सृष्टि के रचियता ब्रह्माजी—ब्रह्मा मन्दिर—–पुष्कर Part 4

पुष्कर की उत्त्पति के बारे में पोराणिक मान्यतायें—–

डा. जे.के.गर्ग

डा. जे.के.गर्ग

पुष्प से बना पुष्कर—– पद्मपुराण में प्राप्त विवरण के अनुसार एक समय ब्रह्मा जी को यज्ञ करना था, उसके लिए उपयुक्त स्थान का चयन करने के लिए ब्रह्मा जी ने प्रथ्वी पर अपने हाथ से एक कमल पुष्प को गिराया, यह पुष्प अरावली पहाडियों के मध्य गिरा और लुढकते हुए दो स्थानों को स्पर्श करने के बाद तीसरे स्थान पर ठहर गया िन तीन स्थानों को पुष्प ने प्रथ्वी को स्पर्श किया, वहां जलधारा फूट पडी और पवित्र सरोवर बन गए | सरोवरों की रचना एक पुष्प से हुई, इसलिए इन्हें पुष्कर कहा गया | प्रथम सरोवर कनिष्ठ पुष्कर, द्वितीय सरोवर मध्यम पुष्कर कहलाया एवं जहां पुष्प ने विराम लिया वहां एक सरोवर बना, जिसे ज्येष्ठ पुष्कर कहा गया(ज्येष्ठ पुष्कर के देवता ब्रह्माजी, मध्य पुष्कर के श्री विष्णुजी और कनिष्ठ पुष्कर के देवता रुद्र हैं। अन्य मान्यताओं के मुताबिक योगीराज श्रीकृष्ण ने पुष्कर में दीर्घकाल तक तपस्या की थी। सुभद्रा के अपहरण के बाद अर्जुन ने पुष्कर में विश्राम किया था। कहा जाता है कि मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम ने भी अपने पिता दशरथ का श्राद्ध पुष्कर में किया था।
विभिन्न समुदायों एवं धर्मों में पुष्कर का महत्व
पुष्कर के बारे में ऐसी मान्यता है के हर गुर्जर को जीवन में एक बार पुष्कर अवश्य आना चाहिए और गुर्जर घाट पर स्नान करना चाहिए l जैन धर्म की मातेश्वरी पद्मावतका पद्मावतीपुरम यहाँ जमींदोज हो चुका है जिसके अवशेष आज भी विद्यमान हैं। इसके साथ ही सिख समाज का गुरुद्वारा भी विशाल स्तर पर बनाया गया है। नए रंगजी और पुराना रंगजी का मंदिर भी आकर्षण का केंद्र है। जगतगुरु रामचन्द्राचार्य का श्रीरणछोड़ मंदिर, सवाई भोज मन्दिर, देव नारायण मन्दिर, भुणा जी का मन्दिर,निम्बार्क सम्प्रदाय का परशुराम मंदिर, महाप्रभु की बैठक, जोधपुर के बाईजी का बिहारी मंदिर, तुलसी मानस व नवखंडीय मंदिर, गायत्री शक्तिपीठ, जैन मंदिर, गुरुद्वारा आदि दर्शनीय स्थल हैं। पुष्कर में प्रतिवर्ष कार्तिक पूर्णिमा को प्रसिद्ध’पुष्कर मेला लगता है | यह मेला कार्तिक महीने से पूर्णिमा तक चलता है अष्टमी की ऐसा माना जाता है कि पुष्कर सरोवर में स्नान करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। इन दिनों पुष्कर में प्रसिद्ध पशु मेला भी लगता है जिसमें करोड़ो रूपये का व्यापार पशुओं की खरीदने और बेचने में होता है | पुष्कर में गुलाब की खेती भी विश्व प्रसिद्ध है। पुष्कर का गुलाब तथा पुष्प से बनी गुलकंद, गुलाब जल इत्यादि बहुत प्रसिद्ध हैं इन सबका का बड़ी मात्रा मे निर्यात भी किया जाता है जिससे करोड़ों रुपयों की आय होती है । विदेशी पर्यटकों के लिये पुष्कर प्रमुख पर्यटक स्थल और आकर्षण का केन्द है |

संकलनकर्ता——-डा.जे.के. गर्ग

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विशेष.

About Jugal Kishor

Date of Birth----17th May, 1943, Academic Qualification---M.sc (chemistry, Ph.D (Chemistry) Research Publication----20 Research Papers in various International and National Journals Presented many research papers in various National and Inter National conferences. Teaching Experience------- Degree classes----------------33 years P. G. Classes------------------31 years Worked as Lecturer in Chemistry, Selection Grade Lecturer, Head Of Department of Chemistry at GOVT COLLEGE Ajmer from 1969 to 1998. Work Vice Principal At Govt College, Ajmer Work as Principal Govt Girls College, Ajmer and Govt College Kekari. Retired as Joint Director of College Education, Rajasthan, Jaipur, Worked as subject expert for selection of Lecturers in various colleges. Address----2-Ga-16, Vaishali Nagar Ajmer--305006 Phone---0145-2641020 Mobile---9413879635
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