महाराजा गंगा सिंह विश्वविद्यालय की ओर से चलाये जा रहे ‘विश्वविद्यालय महाविद्यालय की ओर’ कार्यक्रम के क्रम में बीकानेर जिले के महाविद्यालयों के प्राचार्यों की बैठक का आयोजन आज ब.ज.सि. रामुपरिया जैन विधि महाविद्यालय में किया गया।
कुलपति प्रो.भगीरथ सिंह ने बैठक में अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि विश्वविद्यालय और महाविद्यालय एक दूसरे के पूरक हैं। दोनो के मध्य आपसी समन्वय और संवाद के माध्यम से ही दोनो संस्थाओं का विकास किया जाना संभव हो पाएगा। प्रो.सिंह ने कहा कि इसी उद्ेश्य को ध्यान में रखते हुए ऐसे कार्यक्रमों की श्रृंखला प्रारम्भ की गई हैं। उन्होने कहा कि विश्वविद्यालय में संचालित विभिन्न शैक्षणिक एवं गैर शैक्षणिक गतिविधियों की सफलता में महाविद्यालयों का अहम योगदान होता हैं। समय-2 पर समीक्षा मूल्यांकन एवं संवाद के माध्यम से व्यवस्था में आमूल चूल परिवर्तन किया जा सकता हैं। समय-2 पर अपनाये जाने वाले नवाचारों में सबका साथ सबका विकास लेकर व्यवस्था को आगे बढाया जा सकता हैं। उन्होने कहा कि विश्वविद्यालय से सम्बद्वता प्राप्त महाविद्यालयों से सहयोग प्राप्त कर शैक्षणिक गुणवता को बढाते हुए विश्वविद्यालय को राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय पहचान बनाने का प्रयास किया जाएगा। शैक्षणिक नवाचार, शोध, अधारभूंत ढांचा एवं स्वच्छ शैक्षणिक वातावरण के माध्यम से विश्वविद्यालय को राज्य के प्रथम विश्वविद्यालय के रूप में अग्रेषित करने का प्रयास किया जाएगा। कुलपति प्रो.भगीरथ सिंह ने बताया कि विश्वविद्यालय में पिछले कुछ समय में अनेक नवाचार अपनायें गये हैं। इन्हे सफल बनाने में सम्बद्व सभी महाविद्यालयों का सहयोग अपेक्षित हैं। प्रो. भगीरथ सिंह ने कहा कि विश्वविद्यालय द्वारा शीघ्र ही महाविद्यालय के प्राचार्यों एवं व्याख्याताओं की शिक्षक के रूप में पहचान बनाने एवं समाज में एक अहम दर्जा बनाने के लिए प्रयास किए जाएंगे जिसके अन्तर्गत विश्वविद्यालय द्वारा बीकानेर संभाग के सभी निजी महाविद्यालयों के लिए योग्यताधारी इच्छुक व्याख्याताओं का पंजीयन विश्वविद्यालय स्तर पर किया जाएगा। उसके पश्चात् प्रत्येक महाविद्यालय को उपलब्ध व्याख्याताओं की स्थिति के अनुसार योग्यताधारी शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी। उन्हांेंने प्राचार्यों से आह्वान किया कि वे बीकानेर जिले में शैक्षणिक गण्ुावत्ता बढाने के लिए प्रयास करें साथ ही अपने अपने महाविद्यालयों में शिक्षकों के अभिमुखीकरण के लिए प्रयास करें। महाविद्यालय अपनी संस्था में कार्यरत विभिन्न विषयों के विशेषज्ञों की सेवा लेते हुए महाविद्यालय स्तर पर पाठ्यक्रम का निर्माण कर विश्वविद्यालय अध्ययन मण्डल को प्रेषित करें जिससे की महाविद्यालय स्तर पर प्राप्त सुझावों को शामिल कर विश्वविद्यालय स्तर पर नये पाठ्यक्रम का निर्माण संभव हो सके।
इससे पहले कुलसचिव श्री मनोज कुमार शर्मा ने भी विश्वविद्यालय महाविद्यालयों की ओर आरम्भ किए गए इस कार्यक्रम के उद्ेश्यों पर विस्तार से प्रकाश डाला। श्री शर्मा ने कहा कि आज महाविद्यालयों में विद्यार्थियों की संख्या तो बढ रही हैं लेकिन जब कक्षाओं मे जाते हेै तो वहां गिनती के ही विद्यार्थी मिलते हैं। विद्यार्थी- प्राध्यापक या व्याख्याता की कडी को मजबूत करना होगा। उन्हांेने प्राचार्यो से कहा कि वे विश्वविद्यालय द्वारा दिये जाने वाले निर्देशो-आदेशो की पालना उसमें निर्धारित अवधि में ही पूरा करें।
अभियान के अन्तर्गत आयोजित तकनीकी सत्र में महाविद्यालयों द्वारा उठाये गये बिन्दुओं के सन्दर्भ में विश्वविद्यालय परीक्षा नियंत्रक डॉ.जे.एस.खीचड़, उप कुलसचिव शैक्षणिक डॉ.बिटठ्ल बिसा ने अपने अपने अनुभागो से संबधित बिन्दुओं के संबध में विस्तार से प्रकाश डाला साथ ही विश्वविद्यालय की भावी योजनाओं के बारे में महाविद्यालय स्तर पर की जाने वाली कार्यवाही से भी प्राचार्यो को अवगत करवाया।प्रबन्ध समिति सचिव श्री सुनील रामपुरिया द्वारा अपने स्वागतीय उद्बोधन में माननीय कुलपति प्रो. भगीरथ सिंह का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होंने इस इस अभिनव अभियान विश्वविद्यालय महाविद्यालय की ओर के आयोजन कि महत्वूपर्ण जिम्मेदारी महाविद्यालय परिवार को प्रदान की ।
डॉ. अनन्त जोशी, प्राचार्य रामपुरिया विधि महाविद्यालय ने बताया कि यह कार्यक्रम विश्वविद्यालय के साथ-साथ महाविद्यालयों के लिए भी बडी उपयोगी और सार्थक साबित होगा । उन्होनंे इस सम्मेलन में शैक्षणिक गुणवता बढाने और महाविद्यालयों का संचालन नियम व परिनियमों के अन्तर्गत किया जा रहे प्रयासों के लिए विश्वविद्यालय का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम के समापन अवसर पर डॉ. दिग्विजयसिंह, सहायक निदेशक, आयुक्तालय कॉलेज शिक्षा राजस्थान सरकार ने निजी महाविद्यालयों से आह्वान किया कि वे सरकार का सहयोग कर शिक्षा में गुणवत्ता बढाने का प्रयास करें।
इस अवसर पर विभिन्न महाविद्यालय के प्राचार्यों ने विश्वविद्यालय के कुलपति से प्रत्यक्ष संवाद स्थापित कर अपने सुझाव एवं समस्याओं के निस्तारण के संबंध में विस्तृत चर्चा की।