सूर्य के उत्तरायण होने उल्लास से मनायी जाती है मकर सक्रांति (माघी सक्रांति) Part 1

डा. जे.के.गर्ग
डा. जे.के.गर्ग
सच्चाई तो यही है कि भारतीय संस्क्रती में त्योहार एवं पर्व सामाजिक बंधनों को मजबूत और मधुर बनाने का सशक्त माध्यम है | त्योहार एवं पर्व एक बहाना है अपनों से मिलने जुलने का, लड़ाई-झगडे और गिले-शिकवे भूलाकर एक होने का और ईश्वर की आराधना करने का | सनातन धर्म की मान्यताओं के मुताबिक परमात्मा इस सृष्टि के कण-कण में विद्यमान है, ईश्वर केवल मंदिरों या मस्जिदों या अन्य धार्मिक स्थलों में नहीं बसता है बल्कि ईश्वर तो संपूर्ण प्रकृति में बसता है | त्यौंहार परमपिता परमात्मा के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने,सामाजिक संबंधों में मजबूती प्रदान करने व जीवन में उल्लास खुशी लाने के लिए मनाए जाते हैं। इन्हीं त्यौंहारों मे एक पर्व है मकर सक्रांति जो सम्पूर्ण सृष्टि के लिए ऊर्जा के स्रोत भगवान सूर्य की अराधना के रूप में मनाया जाता है |

जितने समय में पृथ्वी सूर्य के चारों ओर एक चक्कर लगाती है उस अवधि को “सौर वर्ष” कहते हैं। पृथ्वी का गोलाई में सूर्य के चारों ओर घूमना “क्रान्तिचक्र” कहलाता है। इस परिधि चक्र को बाँटकर बारह राशियाँ बनी हैं। सूर्य का एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करना “संक्रान्ति” कहलाता है। इसी लिये सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने को “मकर संक्रान्ति”कहते हैं। मकर संक्रांति माघ माह में आती है | संस्कृत में मघ शब्द से माघ निकला है। मघ शब्द का अर्थ होता है-धन,सोना-चांदी,कपड़ा,आभूषण आदि इसीलिये इन वस्तुओं के दान आदि के लिए ही माघ माह उपयुक्त है। ईसी वजह से मकर सक्रांति को माघी संक्रांति भी कहते है।

सूर्य के उत्तरायण होने का पर्व– मकर सक्रांति

जितने समय में पृथ्वी सूर्य के चारों ओर एक चक्कर लगाती है उस अवधि को “सौर वर्ष” कहते हैं। पृथ्वी का गोलाई में सूर्य के चारों ओर घूमना “क्रान्तिचक्र” कहलाता है। इस परिधि चक्र को बाँटकर बारह राशियाँ बनी हैं। सूर्य का एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करना “संक्रान्ति” कहलाता है। इसी लिये सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने को “मकर संक्रान्ति”कहते हैं।

सकलंककर्ता एवं प्रस्तुतिकरण—डॉ. जे.के गर्ग
सन्दर्भ—विभिन्न पत्र-पत्रिकायें, मेरी डायरी के पन्ने आदि
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