आचार्य रामदयाल महाराज का रजत पाटोत्सव मनाया

*राम नाम ही राष्ट्र का मंगल है- रामदयालजी*
शाहपुरा(भीलवाड़ा)-
रामस्नेही संप्रदाय के आद्याचार्य स्वामी रामचरण महाप्रभु त्रिशताब्दी प्राकट्य महोत्सव 2020 के अंर्तगत संप्रदाय के पीठाधीश्वर जगतगुरू आचार्यश्री स्वामी रामदयाल महाराज का 25 वां पाटोत्सव का विशाल मुख्य समारोह आज रामनिवास धाम में समारोह पूर्वक मनाया गया। पूर्व विधानसभा अध्यक्ष कैलाश मेघवाल सहित हजारों रामस्नेही अनुरागियों ने इस मौके पर आचार्यश्री रामदयाल महाराज से आर्शिवाद प्राप्त कर उनके गुणानुवाद किये।
इस मौके पर बारादरी में प्रवचन करते हुए आचार्यश्री स्वामी रामदयाल महाराज ने कहा कि राम नाम ही राष्ट्र का मंगल है। उन्होंने कहा कि भारत राष्ट्र भय, भ्रष्टाचार, अत्याचार एवं अन्याय मुक्ति होना चाहिए। आए दिन शक्ति जगत में दरिंदगी हो रही है उस पर पूर्ण विराम लगना चाहिए। क्योंकि संपूर्ण विश्व के मानस पटल पर हमारा भारत राष्ट्र जगतगुरू के पद से प्रतिष्ठित है। सनातन काल की व्यवस्थाओं का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि वेदों, उपनिषदों एवं पुराणों का राष्ट्र्र केवल एक मात्र राष्ट्र भारत राष्ट्र है। इसलिए भारत राष्ट्र की गरिमा का पूर्ण ध्यान रखना चाहिए। हमारे तो राष्ट्र की पहचान धर्म, संस्कृति, व चरित्र ही है। उसके साथ यदि खिलवाड़ हुआ तो राष्ट्र का स्वरूप विकृत हो जाएगा।
आचार्य रामदयाल महाराज ने कहा कि मैं इस योग्य नहीं हूं कि आप मेरा गुणगान करें। आप सभी संतों व संप्रदाय के भक्तों का साथ नहीं होता तो कुछ भी नहीं कर सकता। जो कुछ किया वह रामनाम से ही संभव है। उन्होंने कहा कि आज तन के रोगी कम, मन के रोगी ज्यादा हैं। इसलिए परिवार, समाज व राष्ट्र की मानसिकता बहुत बड़ी समस्या है। इसका समाधान हो इसके लिए प्रयद्यशील रहते हैं। आज यदि परिवार त्रस्त है। तो मानसिकता की विकृति के कारण। मनुष्य प्रकृति में रहना सीखे। संस्कृति की अर्चना सीखे और विकृति को उखाड़ फेंकें। विकृति व्यक्ति के मन की हो, परिवार की हो, समाज को या राष्ट्र की हो। व्यक्ति न जाने कब फंस जाता है। पता नहीं चल पाता।
उन्होंने कहा कि संत साधना व माला के प्रताप से ही वो पीठाधीश्वर के पद पर 25 वर्ष पूरे कर पाये है। संप्रदाय के संतो ंके गादी के प्रति विश्वास व्यक्त करने के फलस्वरूप जो भी उनसे बना है वो संप्रदाय का आध्यात्मिक व भौतिक विकास संभव हो सका है। उन्होंने सोड़ा में होने वाले आद्याचार्य स्वामी रामचरण महाप्रभु त्रिशताब्दी प्राकट्य महोत्सव की विस्तार से जानकारी देकर सभी से उसमें शामिल होने का आव्हान किया।
इस मौके पर रामस्नेही संप्रदाय के संत रामस्वरूप शास्त्री बाड़मेर, संत जगवल्लभराम, संत रामनारायण देवास, संत रामप्रसाद बड़ौदा, संत निर्मलराम लूलांस, संत अमृतराम पुष्कर, संत रमताराम व संत दिग्विजयराम चित्तौड़गढ, संत नरपतराम, संत रामशरण महाराज ने भी संबोधित किया। संत रामप्रसाद बड़ौदा ने अपने चिरपरिचित अंदाज में कहा कि संत महापुरूषों का जीवन परोपकार के लिए ही होता हैं उन्होंने आचार्यश्री के दीघार्यु होने की कामना करते हुए कहा कि उनके सानिध्य में ही आज संप्रदाय का चहुंमुखी विकास हो रहा है।
संत दिग्विजयराम चित्तौड़गढ व संत रामशरण महाराज ने गुरू महिमा पर अपना सुंदर भजन प्रस्तुत किया। ख्याति प्राप्त कवि डा. कैलाश मंडेला ने पाटोत्सव पर आचार्यश्री का अभिनंदन करते हुए गुरू महिमा पर बोले तो मीठा लागे, गादी पर बैठ्या गुरूवर सामने गीत सुनाकर माहौल को रसमय बना दिया। कवि दिनेश बंटी ने भी अपनी कविता का वाचन किया।इसके पूर्व शाहपुरा चार्तुमास सेवा समिति की ओर से सुर्यप्रकाश बिड़ला की अगुवाई में बारादरी में आचार्यश्री व संतो ंके लिए चढ़ावा चढ़ाया गया।
रविवार को प्रातः 8.30 बजे से पाटोत्सव महोत्सव के तहत वाणीजी का पाठ, महिला मंडल द्वारा भजनों की प्रस्तुति हुई। उसके बाद प्रवचन प्रांरभ हुए।

मूलचन्द पेसवानी

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