महाराष्ट्र सरकार की सराहनीय पहल : उन्नत बचपन की पहली शर्त-स्वस्थ भोजन, स्वस्थ भविष्य

विकसित भारत का स्वप्न केवल आधुनिक इमारतों, तेज अर्थव्यवस्था, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल तकनीक और विश्वस्तरीय आधारभूत संरचनाओं से पूरा नहीं होगा। किसी भी राष्ट्र की वास्तविक शक्ति उसके बच्चे होते हैं। यदि बचपन स्वस्थ, संस्कारित, ऊर्जावान और मानसिक रूप से सुदृढ़ है, तो राष्ट्र का भविष्य स्वतः सुरक्षित हो जाता है। यदि बचपन ही अस्वस्थ, … Read more

महावीर दर्शन में संवाद की संस्कृति, समाधान की दिशाएं

आज मानव सभ्यता अभूतपूर्व वैज्ञानिक प्रगति के शिखर पर खड़ी है, लेकिन विडंबना यह है कि जितनी तेजी से तकनीक ने दुनिया को जोड़ा है, उतनी ही तेजी से मनुष्य एक-दूसरे से दूर भी होता गया है। संचार के साधन बढ़े हैं, पर संवाद घटा है। सूचना का विस्फोट हुआ है, लेकिन समझ का विस्तार … Read more

पीओके की पुकार और दुनिया की जिम्मेदारी

पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में इन दिनों जो परिस्थितियां निर्मित हो रही हैं, वे केवल एक चुनावी प्रक्रिया की कहानी नहीं हैं, बल्कि लोकतंत्र, मानवाधिकार और जनविश्वास के गहरे संकट की दास्तान हैं। किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था की वास्तविक शक्ति निष्पक्ष चुनाव, नागरिक स्वतंत्रता और शासन की जवाबदेही में निहित होती है, लेकिन जब चुनाव … Read more

बहनः संस्कृति, संवेदना और सशक्त भारत की आधारशिला

राष्ट्रीय बहन दिवस, 2 अगस्त 2026 और ‘बेटी तेरापंथ की सम्मेलन’ पर विशेषः रिश्तों की दुनिया में यदि कोई संबंध निस्वार्थ प्रेम, आत्मीयता, विश्वास, त्याग और आजीवन साथ का सबसे सुंदर उदाहरण है, तो वह बहन का रिश्ता है। बहन केवल परिवार की सदस्य नहीं होती, वह घर की संवेदना, संस्कारों की संरक्षिका, परिवार की … Read more

महावीरायतन फाउंडेशन की प्रेरणादायी राष्ट्रीय पहल “संवाद से समाधान” का भव्य आयोजन

देहरादून बनेगा संवाद, समरसता और विश्व बंधुत्व का केंद्र देहरादून 1 अगस्त, 2026 समाज में बढ़ती वैचारिक चुनौतियों, सामाजिक समरसता, राष्ट्रीय एकात्मता तथा वैश्विक सद्भाव को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से महावीरायतन फाउंडेशन की प्रेरणादायी राष्ट्रीय पहल “संवाद से समाधान” की अगली कड़ी का भव्य आयोजन 04 अगस्त 2026 को लोक भवन, देहरादून (उत्तराखण्ड) में … Read more

