प्रथम प्रधानमंत्री नेहरु को श्रद्धा सुमन Part 2

जन जन के नायक नेहरू जी के योगदान को तीन भागों में बांटा जा सकता है

डा. जे.के.गर्ग
डा. जे.के.गर्ग
1.ऐसी शक्तिशाली संस्थाओं का निर्माण,जिनसे भारत में प्रजातांत्रिक व्यवस्था स्थायी हो सके। इन संस्थाओं में संसद एवं विधानसभायें व पूर्ण स्वतंत्र न्यायपालिका शामिल हैं। (2 )प्रजातंत्र को जिंदा रखने के लिये निश्चित अवधि के बाद चुनावों की व्यवस्था और ऐसे संवैधानिक प्रावधान जिनसे भारतीय प्रजातंत्र धर्मनिरपेक्ष बना रहे| (3)मिश्रित अर्थव्यवस्था:—— अपनी समाजवादी अवधारणा को स्पष्ट करते हुए नेहरू लिखते हैं“मैं समाज से व्यक्ति संपदा और मुनाफे की भावना खत्म करना चाहता हूं|मैं प्रतिस्पर्द्धा की जगह समाज-सेवा और सहयोग की भावना स्थापित करने का समर्थक हूं|मैं व्यक्तिगत मुनाफे के लिए नहीं,उपयोग के लिए उत्पादन चाहता हूं|मैं यह बात विश्वासपूर्वक कहता हूं कि दुनिया और भारत की समस्याओं का अंत समाजवाद से ही हो सकता है, मैं इस शब्द को किसी अस्पष्ट समाजवादी की तरह नहीं समाज-वैज्ञानिक और अर्थशास्त्री की तरह काम में लेता हूं | समाजवाद का अर्थ है– व्यक्ति-संपदा का उन्मूलन और व्यक्तिगत मुनाफे की जगह सहयोगी भावना के महान आदर्श की शुरुआत,इसका अर्थ है —-हमारी रुचियों,आदतों हमारी प्रवृत्तियों में बुनियादी तब्दीली|संक्षेप में एक पुरानी पूंजीवादी व्यवस्था से अलग एक नयी सभ्यता की शुरुआत“ |
अधोसंरचनात्मक एवं बुनियादी उद्योगों की सार्वजनिक क्षेत्र में स्थापना——–बिजली का उत्पादन पूरी तरह से सार्वजनिक क्षेत्र में रखा गया। इसी तरह इस्पात,बिजली के भारी उपकरणों के कारखाने,रक्षा उद्योग,एल्यूमिनियम एवं परमाणु ऊर्जा भी सार्वजनिक क्षेत्र में रखे गए। देश में तेल की खोज की गई और पेट्रोलियमरिफाईनरी व एलपीजीबाटलिंग का काम भी केवल सार्वजनिक क्षेत्र में रखे गये।
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