श्री कृष्ण कहते हैं आओ, तुम्हारा उद्धार कर दूं!

शिव शर्मा
सामान्य तौर पर हम लोग अपने उद्धार के लिए भगवान को पुकारते हैं! किंतु कृष्ण तो स्वयं बुलाते हैं कि मेरी शरण में आओ, तुम्हारा उद्धार कर दूँ! वह ऐसे नहीं कहते हैं कि तुम अभी योग्य नहीं हो! उनके पास योग्यता अयोग्यता की तो बात ही नहीं है! वे तो सीधे-सीधे पार लगा देने की बात कहते हैं!
वे कहते हैं कि तुम मेरे ध्यान में ओम तत्सत का जाप करो! तुम्हें उच्च गति मिलेगी, तुम्हारा कल्याण होगा , तुम्हारा उद्धार होगा! कृष्ण भरोसा दिलाते हैं कि इस एक नाम से ही तुम ब्रह्म तत्व तक पहुंच सकते हो!
कृष्ण कहते हैं कि तू चाहे जितना बड़ा पापी हो, मेरी शरण में आजा! मैं तेरे खाने पीने की व्यवस्था भी करूंगा और तेरा उद्धार भी करूंगा! मेरे दिव्य तेज में जल कर तेरे पाप भस्म हो जाएंगे! तू साधुवाली गति को प्राप्त करेगा! वे कहते हैं कि मैं तेरे भीतर ( आत्मा ) ही हूं! तू बाहर मत भटक! अपने ही अंदर उतरकर मेरे तक पहुंच! ओम तत्सत का जाप तुझे मेरे तक पहुंचा देगा!
गीता के चौथे अध्याय में कहते हैं कि तुम किसी ब्रह्म ज्ञानी महात्मा की शरण में रहो तो वह भी तुम्हारा उद्धार कर देगा!
इसके बाद अट्ठारह में अध्याय में कैसे हैं — तुम्हें यदि मेरी बात समझ में नहीं आती है तो फिर जो तुम्हारी मर्जी वही करो! अर्थात तुम्हें पुनर्जन्म में ही भटकना है तो भटकते रहो! लेकिन प्रेस्टीज तो बहुत दयालु हुई है! इसी अध्याय के 64-65 श्लोक में कहते हैं — मैं सौगंध पूर्वक कहता हूं कि तू मेरी शरण में आजा , मैं तेरे सारे पाप नष्ट कर दूंगा! तेरे सारे काम कर दूंगा! मैं ऐसी प्रतिज्ञा करता हूं! भगवान किसी भी तरह मनुष्य को उसके विकारों से मुक्त कर देना चाहते हैं!

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