नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने तीन हफ्ते में दूसरी पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी बढ़ाने का फैसला किया है। मंगलवार को पेट्रोल पर 2.25 रुपये और डीजल पर 1 रुपया प्रति लीटर एक्साइज ड्यूटी बढाई गई है। जिससे सरकारी खजाने को करीब 4 हजार करोड़ रुपये का फायदा पहुंचेगा। इससे पहले 12 नवंबर को पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में 1.50 रुपये की बढ़ोतरी की गई थी।
इस तरह कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट का पूरा फायदा आम जनता तक पहुंचाने के बजाय सरकार ने सरकारी खजाने की हालत दुरुस्त करने का रास्ता चुना है। महीने भर के अंदर पेट्रोल पर 3.75 और डीजल पर 2.50 रुपये एक्साइज ड्यूटी बढ़ा चुकी है, जिससे सरकार को करीब 13-15 हजार करोड़ रुपये का फायदा पहुंचाने का अनुमान है।
टैक्स की मार पड़ने के बावजूद फिलहाल आम जनता पर इसका असर नहीं पड़ेगा। इंडियन ऑयल जैसी सरकारी तेल कंपनियं पेट्रोल व डीजल पर बढ़ी एक्साइज ड्यूटी को अभी ग्राहकों से नहीं वसूलेंगी। इंडियन ऑयल के चेयरमैन बी. अशोक ने बताया कि हमने कल ही पेट्रोल और डीजल के दाम घटाए हैं, इसलिए अभी इस फैसले का बदला नहीं जाएगा। फिलहाल एक्साइज ड्यूटी में बढ़ोतरी को कंपनी खुद वहन करेगी।
अब अनब्रांडेड डीजल पर एक्साइज ड्यूटी अब 2.96 रुपये से बढ़कर 3.96 रुपये प्रति लीटर की गई है, जबकि ब्रांडेड डीजल पर 5.25 के बजाय 6.25 रुपये प्रति लीटर एक्साइज ड्यूटी लगेगी। इसी तरह अनब्रांडेड पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी 2.70 रुपये से बढ़कर 4.95 रुपये प्रति लीटर तय की गई है, वहीं ब्रांडेड पेट्रोल पर 3.85 के बजाय 6.10 रुपये एक्साइज ड्यूटी हो गई है।
कच्चे तेल की कीमतें चार साल के निचले स्तर पर आने की वजह से एक्साइज ड्यूटी में बढ़ोतरी का बोझ फिलहाल ग्राहकों पर नहीं पड़ेगा। लेकिन भविष्य में अगर कच्चे तेल के दाम बढ़ते हैं तो पेट्रोल और डीजल पर टैक्स की मार आम जनता पर भारी पड़ सकती है। अगर सरकार एक्साइज ड्यूटी नहीं बढ़ाती तो पेट्रोल और डीजल 2-3 रुपये और सस्ता हो सकता था। लेकिन सरकार ने कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट का फायदा आम जनता के साथ-साथ सरकारी खजाने को भी पहुंचाने की कोशिश कर रही है।
एक्साइज ड्यूटी से 15 हजार करोड़ की कमाई
अंतराष्ट्रीय बाजार में इंडियन बास्केट क्रूड ऑयल के दाम 67.72 डॉलर प्रति बैरल तक गिर चुके हैं। जबकि डॉलर के मुकाबले रुपया थोड़ा कमजोर होकर 62.12 रुपये के स्तर पर है। सरकार के इस कदम से अगले पखवाड़े पेट्रोल-डीजल की कीमतों में संभावित कटौती टल सकती है। लेकिन इससे सरकार को अपने घाटे से उबरने में मदद मिलेगी। इस साल एक्साइज ड्यूटी बढ़ाने से सरकार ने 13-15 हजार करोड़ रुपये का अतिरिक्त राजस्व प्राप्त होने का अनुमान है। पेट्रोलियम सब्सिडी में भी इस साल सरकार को 50-60 हजार करोड़ रुपये की बचत हो सकती है।
बाजार के विशेषज्ञ का मानना कि सरकार की ओर से यह कदम आगे की रणनीति का हिस्सा है। इसके जरिए एक ओर सरकार डीजल और पेट्रोल की गिरती कीमतों से होने वाले रेवन्यु लॉस को कम करेगी वहीं दूसरी ओर अगर भविष्य में क्रूड की कीमतें बढ़ती है तो सरकार एक्साइज ड्यूटी फिर से घटाकर ग्राहकों को राहत दे सके।
एनर्जी एक्सपर्ट का नजरिया
एनर्जी एक्सपर्ट नरेंद्र तनेजा मानते है कि सरकार ने यह एक्साइज ड्यूटी बढ़ाने का ये कदम आगे के समय को ध्यान में रखकर उठाया है, क्योंकि यहां से अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल कीमतें फिर से वापस तेज होती है तो सरकार एक्साइज ड्यूटी घटाकर ग्राहकों को पेट्रोल और डीजल पर राहत दे सकें।