चेतना और चरित्र

dr. j k gargचेतना और मनुष्य के चरित्र में आधारभूत मौलिक संबंध है—
चेतना ही आदमी का वह विशेष गुण है जो मनुष्य को जीवित बनाती है, वहीं दूसरी तरफ चरित्र उसका वह संपूर्ण संगठन है जिसके द्वारा उसके जीवित रहने की वास्तविकता व्यक्त होती है तथा जिसके द्वारा जीवन के विभिन्न कार्यो का संचालन कराया जाता हैं।
यहाँ यह भी ध्यान देने की बात है कि किसी मनुष्य की चेतना और चरित्र केवल उसी की व्यक्तिगत संपत्ति नहीं होते। ये बहुत दिनों के सामाजिक प्रक्रम/ सम्बन्धों के परिणाम होते हैं। प्रत्येक व्यक्ति अपने जींस (वंशानुक्रम) को स्वयं में प्रस्तुत करता है। वह जींस , और विशेष प्रकार के संस्कारों को पैत्रिक संपत्ति के रूप में पाता है। वह इतिहास को भी स्वयं में निरूपित करता है, क्योंकि उसने विभिन्न प्रकार की शिक्षा तथा प्रशिक्षण को जीवन में पाया है। इसके अतिरिक्त वह दूसरे लोगों से पाप्त शिक्षा आदि को भी अपने में निरूपित करता है, क्योंकि उनका प्रभाव उसके जीवन पर उनके कार्यकलाप, उपदेश तथा अन्य गुणों के द्वारा पड़ा है।
जब एक बार मनुष्य की चेतना विकसित हो जाती है, तब आदमी अपनी खुद की प्राकृतिक स्वतंत्रता खो देता है और वह ऐसी अवस्था में भी विभिन्न कार्यकलापों,, सामाजिकता प्रेरणाओं (आवेगों) और भीतरी प्रवृत्तियों से प्रेरित होता है, परंतु वह उन्हें स्वतंत्रता पूर्वक अभिव्यक्त नहीं कर पाता है । वह या तो उन्हें इसलिए मन मे दबा लेता है जिससे कि वे समाज के दूसरे लोगों की आवश्यकताओं एवं इच्छाओं में का बाधक न बनें, अथवा उन्हें इस प्रकार का रूप दे देता है जिससे वह समाज के अन्दर समाजविरोधी न कहलाये |
इस प्रकार मनुष्य की चेतना अथवा विवेकी मन उसके अवचेतन मन, अथवा प्राकृतिक, मन पर अपना नियंत्रण कर लेता है। मनुष्य और पशु में यही तो विशिष्ट अंतर है। पशुओं के जीवन में इस प्रकार का नियंत्रण नहीं रहता, अतएव पशु जैसा चाहते हैं वे वैसा ही करते हैं। मनुष्य चेतनायुक्त प्राणी है, अतएव कोई भी क्रिया या काम करने के पहले मनुष्य उसके परिणाम के बारे में भली प्रकार सोच लेता है।
डा. जे. के. गर्ग
सन्दर्भ (Referenceses )—-विकिपीडिया, Anthropology of Consciousness, Journal of Consciousness Studies,Cognition Psyche, Science & Consciousness Review,ASSC e-print archive containing articles, book chapters, theses, conference presentations by members of the ASSC.,Stanford Encyclopaedia of Philosophy, Levels of Consciousness, by Steve Pavlina) , डेविड आर. हव्किंस, अपनी किताब Power vs. Force, dhyan dhyanam ,.onlymyhealth.com,FractalEnlightenment.com- ways-to-expand-your-consciousness . आदि |

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About Jugal Kishor

Date of Birth----17th May, 1943, Academic Qualification---M.sc (chemistry, Ph.D (Chemistry) Research Publication----20 Research Papers in various International and National Journals Presented many research papers in various National and Inter National conferences. Teaching Experience------- Degree classes----------------33 years P. G. Classes------------------31 years Worked as Lecturer in Chemistry, Selection Grade Lecturer, Head Of Department of Chemistry at GOVT COLLEGE Ajmer from 1969 to 1998. Work Vice Principal At Govt College, Ajmer Work as Principal Govt Girls College, Ajmer and Govt College Kekari. Retired as Joint Director of College Education, Rajasthan, Jaipur, Worked as subject expert for selection of Lecturers in various colleges. Address----2-Ga-16, Vaishali Nagar Ajmer--305006 Phone---0145-2641020 Mobile---9413879635
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