अपने मन की गंदगी को भी साफ करना होगा – डाॅ. मोहता

बीकानेर 17 जुलाई, 2019 ‘‘ स्वच्छता पखवाड़े के तहत आयोजित होने विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता के लिए कार्य किया जा रहा है। इस पखवाड़े में हमें आमजन को बाहर की गंदगी साफ करने के साथ गंदगी फैलाने वाले हमारे मन के विचारों को भी साफ करना होगा। ’’ ये उद्बोधन बीकानेर प्रौढ़ शिक्षण समिति, बीकानेर के अध्यक्ष डाॅ. श्रीलाल मोहता ने कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय, भारत सरकार के सौजन्य से संचालित जन शिक्षण संस्थान, बीकानेर द्वारा 16 से 31 जुलाई, 2019 तक आयोजित किए जाने वाले ‘स्वच्छता पखवाड़े’ के तहत आयोजित स्वच्छता अभियान-जागरूकता कार्यक्रम के अध्यक्षीय उद्बोधन के तहत व्यक्त किए।
डाॅ.मोहता ने कहा कि ‘‘आओ मर्दो, खाओ जर्दो, थूक-थूक घर ने भर दो..’’ की उक्ति के माध्यम से जर्दा, पान व गुटखा खाने वालों द्वारा सार्वजनिक स्थलों आदि पर पीकें थूक कर गंदगी करने वालों को भी स्वच्छता के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए।
इस अवसर पर जन शिक्षण संस्थान की अध्यक्ष डाॅ. विभा बंसल ने कहा कि जिस प्रकार से हम स्वच्छता के प्रति उदासीन और गैर-उत्तरदायी व्यहार बनाते जा रहे है, उसको देखकर ऐसा लगता है कि आने वाले समय में वंदेमातरम्… और चल मन गंगा-यमूना के तीर….जैसे प्राकृतिक सौन्दर्य से जुड़े गीत-कविताएं शायद ही देखने को मिले। देश के विकास के लिए विभिन्न अभियान चलाए गए हैं और उनकी सफलता का मुख्य आधार जन-सहभागिता रही है। इसलिए इस स्वच्छता पखवाड़े के माध्यम से आम जन में स्वच्छता के लिए पूरे मन से सक्रिय होकर सहभागी बनने के लिए तैयार करना चाहिए।
जन शिक्षण संस्थान के उपाध्यक्ष अविनाश भार्गव ने कहा कि रोटी, कपड़ा और मकान की तरह ही स्वच्छता भी हमारी मूल आवश्यकता में शामिल होनी चाहिए।
जन शिक्षण संस्थान के निदेशक रामलाल सोनी ने कहा कि स्वच्छता पखवाड़े के माध्यम से संस्थान द्वारा आमजन को स्वच्छता हेतु अपने उत्तरदायित्वो के प्रति सजग करना है।
इसी क्रम में जन शिक्षण संस्थान के कार्यक्रम अधिकारी ओमप्रकाश सुथार द्वारा उपस्थित संभागियों एवं स्टाफ के सभी सदस्यों ‘स्वच्छता शपथ’ दिलाकर स्वच्छता के लिए मन से तैयार होने का संदेश दिया।
स्वच्छता पखवाड़े के तहत आयोजित आज के कार्यक्रम में संस्थान परिवार के लक्ष्मीनारायण चूरा, तलत रियाज, उमाशंकर आचार्य, राजकुमार शर्मा, श्रीमोहन आचार्य, विष्णुदत्त मारू सहित संदर्भ व्यक्तियों में से सुरजमुखी खड़गावत, वहिदा खातून, खुश्बू सोलंकी, महिमा गहलोत, सुधा कंवर, मीनाक्षी चैधरी, एवं प्रशिक्षुओं की सक्रिय सहभागिता रही।

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