विद्युतजिह्वा और शूर्पणखा: एक अनकही गाथा

रामायण काल का इतिहास केवल अयोध्या और लंका के बीच का नहीं था, बल्कि उसमें कई अन्य संस्कृतियाँ और वंश भी शामिल थे। लंकापति रावण जहाँ अपनी शक्ति से पूरे आर्यावर्त पर प्रभाव जमा रहा था, वहीं सुदूर दक्षिण के द्वीपों पर कालकेय दानव वंश का शासन था। इसी वंश का एक अत्यंत प्रभावशाली और मायावी राजकुमार था—विद्युतजिह्वा। विद्युतजिह्वा साधारण योद्धा नहीं था। जब वह युद्ध के मैदान में पूरी शक्ति से गर्जना करता था, तो उसके मुख से बिजली जैसी नीली आभा निकलती थी, जिसके कारण उसका नाम ‘विद्युतजिह्वा’ पड़ा। कालकेय वंश और रावण के राक्षस वंश में पीढ़ियों से संप्रभुता को लेकर मतभेद थे, क्योंकि कालकेय दानव समुद्र के व्यापारिक मार्गों पर नियंत्रण रखते थे, जो लंका की अर्थव्यवस्था के लिए चुनौती था। दूसरी ओर, लंका की राजकुमारी शूर्पणखा (जिसका मूल नाम मीनाक्षी या चंद्रनखा भी मिलता है) लंका के कठोर राजसी नियमों और युद्ध के वातावरण से दूर एकांत प्रिय थी। उसके पास रूप बदलने की कला (कामरूपिणी विद्या) थी, जिसका उपयोग वह महल के बंधनों से मुक्त होकर प्रकृति के करीब जाने के लिए करती थी। एक बार शूर्पणखा लंका की सीमाओं को लांघती हुई सुदूर दक्षिण के एक एकांत और सुंदर द्वीप पर पहुँची। वहाँ उसने अपना राक्षसी रूप त्यागकर एक साधारण सुंदरी का रूप धारण किया और झरने के पास बैठकर वीणा बजाने लगी। उसी समय विद्युतजिह्वा भी अपनी टोली के साथ वहाँ से गुजर रहा था। वीणा की सम्मोहक ध्वनि सुनकर वह वहाँ पहुँचा। जब दोनों का सामना हुआ, तो राजनीतिक शत्रुता के बावजूद वे एक-दूसरे के व्यक्तित्व से प्रभावित हुए। शूर्पणखा को विद्युतजिह्वा का स्वतंत्र स्वभाव पसंद आया और विद्युतजिह्वा उसकी कला पर मुग्ध हो गया। दोनों ने अपनी वास्तविक पहचान छिपाकर कई मुलाक़ातें कीं और अंततः दोनों के बीच प्रेम प्रगाढ़ हो गया। वे जानते थे कि राक्षस और दानव कुलों के बीच पुराना वैर होने के कारण समाज इस रिश्ते को कभी स्वीकार नहीं करेगा। इसलिए, उन्होंने प्रकृति को साक्षी मानकर गांधर्व विवाह (गुप्त विवाह) कर लिया। इस विवाह से कालान्तर में उन्हें एक पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई, जिसका नाम शंभू कुमार (कुछ ग्रंथों में जम्बुमाली या शंबूक) रखा गया। शूर्पणखा ने अपने पुत्र की सुरक्षा के लिए उसे दंडकारण्य के पंचवटी वनों में एक गुप्त स्थान पर रखा, जहाँ वह सूर्य देव की उपासना करने लगा। सत्य अधिक समय तक गुप्त नहीं रह सका। रावण के गुप्तचरों ‘शुक’ और ‘सारण’ ने लंका के राजदरबार में इस विवाह की सूचना दे दी। यह सुनकर रावण अत्यंत क्रोधित हुआ, क्योंकि उसकी बहन ने लंका के शत्रु कुल के राजकुमार से संबंध बनाया था। रावण तुरंत विद्युतजिह्वा पर आक्रमण करने निकला, परंतु शूर्पणखा ने रावण के सामने आकर अपने सुहाग की रक्षा के लिए बहुत विलाप किया। अपनी बहन के प्रति स्नेह और लोक-लाज के कारण रावण ने अपना क्रोध शांत किया और विद्युतजिह्वा के सामने एक राजनैतिक शर्त रखी: उसे अपना स्वतंत्र राज्य छोड़कर लंका की अधीनता स्वीकार करनी होगी और रावण की सेना में सेवा देनी होगी। विद्युतजिह्वा ने अपनी पत्नी और पुत्र के भविष्य की रक्षा के लिए यह अपमानजनक समझौता स्वीकार कर लिया, परंतु उसके मन में अपनी स्वतंत्रता