आईआईटी बॉम्बे के छात्र आत्महत्या से जुड़े सवाल

आईआईटी बॉम्बे के द्वितीय वर्ष के बीटेक छात्र साहिल वाकोडे की 18 सितंबर 2026 को हुई मृत्यु ने देश के उच्च शिक्षण संस्थानों की कार्यप्रणाली, विद्यार्थियों पर बढ़ते शैक्षणिक दबाव, परीक्षा में बढ़ती अनैतिकता, शिक्षकों की जवाबदेही, मानसिक स्वास्थ्य और परिसरों में राजनीतिक हस्तक्षेप जैसे अनेक गंभीर प्रश्न एक साथ खड़े कर दिए हैं। इस … Read more

पिघलते ग्लेशियर और खोखले होते पहाड़ः चेतावनी सुने

हिमालय केवल बर्फ से ढकी पर्वत-शृंखला नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों के जीवन, जल, कृषि, ऊर्जा और पर्यावरण का आधार है। लेकिन जलवायु परिवर्तन और पहाड़ों की वहन-क्षमता की अनदेखी करते हुए हो रहे निर्माण ने हिमालयी क्षेत्र को एक ऐसे संकटभरे दौर में पहुंचा दिया है, जहां प्राकृतिक आपदाएं अब केवल अचानक आने वाली घटनाएं … Read more

मोदी जी का पूंजीवाद का विश्लेषण

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली आर्थिक नीतियों को अक्सर ‘मोदीनॉमिक्स’ (Modinomics) या एक विशेष प्रकार के ‘राज्य-निर्देशित पूंजीवाद’ (State-Driven Capitalism) के रूप में देखा जाता है।   मोदी जी का पूंजीवाद के आर्थिक मॉडल का उद्देश्य बाजार सुधारों, निजी निवेश और मजबूत सरकारी नियंत्रण के समन्वय से आर्थिक विकास को गति देना है।अर्थशास्त्रियों और आलोचकों … Read more

*सत्ता और साहित्य*-

  *शासक और शासित के विचार ने सत्ताओं को जन्म दिया। सत्ता के विविध उपक्रम यथा राजनीति, धर्म, नस्ल, पूंजी, समाज, विचार, ने अपनी सुविधा और समय के हिसाब से शोषण और ताकत के नए- नए उपकरण ईजाद किए हैं.।*       *इन उपकरणों के बरक्स मानव समाज कलाओं के भीतर अपने मन की … Read more

*विकल्पहीनता पर विराम*

*राजनीति विशेषकर लोकतंत्र में विकल्पहीनता तानाशाही को जन्म  देती है। भारत के लोकतांत्रिक बगीचे में   विकल्पहीनता का यह बिजूका पिछले बारह- तेरह वर्षों से खड़ा- खड़ा मुस्कुरा रहा है।*            *इस विकल्पहीनता को खड़ा करने में, सत्ता द्वारा सब जायज-नाजायज  हथकंडे अपनाए गए हैं। प्रधानमंत्री की ‘लार्जर देन लाइफ़’ वाली छवि … Read more

युद्ध की राख से शांति का नया संसार कैसे बने?

अंतर्राष्ट्रीय शांति दिवस-21 सितम्बर, 2026 21 सितम्बर का अंतर्राष्ट्रीय शांति दिवस इस वर्ष ऐसे समय में आया है, जब दुनिया को शांति की सबसे अधिक जरूरत है। रूस-यूक्रेन युद्ध लंबा खिंच चुका है, पश्चिम एशिया में इजराइल-गाजा संघर्ष की मानवीय त्रासदी समाप्त नहीं हुई है और 2026 में अमेरिका-इजराइल तथा ईरान के बीच भीषण सैन्य … Read more

सत्ता से संघर्ष तकः ममता बनर्जी का राजनीतिक यथार्थ

ममता बनर्जी का राजनीतिक सफर एक छात्र राजनीति की साहसी नायिका से लेकर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री बनने और वर्तमान समय में घोर राजनीतिक व कानूनी संकटों से घिरने तक की एक बड़ी दास्तान है। जो ‘दीदी’ कभी सड़कों पर वामपंथ के 34 साल के किले को ढहाने के लिए जानी जाती थीं, वे आज … Read more

आज के सफल कहे जाने वाले अभिभावकों के सामने सबसे बड़ा सवाल…???

*जब बच्चों की जिंदगी में शनिवार-रविवार भी उसकी अपनी जिंदगी के लिए हों… तब बूढ़े माता-पिता अपने रविवार का क्या करें?* राज कुमार गुप्त कोलकाता। जब हमारे बच्चों की एडमिशन देश के 5 स्टार, टॉप टेन जैसे नामी कॉलेज या यूनिवर्सिटी में हो जाती है तो उस समय हम बड़े उत्साह और गर्व से परिचितों … Read more

अमेरिका की नई पैंतरेबाजी से डरने की जरूरत नहीं

विश्व राजनीति में शक्ति केवल सैन्य क्षमता या आर्थिक आकार से निर्धारित नहीं होती, बल्कि इस बात से भी तय होती है कि कोई महाशक्ति अपने प्रभाव का इस्तेमाल किस प्रकार करती है। आज अमेरिका की व्यापार एवं प्रतिबंध नीति इसी कसौटी पर बहस के केंद्र में है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिका … Read more

यूपीआई शुल्कः सुविधाओं का विस्तार या उपभोक्ता पर बोझ?

भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था में यूपीआई केवल भुगतान का माध्यम नहीं रह गया है, बल्कि वह रोजमर्रा के आर्थिक व्यवहार का अभिन्न हिस्सा बन चुका है। सब्जी वाले से लेकर बड़े कारोबारी तक, टैक्सी से लेकर ऑनलाइन खरीदारी तक और घरेलू लेन-देन से लेकर व्यावसायिक भुगतान तक-यूपीआई ने पैसे के लेन-देन की आदत, गति और … Read more

भ्रष्टाचार की शपथ से भ्रष्टाचार-मुक्त भारत तक पसरी चुनौतियां

भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई में सबसे खतरनाक क्षण वह नहीं होता जब कोई व्यक्ति चोरी करता है, बल्कि वह होता है जब समाज चोरी को सामान्य मानने लगता है। जब रिश्वत को ‘सुविधा शुल्क’, कमीशन को ‘व्यवस्था’, राजनीतिक पहुंच को ‘सिफारिश’ और नियम तोड़ने को ‘काम निकालने की कला’ कहा जाने लगे, तब भ्रष्टाचार केवल … Read more

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