विश्व शांति एवं संतुलन के लिए आत्ममंथन हो जी-7 बैठक में

फ्रांस में आयोजित जी-7 शिखर सम्मेलन पर इस समय पूरी दुनिया की निगाहें टिकी हुई हैं। वैश्विक अर्थव्यवस्था, अंतरराष्ट्रीय राजनीति, व्यापार, जलवायु परिवर्तन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, ऊर्जा सुरक्षा और युद्ध जैसे अनेक महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा के लिए दुनिया की सात प्रमुख विकसित अर्थव्यवस्थाओं का यह मंच एकत्रित हुआ है। ऐसे समय में यह प्रश्न स्वाभाविक … Read more

फिर वही मौसम बुलाए

फिर वही मौसम बुलाए, फिर वही शामें मिलें, तेरी बातों की महक से, ये हवाएँ फिर खिलें। खामोश बैठे देखते रहें, चाँदनी के सिलसिले, दिल के इन रास्तों पर, तेरे कदमों के काफ़िले। धूप की नरम उँगलियाँ जब छू लें आँगन की ज़मीं, याद की चादर बिछाकर सोएँ कुछ पल हम यहीं। तेरी हँसी के … Read more

तनाव, अवसाद या चिंता से मुक्त करने मे सहायक सिद्ध होती है Cognititve Defusion

वर्तमान समय मे भाग दौड़ भरी जीवन शैली के बीच नकारात्मक विचारों का उमड़ना आम बात है। कई बार व्यक्ति इन्ही मे उलझ कर रह जाता है, जिस से उसका व्यक्तिगत, सामाजिक एवं प्रोफेशनल जीवन भी प्रभावित होता है। Cognititve Defusion यानि संज्ञानात्मक अलगाव Acceptance and Commitment Therapy (ACT) technique अर्थात स्वीकृति और प्रतिबद्धता चिकित्सा … Read more

चिन्ताजनक है महंगी होती दवाइयां, महंगा होता इलाज

भारत आज विकसित राष्ट्र बनने के स्वप्न के साथ आगे बढ़ रहा है। वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण की परिकल्पना बार-बार दोहराई जा रही है। बड़े-बड़े बुनियादी ढांचे, डिजिटल क्रांति, अंतरिक्ष उपलब्धियां और आर्थिक विकास के दावों के बीच एक प्रश्न बार-बार सामने खड़ा हो जाता है-क्या ऐसा भारत वास्तव में विकसित कहलाएगा, … Read more

मेवाड़ का सूर्य पुत्र जिसने कभी अधीनता स्वीकार नहीं की

प्रातः स्मरणीय वीरशिरोमणि महाराणा प्रताप की जयन्ती पर विशेष – महाराणा प्रताप का नाम लेते ही हमारे सामने स्वाधीनता संग्राम के अमर सेनानी राष्ट्र्वीर की भव्य मूर्ति आ जाती है। प्रातः स्मरणीय प्रणवीर प्रताप ने अपनी कष्ट सहिष्णुता, त्याग, संगठन शक्ति, प्रतिज्ञा पालन, देश प्रेम, कुशल नेतृत्व और अपार वीरता से इतिहास में एक उज्जवल, अनुकरणीय आदर्श की स्थापना की है, जिससे … Read more

शिक्षा में एक नये युग एवं शैक्षिक क्रांति की आहट

आज पूरी दुनिया शिक्षा के एक ऐसे मोड़ पर खड़ी है जहां ज्ञान का विस्तार तो अभूतपूर्व हुआ है, लेकिन जीवन मूल्यों का क्षरण भी उतनी ही तेजी से दिखाई देता है। विज्ञान और तकनीक ने मानव जीवन को सुविधासंपन्न बनाया है, लेकिन मानसिक तनाव, हिंसा, प्रतिस्पर्धा, नैतिक संकट और मानवीय संवेदनाओं के क्षय जैसी … Read more

राम लौटे हैं अयोध्या में

राम लौटे हैं अयोध्या में, फिर दीपों का मेला है, सदियों की सूनी पलकों पर, सपनों का उजियाला है। राम लौटे हैं अयोध्या में…  सरयू गाए मंगल-गाथा, नभ जय-जयकारें करता है, हर पत्थर में राम-नाम का, अक्षय स्वर झरता है। तप की अग्नि, त्यागों की बेला, श्रद्धा का अभिनंदन है, यह केवल मंदिर नहीं, राष्ट्र-आत्मा का वंदन है। हर आहट में आज सुनाई, मर्यादा का रेला है, सदियों की सूनी पलकों पर, सपनों का उजियाला है। राम लौटे हैं अयोध्या में… राम न केवल राजतिलक हैं, जन-जन की अभिलाषा हैं, शबरी की आँखों की प्रतीक्षा, केवट की परिभाषा हैं। वन की पगडंडी पर चलकर, मानवता को मान दिया, टूटे मन के हर कोने को, अपनेपन का दान दिया। आज अयोध्या के कण-कण में, युग का नव-उद्घोष … Read more

गृहिणी राष्ट्रनिर्माता है तो हिंसा की शिकार क्यों?

भारतीय समाज में महिलाओं को सशक्त बनाने के दावे लंबे समय से किए जाते रहे हैं। उन्हें ‘आधी आबादी’ और विकास की समान भागीदार कहा जाता है। शिक्षा, रोजगार, राजनीति और नेतृत्व के क्षेत्र में उनकी भागीदारी बढ़ाने के लिए अनेक योजनाएं बनाई जाती हैं। संसद और विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने … Read more

बचपन को श्रम नहीं, शिक्षा, सुरक्षा और सम्मान का अधिकार मिलें

बाल श्रम के विरुद्ध विश्व दिवस-12 जून 2026 हर वर्ष 12 जून को मनाया जाने वाला बाल श्रम के विरुद्ध विश्व दिवस केवल एक औपचारिक दिवस नहीं, बल्कि मानवता के अंतःकरण को झकझोरने वाला अवसर है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि दुनिया का कोई भी बच्चा मजदूर बनने के लिए पैदा नहीं होता। … Read more

मासूम बचपन पर मजदूरी का बोझ: क्या बच्चों के संवैधानिक अधिकार सुरक्षित हैं?

12 जून को विश्व बाल श्रम निषेध दिवस -बाबूलाल नागा    जब किसी होटल में चाय परोसता, किसी ढाबे पर बर्तन साफ करता या ईंट-भट्टे पर काम करता बच्चा दिखाई देता है, तब केवल एक बच्चा मजदूरी नहीं कर रहा होता, बल्कि संविधान की आत्मा भी कहीं न कहीं घायल होती है। बच्चों के हाथों में किताबों और खिलौनों … Read more

राजस्थान से राज्यसभा में अनुभव, सादगी और समर्पण की नई तिकड़ी

 –    राकेश दुबे राजस्थान की राजनीति में राज्यसभा चुनाव प्रायः राजनीतिक गणित, रणनीति और शक्ति प्रदर्शन के लिए चर्चा में रहते हैं, लेकिन इस बार का चुनाव एक अलग ही संदेश देकर गया। प्रदेश से कांग्रेस के वरिष्ठ नेता नीरज डांगी तथा भारतीय जनता पार्टी के डॉ. सतीश पूनिया और डॉ. अलका सिंह गुर्जर का निर्विरोध निर्वाचन केवल … Read more

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