उपार्जित अवकाश के बदले वेतन का भुगतान नहीं करने पर उच्च न्यायालय द्वारा जवाब तलब

( अनुदानित संस्था से राज्य सरकार में समायोजित कर्मचारी का मामला)

अनुदानित संस्था से राज्य सरकार में समायोजित कर्मचारी श्री प्रवीण जैन के मामले में राज्य सरकार द्वारा उपार्जित अवकाश के बदले वेतन का भुगतान नहीं करने पर राजस्थान उच्च न्यायालय की एकल पीठ के न्यायाधीश श्री संजीव प्रकाश शर्मा ने राज्य सरकार व शिक्षा निदेशक से जवाब तलब किया है उल्लेखनीय है कि प्रार्थी अनुदानित संस्था हैप्पी पब्लिक स्कूल, अलवर में कनिष्ठ लिपिक के पद पर नियुक्त हुआ तथा जुलाई 2011 में राज्य सरकार में समायोजित हुआ प्रार्थी राज्य सरकार से 31 अगस्त 2020 को सेवानिवृत्त हो गया तथा राज्य सरकार से निवेदन किया कि उसे उपार्जित अवकाश के बदले वेतन का भुगतान किया जाए प्रार्थी ने राज्य सरकार में समायोजित होने के पश्चात 184 उपार्जित अवकाश अर्जित हुए परंतु शिक्षा निदेशक द्वारा आदेश दिनांक 23 जून 2020 के कारण उपार्जित अवकाश के बदले वेतन देने से मना कर दिया उल्लेखनीय है कि शिक्षा निदेशक के द्वारा उक्त आदेश जारी कर समस्त जिला शिक्षा अधिकारियों को आदेशित किया कि किसी भी कर्मचारी को 300 दिन के उपार्जित अवकाश से अधिक का अवकाश का नगरीकरण नहीं होगा यदि किसी कर्मचारी ने अनुदानित संस्था में कार्यरत रहते हुए 300 दिवस का उपार्जित अवकाश प्राप्त कर लिया तो उसे यह लाभ प्राप्त नहीं होगा यदि किसी कर्मचारी ने अनुदानित संस्था मैं 200 दिन का उपार्जित अवकाश प्राप्त कर लिया तो उसे मात्र 100 दिन का उपार्जित अवकाश के बदले वेतन ही प्राप्त होगा यदि उसने राज्य सरकार में रहते हुए 300 दिन से अधिक भी उपार्जित अवकाश अर्जित कर लिया हो उक्त आदेश से पीड़ित होकर के प्रार्थी ने अपने अधिवक्ता डीपी शर्मा के माध्यम से रिट याचिका प्रस्तुत कर निवेदन किया कि राजस्थान ग्रामीण स्वैच्छिक शिक्षा नियम 2010 के तहत ग्रेच्युटी व उपार्जित अवकाश के बदले वेतन के संबंध में पूर्व सेवाओं का राज्य सरकार की सेवाओं के संबंध में जुड़ा नहीं जाएगा उक्त दोनों मामले में पूर्व की सेवाओं के संबंध में कर्मचारी को संबंधित नियोक्ता से ग्रेच्युटी उपार्जित अवकाश के बदले वेतन प्राप्त करना होगा प्रार्थी ने 300 दिन की उपार्जित अवकाश बाद शिक्षा समिति से प्राप्त कर लिया परंतु राज्य सरकार के द्वारा राज्य सरकार में रहते हुए 184 दिन के अवकाश का भुगतान नहीं किया गया जो कि मनमाना है क्योंकि जब नियमों में यह व्यवस्था है कि उपार्जित अवकाश को आगे की सेवा में नहीं जोड़ा जाएगा तो कर्मचारी को नुकसान करने की गरज से नियम विरुद्ध ऐसा आदेश पूर्णता मनमाना है यदि यह मान भी लिया जाए कि कर्मचारी को 300 दिन से अधिक उपार्जित अवकाश प्राप्त नहीं हो और पूर्व के अवकाश को जोड़ा जाए ऐसी स्थिति में उपार्जित अवकाश का भुगतान राज्य सरकार से सेवानिवृत्ति की दिनांक को जो वेतन प्राप्त होता है उसके आधार पर उपार्जित अवकाश की गणना की जानी चाहिए और अनुपातिक रूप से राज्य सरकार व संस्था को राशि वहन करनी चाहिए राज्य सरकार एक तरफ तो अंतिम वेतन के आधार पर संपूर्ण सेवाकाल का उपार्जित अवकाश का भुगतान नहीं कर रही और दूसरी तरफ नियम विरुद्ध आदेश जारी कर पूर्व की सेवाओं को राज्य की सेवाओं में जोड़ा गया जो कि मनमाना है यदि ऐसा ही है तो तो राज्य सरकार को ग्रेच्युटी के संबंध में भी अंतिम वेतन के आधार पर संपूर्ण सेवाकाल की ग्रेच्युटी की गणना कर संस्था में राज्य सरकार को आनुपातिक रूप से ग्रेच्युटी का भुगतान करना चाहिए मामले की सुनवाई के पश्चात राज्य सरकार व शिक्षा निदेशक माध्यमिक शिक्षा से 8 सप्ताह में जवाब तलब किया है

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