खोने का मलाल हमेशा रहा। कुछ समय पश्चात, रावण ने अपने साम्राज्य विस्तार के लिए ‘विश्व विजय अभियान’ प्रारंभ किया। इस अभियान में विद्युतजिह्वा को भी रावण की सेना की एक टुकड़ी का नेतृत्व करना पड़ा। जब रावण की सेना अन्य लोकों पर विजय प्राप्त कर अंतरिक्ष के मार्ग से वापस लंका लौट रही थी, तब कालकेय दानवों की एक अन्य टुकड़ी ने रावण की सेना पर अचानक धावा बोल दिया। युद्ध की उस अराजकता में, विद्युतजिह्वा के भीतर दबा हुआ रोष बाहर आ गया। उसने सोचा कि रावण के बढ़ते अहंकार और अपनी दासता को समाप्त करने का यही एकमात्र अवसर है। उसने युद्ध के मैदान में पीछे से रावण पर वार करने का प्रयास किया। परंतु रावण युद्ध कला में अत्यंत निपुण था। उसने तुरंत स्थिति को भांप लिया और विद्युतजिह्वा का वार विफल कर दिया। अपनी ही सेना के सेनापति द्वारा इस विश्वासघात को देखकर रावण का क्रोध चरम पर पहुँच गया। दोनों के बीच भयंकर युद्ध हुआ, जिसमें रावण ने अपने दिव्य चंद्रहास खड्ग से विद्युतजिह्वा का वध कर दिया। जब रावण ने विद्युतजिह्वा के शव को शूर्पणखा के सामने प्रस्तुत किया, तो वह गहरे शोक में डूब गई। एक पत्नी के रूप में उसके भीतर रावण के प्रति तीव्र प्रतिशोध की भावना जागृत हुई। उसने रोते हुए रावण से कहा कि जिस अहंकार में आकर उसने अपनी बहन का घर उजाड़ा है, वही अहंकार एक दिन लंका के विनाश का कारण बनेगा और उसका यह साम्राज्य एक स्त्री के निमित्त ही नष्ट हो जाएगा। इसके बाद शूर्पणखा लंका का परित्याग कर पंचवटी के वनों में अपने पुत्र शंभू कुमार के पास रहने चली गई। नियति का चक्र यहाँ नहीं रुका। वनवास के दौरान भगवान श्री राम, माता सीता और लक्ष्मण भी पंचवटी में निवास कर रहे थे। एक दिन, जब शंभू कुमार अपनी तपस्या के अंतिम चरण में था, आकाश से सूर्य देव द्वारा भेजी गई एक दिव्य तलवार झाड़ियों में आकर गिरी। वन में लकड़ियाँ एकत्रित करते समय लक्ष्मण जी की दृष्टि उस चमकीली तलवार पर पड़ी। उन्होंने उत्सुकतावश उसे उठाया और उसकी धार को परखने के लिए सामने की घनी झाड़ी पर वार कर दिया। दुर्भाग्यवश, उस झाड़ी के पीछे शंभू कुमार तपस्या में लीन था और लक्ष्मण के अनजाने में किए गए वार से उसकी मृत्यु हो गई। पति के बाद अपने इकलौते पुत्र को भी खो देने के बाद शूर्पणखा पूरी तरह टूट चुकी थी। वह जानती थी कि वह स्वयं न तो रावण से बदला ले सकती है और न ही राम-लक्ष्मण से। तब उसने अपनी राजनीतिक और मानसिक चतुरता का उपयोग करते हुए एक भयंकर योजना बनाई। वह सुंदर रूप धारण कर राम और लक्ष्मण के समीप गई, जहाँ विवाद बढ़ने पर लक्ष्मण ने उसकी नाक और कान काट दिए। इसके बाद वह रक्त से लथपथ होकर रावण के पास पहुँची। उसने रावण को यह नहीं बताया कि उसका पुत्र मारा गया है या वह अपनी व्यक्तिगत बेइज्जती का बदला लेना चाहती है, बल्कि उसने रावण के राजा होने के अहंकार को उकसाने के लिए माता सीता के अलौकिक सौंदर्य का वर्णन किया। रावण अपनी बहन की यह दशा देखकर और अपने अहंकार के वश में होकर माता सीता के हरण के लिए विवश हुआ, जो अंततः लंका के समूल नाश और रावण के अंत का कारण बना। इस प्रकार, इतिहास के पन्नों में छिपी विद्युतजिह्वा की यह कथा स्पष्ट करती है कि रामायण के महान युद्ध के पीछे कई अनसुने पारिवारिक और राजनैतिक कारण भी सक्रिय थे। राहत टीकमगढ़

