प्रेमचंद की कलम आधुनिक इतिहास में स्त्री विमर्श की श्रेष्ठ वाहक बनी : डॉ. मेघना शर्मा

प्रेमचंद जयंती पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय साहित्य गोष्ठी में डॉ मेघना ने किया राजस्थान का प्रतिनिधित्व
शुक्रवार को मुंशी प्रेमचंद की जयंती पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय साहित्य वेबिनार में बीकानेर की कवयित्री कथाकार डॉ. मेघना शर्मा ने राजस्थान का प्रतिनिधित्व किया। वेबिनार का विषय प्रेमचंद साहित्य की सशक्त नारी और वर्तमान परिदृश्य रहा। महाराजा गंगा सिंह विश्वविद्यालय बीकानेर के इतिहास विभाग की सहायक प्रोफेसर डॉ मेघना शर्मा ने अपने उद्बोधन में प्रेमचंद युग को आधुनिक भारतीय इतिहास के सक्रांति काल की संज्ञा देते हुए उनकी कलम को नारी मुक्ति व नारी जागरण का संप्रेषक बताया। धर्म सुधार आंदोलनों के युग में उपन्यास सम्राट प्रेमचंद की कलम उत्तर उन्नीसवीं सदी व बीसवीं सदी के पूर्वार्द्ध की सड़ी गली मान्यताओं, अंधविश्वासों, खोखली परंपराओं और सामाजिक जड़ता के खिलाफ चली तो वहीं दूसरी तरफ नारी की प्रगति व आर्थिक स्वतंत्रता के पक्ष में पुरजो़र प्रतिनिधित्व करती हुई प्रतीत हुई। उनके उपन्यासों की नारी चरित्र भारतीय संस्कृति की पताका फहराती, सेवा, उदारता, पवित्रता, भक्ति, सहिष्णुता, त्यागमयी भावना, उच्चतम आदर्शों की वाहक थी। उनकी नारी प्रगतिशील विचारों वाली शिक्षित नारी थी। डॉ मेघना ने प्रेमचंद के उपन्यास सेवासदन, निर्मला, प्रतिज्ञा, गबन, गोदान आदि के महिला चरित्रों की मन: स्थिति व अंतर्निहित संवादों के माध्यम से अपनी बात की पुष्टि की। प्रख्यात साहित्यकार ममता कालिया की अध्यक्षता में आयोजित वेबिनार में डॉ मेघना के अलावा लंदन से ज्योतिर्मय ठाकुर, मॉरीशस से कल्पना लालजी, डॉ शिक्षा गुजाधुर, पटना, बिहार से डॉ नीरज कृष्ण और जमशेदपुर से डॉ मुदिता चंद्रा व डॉ. जूही समर्पिता वक्ता के रूप में शामिल हुए।
संयोजनकर्ता जमशेदपुर, झारखंड से प्रकाशित होने वाली गृहस्वामिनी राष्ट्रीय पत्रिका की प्रधान संपादक अर्पणा संत सिंह रहीं जिन्होंने सभी अतिथियों और वक्ताओं का आभार व्यक्त किया। संचालन डॉ सुधा मिश्रा ने किया।

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