संविधान की धारा 370 को समाप्त किया जायें

arjun meghwalभारतीय संविधान की धारा 370 जो जम्मू एवं कश्मीर राज्य से संबंध रखती है और जिसका संबंध शेख अब्दुला एवं पंण्डित जवाहरलाल नेहरू की दोस्ती से भी रहा है  वह अब देश के लिए बहुत महंगी पड़ रही है। डाॅ बी आर अम्बेडकर जो संविधान निर्माण की प्रारूप समिति के अध्यक्ष थे, उनके द्वारा भी धारा 370 का विरोध किया गया था, लेकिन पं. नेहरू के प्रयासों से डाॅ. बी आर अम्बेड़कर के विरोध के बावजूद अस्थायी समय के लिए विशेष दर्जे की यह व्यवस्था जम्मू एवं कश्मीर राज्य के लिए लागू कर दी गई जो आज तक जारी है, जिसका नुकसान आज तक सम्पूर्ण देश भुगत रहा है। स्थिति यह है कि कश्मीर के लिये जान देने वाले सैनिक वहां का नागरिक नहीं हो सकता। इस धारा के कारण दो विधान, दो प्रधान एवं दो निशान की स्थिति उत्पन्न हुई। जिसके कारण डाॅ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने नेहरू मंत्रीमण्डल से इस्तीफा देकर जनसंघ की स्थापना की। डाॅ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने धारा 370 के विरूद्ध आन्दोलन करते हुए जम्मू एवं कश्मीर मेें कूच किया। पंण्डित नेहरू के ईशारे पर शेख अब्दुला ने डाॅ मुखर्जी को जेल मे डाला जहां हुई उनकी शाहदत जो आज भी सन्देह के घेरे मंे है। इस धारा के कारण आज देश के अन्य नागरिक जम्मू एवं कश्मीर मे जमीन व सम्पत्ति नहीं खरीद सकते है परन्तु जम्मू एवं कश्मीर के नागरिक देश के अन्य प्रदेशो मे जमीन व सम्पत्ति खरीद सकते है। इस धारा के कारण जम्मू एवं कश्मीर को भारत सरकार से अलग बजट मिलता है, जिसका उपयोग विकास में नही होता है। पर्याप्त भ्रष्टाचार हो रहा है, देश का बहुमूल्य बजट का दुरूपयोग हो रहा है। जो देश के विकास के प्रतिकूल है। इसी धारा मे प्राप्त विशेष दर्जे के कारण  श्रीनगर सहित सम्पूर्ण कश्मीर आतंकवादियो की शरण स्थली बना हुआ है।
आज भी पंडित नेहरू व शेख अब्दुला की दोस्ती जम्मू कश्मीर समस्या का समाधान करने में बाधक है।आज आये दिन आतंकी हमले, पाक जनित आंतकवाद के कारण देश की सुरक्षा को लगातार खतरा बना हुआ है। अब ये धारा राजनैतिक दलो के लिए तुष्टिकरण एवं वोट की मशीन बन गयी है। आज भी देश का आमजन जम्मू एवं कश्मीर की इस कहानी से अनभिज्ञ है तो सत्ता के आगोश मे कांग्रेस एवं गैर भाजपा ने धर्मनिरपेक्षता के नाम पर देश की एकता, अखण्डता को धता बता रहे है। आज वक्त की जरूरत है कि युवाओ में जम्मू एवं कश्मीर की समस्या पर अध्ययन एवं चिन्तन की आवश्यकता है। सम्पूर्ण देश मे इस पर चर्चा व चिन्तन हो एवं धारा 370 के विरूद्ध पूरे देश मे वातावरण बने तथा संविधान से धारा 370 को समाप्त किया जायें। यह राष्ट्रीय अस्मिता की मांग है।
-अर्जुन राम मेघवाल, सांसद बीकानेर (लोकसभा)
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