मित्रता है मानवता का सबसे मजबूत सेतु

अंतर्राष्ट्रीय मित्रता दिवस, 30 जुलाई 2026 पर विशेषः आज का विश्व अभूतपूर्व वैज्ञानिक प्रगति, तकनीकी विकास और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के उत्कर्ष का साक्षी है, लेकिन इसके समानांतर एक कठोर सच्चाई भी हमारे सामने है-मनुष्य पहले से अधिक अकेला, तनावग्रस्त और संबंधों से विहीन होता जा रहा है। परिवार छोटे हुए हैं, संवाद सीमित हुआ … Read more

पूर्णिमा का अर्थ और महत्व

गुरु पूर्णिमा आषाढ़ मास की पूर्णिमा को मनाई जाती है। यह दिन महर्षि वेद व्यास के जन्म और गुरु के प्रति सम्मान प्रकट करने के लिए समर्पित है। अंधकार से प्रकाश:— ‘गु’ का अर्थ अज्ञान (अंधकार) और ‘रु’ का अर्थ उसका नाश करने वाला होता है। गुरु वह हैं जो हमारे जीवन से अज्ञान का … Read more

कानून का राज तभी सार्थक है, जब न्याय सबके लिए समान हो

क्या ऐसी कार्रवाई हर दोषी पर होगी, चाहे वह गरीब हो या अमीर? अजमेर में गैंगरेप एवं मानव तस्करी जैसे जघन्य अपराधों से जुड़े आरोपियों के विरुद्ध प्रशासन द्वारा की गई कठोर कार्रवाई समाज में यह स्पष्ट संदेश देती है कि महिलाओं की अस्मिता, सुरक्षा और सम्मान से खिलवाड़ करने वालों के लिए किसी भी … Read more

धुंधलाती गुरु-गरिमा को पुनःस्थापित करने का महापर्व

गुरु पूर्णिमा 29 जुलाई 2026 पर विशेषः भारतीय संस्कृति का प्राण यदि किसी एक तत्व में समाहित है, तो वह है-गुरु। गुरु केवल ज्ञान देने वाला व्यक्ति नहीं, बल्कि जीवन को दिशा देने वाली चेतना है। वह मनुष्य के भीतर सोई हुई संभावनाओं को जगाता है, उसके व्यक्तित्व को संस्कारित करता है और उसे आत्मोन्नति … Read more

विश्व हेड एंड नेक कैंसर दिवस 27 जलाई 2026

थायरॉयड नोड्यूल बनाम गर्दन की गांठ: कब हो जाना चाहिए सतर्क? गर्दन में कोई छोटी-सी गांठ या हल्की सूजन दिखाई देने पर अधिकांश लोग इसे गंभीरता से नहीं लेते। यदि इससे तुरंत दर्द न हो, तो अक्सर लोग इसे सूजी हुई ग्रंथि, हल्के गले के संक्रमण या अस्थायी समस्या मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। व्यस्त दिनचर्या के … Read more

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