रेलवे को संवेदनशील बनाना होगा

lalit-garg
भारतीय जन-जीवन की आर्थिकी से लेकर सांस्कृतिक परिदृश्य तक भारतीय रेल एक सतत महत्वपूर्ण आधार और सशक्त माध्यम है, इसीलिए उसकी अव्यवस्था और बदहाली राष्ट्रीय चिंता का बड़ा कारण मानी जाती है। तरह-तरह की उपलब्धियों के बावजूद रेल यात्रियों को सफर में हर कदम पर कठिनाइयों से जूझना पड़ता Read more

अखबार ओर TV का मोह हो रहा कम

हेमेन्द्र सोनी
किसी समय मे समाचारों के लिए केवल अखबारों ओर रेडियो पर निर्भरता हुवा करती थी, उसके बाद टेलीविजन आया जिनमे चित्रो ओर वीडियो के साथ समाचार आने लगे, वक्त के साथ साथ इसमे अब बदलाव आना शुरू हो गया है । जब से इंटरनेट क्रांति हुई है और इंटरनेट सुलभ ओर हाई स्पीड हुवा है तब से सूचना त Read more

फारुख अब्दुल्ला को क्यों चाहिए आजादी ?

डॉ. मोहनलाल गुप्ता
भारत की आजादी से 10 साल पहले जन्मे फारुख अब्दुल्ला अब 80 वर्ष के हो चुके हैं। भारत की आजादी से ज्यादा वर्षों की उनकी आयु हो चुकी है। 1980 में वे राजनीति में आए तथा पहली बार भारत की लोकसभा में सदस्य चुने गए। अपने पिता शेख अब्दुल्ला के मरने पर 1982 में वे कश्मीर प्रांत के पहली Read more

माया का राज्यसभा से इस्तीफा:लाचारी भरी ललकार

sanjay-saksena
संजय सक्सेना, लखनऊ बसपा प्रमुख मायावती की पहचान एक ऐसी नेत्री की होती है जो सियासत की नब्ज पकड़ने में माहिर मानी जाती हैं। सियासी पिच पर उनकी टाइमिंग हमेशा परफेक्ट रही है, लेकिन इधर कुछ वर्षो से उनके फैसले कसौटी पर खरे नहीं उतर रहे हैं। उनका परम्परागत दलित वोट बैंक बिखरता जा Read more

कोविंदजी! अब देश आश्वस्त होना चाहता

lalit-garg
श्री रामनाथ कोविन्द देश के चैहदवें नए राष्ट्रपति चुन लिए गए हैं। वह एक दलित के बेटे हैं जो सर्वोच्च संवैधानिक पद पर पहुंचने की दूसरी घटना है, जिससे भारत के लोकतंत्र नयी ताकत मिलेगी, दुनिया के साथ-साथ भारत भी तेजी से बदल रहा है। सर्वव्यापी उथल-पुथल में नयी राजनीतिक दृष्टि, नय Read more

मुंशी जी वापस आ गए हैं

sohanpal singh
वो अपने मुंशी जी अरे ! वहीँ मुंशी इतवारी लाल, विदेश गए थे अपने बेटे के पास आ गए हैं ? वो मार्च 2016में विदेश गए थे वापस अब आये है यानि 15 ई 2017 को , लेकिन जब से आये है बुखार में तप रहे है अंट शंट बोले जा रहे है जैसे उन पर पागल पन के दौरे पड़ रहे हो, कभी कहते है। ” मै Read more

भ्रष्टाचार रूपी राजरोग के लिये सभी एकजुट हो

lalit-garg
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भ्रष्टाचार पर नकेल कसने को लेकर शुरू से गंभीर ही नहीं है बल्कि एक निष्पक्ष एवं निर्णायक लड़ाई के लिये संघर्षरत हंै। इसी मकसद से उन्होंने नोटबंदी का फैसला किया। कालेधन को सामने लाने के लिए दूसरे उपाय आजमाए जा रहे हैं। लालू प्रसाद यादव हो या पूर्व वित् Read more

भारतीयों पर आलसी होने का दाग लगना

lalit-garg
दुनिया के सबसे आलसी देशों में भारत का अव्वल पंक्ति में आना न केवल शर्मनाक बल्कि सोचनीय स्थिति को दर्शाता है। जिस देश का प्रधानमंत्री 18 से 20 घंटे प्रतिदिन काम करता हो, वहां के आम नागरिकों को आलसी होने का तमगा मिलना, विडम्बनापूर्ण है। आलसी होना न केवल सशक्त भारत एवं नये भारत Read more

यक़ीन

रास बिहारी गौड़
हम यकीन नहीं करते थे नाना की बातों पर वे बीस किलोमीटर नदी पार कर पढने जाते थे रास्ते पढ़ते हुए किताबों के साथ नदी का गीलापन भी पढ़ लेते थे हम यकीन नहीं करते थे पिता के अभावों पर उनके पास एक जोड़ी कपडे थे जिन्हें रात को धोकर सुबह पहन लेते थे जैसे सूरज उगता है रोज नए उजाले के साथ Read more

तनाव, असन्तुलन एवं अशांति का जीवन क्यों ?

lalit-garg
दुनिया में एक नकारात्मकता का परिदृश्य बिखरा पड़ा है। हम निरन्तर आदर्शवाद और अच्छाई का झूठ रचते हुए सच्चे आदर्शवाद के प्रकट होने की असंभव कामना कर रहे हैं, इसी से जीवन की समस्याएं सघन होती जा रही है, नकारात्मकता व्यूह मजबूत होता जा रहा है, इनसे बाहर निकलना असंभव-सा होता जा रहा Read more

आठवां आश्चर्य !

sohanpal singh
कश्मीर के अनंतनाग में अमरनाथ यात्रियों की बस पर 10 जुलाई को जो आतंकवादी हमला हुआ वह भारत के लोगों के लिए दुनिया का आठवां आश्चर्य साबित हुआ हैं ? क्योंकिं यह घटना राजनितिक चक्रव्यूह का खेल बन कर रह गई है ? क्योंकि इस हमले का सीधा सम्बन्ध गुजरात से है और गुजरात में इस वर्ष के Read more