पुराणों में श्रेष्ठ है भागवत : भाईश्री

नारायण आश्रम में भागवत कथा का शुभारंभ
_DSC0286_DSC0353-सुमित सारस्वत- ब्यावर। सत्संग पुरूषार्थ से नहीं, प्रभु कृपा से प्राप्त होता है। जन्म जन्मांतर के पुण्य का उदय होने पर ही कोई इंसान कथा आयोजन का निमित्त बनता है। भागवत कथा गायन व श्रवण दोनों ही पुण्य कार्य है। यह उद्गार अंतर्राष्ट्रीय कथा वाचक पूज्य रमेश भाई ओझा ‘भाईश्रीÓ व्यक्त किए। वे यहां नारायण आश्रम में श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ महोत्सव समिति की ओर से आयोजित संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा के प्रथम दिन प्रवचन दे रहे थे।
भाईश्री ने भागवत का महत्व बताते हुए कहा कि जिस तरह नदियों में गंगा श्रेष्ठ है, उसी तरह पुराणों में भागवत श्रेष्ठ है। गंगा ब्रह्म द्रव्य है। गंगा नारायण का चरणामृत है। चुनाव में इलेक्ट जनता करती है, जबकि कथा में सलेक्ट श्रीहरि करते हैं। पुण्यशाली को ही कथा श्रवण नसीब होता है। उन्होंने कहा कि आधुनिकता की चकाचौंध में जीवन का प्रवाह गलत दिशा में जा रहा है। इंसान अपनी सोच को सकारात्मक रखे। प्रतिदिन 10 मिनट की सकारात्मक सोच दिनभर की नकारात्मकता को समाप्त कर देती है। प्रभु को समर्पित कर देने पर जीवन आनंदमय हो जाता है। भाईश्री ने कहा कि दिमाग से बनाए गए रिश्ते में स्वार्थ होता है। दिल से बनाया गया रिश्ता पवित्र होता है। दया, करुणा, ममता, प्रेम व सत्य के प्रति निष्ठा का भाव ही सच्ची मानवता है। कलयुग में पैसा कमाना भले ही मुश्किल हो मगर भगवत प्राप्ति बेहद सरल है। भाईश्री ने ‘इतनी शक्ति हमें देना दाता.., मेरे तो गिरधर गोपाल, दूसरो न कोय.., जय जय नारायण नारायण हरी हरी.. भजन सुनाए तो श्रोता भावविभोर होकर झूम उठे। मंच संचालन रमेश बंसल ने किया। कथा प्रारंभ होने से पूर्व विधायक शंकर सिंह रावत, भाजपा मंडल अध्यक्ष चैनसुख हेडा, महामंत्री रिखबचंद खटोड़, माणकचंद जिंदल, अशोक कुमार, विजय बहादुर, श्यामसुंदर जिंदल, रामेश्वर गोयल, राधेश्याम गोयल, भीमसेन अग्रवाल, ओमप्रकाश अग्रवाल, राजेंद्र अग्रवाल, राधेश्याम गोयल, गोपाललाल बजाज ने भाईश्री का स्वागत कर आशीर्वाद लिया।

कथा से पहले किया भोले का अभिषेक
पूज्य भाईश्री पांडाल में प्रवेश से पूर्व कथास्थल पर बने अतिप्राचीन शिव मंदिर पहुंचे। यहां भाईजी ने शिवलिंग का जलाभिषेक कर बिल्वपत्र चढ़ाया। हनुमानजी को भी प्रणाम किया। पांडाल में मंत्रोच्चार के बीच श्रीनाथजी को नमन कर पूजा-अर्चना की। विप्रजनों का पूजन करने व भागवत ग्रंथ को नमन कर सुमधुर वाणी में कथा का अमृतपान कराया।

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