतिबंध लगाने के लिए एक अध्यादेश लाने के केन्द्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के हालिया कदम के मद्देनजर, भारत में म्छक्ै के कारोबारी प्रतिनिधियों के स्वैच्छिक संगठन टेªंड्स (ज्त्म्छक्ै) ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर उनसे इस बात का मूल्यांकन करने का अनुरोध किया है कि वह खुद देखें कि राज्य के नागरिक के सर्वोत्तम हित में क्या है। ट्रेंड्स इलेक्ट्रॉनिक निकोटीन डिलीवरी सिस्टम (म्छक्ै) उपकरणों के आयातकों, वितरको और विक्रेताओं का एक समूह है।
उत्तर प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को लिखे अपने पत्र में, ज्त्म्छक्ै ने इस बात को रेखांकित किया है कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने तंबाकू सेवन करने के लिए उपयोग में लाए जाने वाले विभिन्न तरीकों से जुड़े जोखिमों का तुलनात्मक आकलन या अध्ययन या कोई शोध नहीं किया है और उसने सभी राज्यों को ई सिगरेट पर प्रतिबंध लगाने का परामर्श भेज दिया है। मंत्रालय ने भारत में ई-सिगरेट पर प्रतिबंध लगाने के अपने फैसले को सही ठहराने के लिए अमेरिका से प्राप्त आंकड़ों को आधार बनाया है।
ज्त्म्छक्ै की संयोजक प्रवीण रिखी ने मुख्यमंत्री से गुहार लगाते हुए कहा, ’’हम आपसे अनुरोध करते हैं कि उत्तर प्रदेश के नेता के रूप में आप केंद्र सरकार से कहें कि वह राज्य के स्वास्थ्य विभाग को इस बारे में अपना शोध और अध्ययन करने की अनुमति दे ताकि कोई ऐसा तर्कसंगत फैसला लिया जा सके जो राज्य के ज्यादा से ज्यादा लोगों के हित में हो।’’
उन्होंने कहा, ‘‘जनस्वास्थ्य राज्य विषयक मामला है और तंबाकू के सेवन से जुड़ी बीमारियों के इलाज पर होने वाले अत्यधिक खर्च का बोझ राज्य के खजाने पर पडता है। अगर हमारे पास सिगरेट सेवन का एक सुरक्षित विकल्प है, जो कैंसर होने के मामलों में 50 प्रतिशत तक कमी कर देता है, तो आपके राज्य को धूम्रपान करने वालों के समक्ष इस विकल्प को क्यों नहीं पेश करना चाहिए? राज्य में तंबाकू खपत की स्थिति चिंताजनक है क्योंकि 15 वर्ष व इससे अधिक उम्र के लोगों में तंबाकू सेवन करने वालों का प्रतिशत 35.5 है तथा स्मोकर 13.5 प्रतिशत हैं।’’
ज्त्म्छक्ै ने बताया कि ई-सिगरेट स्मोकर व सरकार दोनों के ही लिए एक समाधान बन सकता है- जो स्मोकर कम हानिकारक विकल्प को अपनाना चाहते हैं उनके लिए यह मुफीद है तथा स्वास्थ्य लागत व मृत्यु दर में कमी राज्य सरकार के लिए फायदेमंद है।
ज्त्म्छक्ै ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के समक्ष इस बात को रेखांकित किया कि ई-सिगरेट पर प्रतिबंध लगाने वाला केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय का अध्यादेश ‘‘चुनिंदा वैज्ञानिक और चिकित्सकीय राय’’ पर आधारित है। हितधारकों की एक भी बैठक के बगैर इस तरह का फैसला लेना लोकतांत्रिक तौर तरीकों की हत्या के अलावा कुछ और नहीं है। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के डॉ. अतुल अम्बेकर समेत विश्व के प्रसिद्ध चिकित्सकों एवं वैज्ञानिकों ने आईसीएमआर के उन चार दावों में से हर दावे को खारिज किया है जिन दावों के आधार पर ई-सिगरेट पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव किया गया और जिन दावों के आधार पर यह प्रतिबंध लगाया गया। ज्त्म्छक्ै ने मुख्यमंत्री का ध्यान ई सिगरेट से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण तथ्यों की ओर भी दिलाया है जिन पर केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने समुचित ध्यान नहीं दिया।
पत्र में कहा गया है कि 70 देशों ने ई-सिगरेट श्रेणी को सुरक्षित तरीके से संबंधित सुरक्षा उपायों के साथ धूम्रपान करने वालों व्यस्कों तक पहुंच को अनुमति दी है। ये सुरक्षा उपाय ई-लिक्विड घटकों, विज्ञापन, प्रचार, टेªडमार्क, स्वास्थ्य चेतावनी संबंधी लेबल और बाल सुरक्षा मानदंडों समेत बिक्री, उत्पादन, वितरण, उपयोग और उत्पाद डिजाइन से संबंधित हैं। इस समय केवल 28 देशों ने प्रतिबंध लगाया है जिनमें से कई विनियमित करने के बारे में विचार कर रहे हैं। उदाहरण के तौर पर यूएई ने हाल ही में प्रतिबंध हटा लिया। जिन देशों में ई-सिगरेट को विनियमित किया जा रहा है वहां धूम्रपान की दर में काफी गिरावट आई है (अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस और कई अन्य)। एक महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि अनेक देश की सरकारें एवं सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्थान परम्परागत सिगरेट की तुलना में ई-सिगरेट को काफी हद तक सुरक्षित मानते हैं (पब्लिक हेल्थ इंग्लैंड, कैंसर रिसर्च, ब्रिटेन, रॉयल कालेज आफ फिजिशियंस, सेंटे प्यूब्लिक फ्रांस और कई अन्य)।
ज्त्म्छक्ै ने अपने पत्र में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से अनुरोध किया कि वे पद का उपयोग करते हुए केन्द्र सरकार, खास तौर पर केन्द्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय से अनुरोध करें कि संसद के अगले सत्र में ई-सिगरेट पर प्रतिबंध लगाने के बारे में अंतिम फैसला लेने से पहले सार्वजनिक स्वास्थ्य, राज्य के खजाने, किसान और व्यापार रोजगार और वयस्क उपभोक्ताओं पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों पर विचार-विमर्श किया जाए।

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