//फिल्म ‘सीता और गीता’ के लिए डायरेक्टर की पहली पसंद हेमा मालिनी नहीं थी…//
श्याम कुमार राई
सन् 1972 की फिल्म ‘सीता और गीता’ में हेमा मालिनी ने डबल रोल वाली भूमिका निभाई थी। मजे की बात यह है कि हेमा मालिनी निर्माता-निर्देशक की पहली पसंद नहीं थी। पहले यह भूमिका मुमताज को आफर हुई थी मगर बात पारिश्रमिक की वजह से नहीं बनी। उन दिनों मुमताज आठ लाख रुपये ले रही थी निर्माता जी पी सिप्पी उन्हें दो लाख दे रहे थे। जो मुमताज को मंजूर नहीं थी। इसलिए वो ‘सीता और गीता’ का हिस्सा न बन सकी। इस तरह मुमताज की जगह हेमा मालिनी का प्रवेश इस फिल्म में हुआ। इससे यहले भी यह भूमिका नूतन को देने पर विचार किया गया था। मगर किसी ने सलाह दी कि नूतन फिल्म के हिसाब से अधिक परिपक्व हो गई है। अधिक उम्रदराज हो गई हैं।इसलिए वो इस भूमिका के लिए उपयुक्त नहीं होंगी। फिर आशा पारिख को लेने पर भी विचार आया। मगर आशा पारिख ने निजी कारणों के चलते फिल्म में काम करने में अपनी असमर्थता जताई। इस तरह यह भूमिका हेमा मालिनी की झोली में आ गिरी।
‘सीता और गीता’ ही वह पहली फिल्म है जिसमें पहली बार मन्ना डे ने थर्मेंन्द्र के लिए पार्श्व गायन किया। इसमें उन्होंने धर्मेंद्र के लिए दो गीत गाए थे। गीत के बोल थे — 1) ‘अभी तो हाथ में जाम है…’
2) ‘जिंदगी है खेल कोई पास कोई फेल….’
इसके बाद सन् 1975 में फिल्म शोले में भी मन्ना डे ने थर्मेंन्द्र के लिए एक बहुत ही लोकप्रिय गीत गाया जिसके बोल थे “ये दोस्ती हम नहीं तोड़ेंगे …” यह युगल गीत था जिसमें किशोर कुमार भी साथ में थे।
जैसा कि बहुत से फिल्म प्रेमी जानते ही हैं कि ‘सीता और गीता’ दिलीप कुमार की फिल्म ‘राम और श्याम’ से प्रेरित थी। जिसमें हीरो की दोहरी भूमिका थी तो इसमें हिरोइन की दोहरी भूमिका रखी गई। बाद में इसी फिल्म की एक और रीमेक बनी। फिल्म का नाम था ‘चालबाज’। इसमें श्रीदेवी दोहरी भूमिका में थीं। इन सब फिल्मों में एक समान बात यह थी कि चाहे ‘राम और श्याम’ हो या ‘सीता और गीता’ हो या ‘चालबाज’ हो,तीनों ही फिल्मों को दर्शकों का भरपूर प्यार मिला और सफल रही और अच्छी कमाई की। अब दिलचस्प किस्सा का आज का सफर यही खत्म होता है यहां तक साथ देने के लिए धन्यवाद-