स्वतंत्रता दिवस भारत के इतिहास में एक महत्वपूर्ण दिन है, क्योंकि यह ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के अंत और स्वतंत्रता और स्वशासन के एक नए युग की शुरुआत का प्रतीक है।
15 अगस्त के विभिन्न प्रधानमंत्री के भाषण के प्रमुख अंश:—-

अगस्त स्वतंत्रता दिवस पर देश के प्रधानमंत्रियों के लाल किले से दिए गए भाषणों के प्रमुख अंशों में जवाहरलाल नेहरू का “ट्रिस्ट विद डेस्टिनी”, इंदिरा गांधी के सुरक्षा व आत्मनिर्भरता संबंधी संदेश, और नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत 2047’ व ‘आत्मनिर्भर भारत’ के संकल्प शामिल हैं।
ऐतिहासिक स्वतंत्रता दिवस भाषण और उनके मुख्य अंश :—-
पंडित जवाहरलाल नेहरू (1947)मुख्य अंश:—
“जब दुनिया सो रही होगी, तब भारत जीवन और स्वतंत्रता के लिए जागेगा।”संदेश: यह एक ऐतिहासिक क्षण था जब औपनिवेशिक शासन का अंत हुआ और एक नए युग की शुरुआत का संकल्प लिया गया।
15 अगस्त को शास्त्री।के भाषण के प्रमुख अंश
प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने स्वतंत्रता दिवस पर देश को संबोधित करते हुए आत्म-निर्भरता, कृषि को प्राथमिकता और राष्ट्रीय एकता पर जोर दिया था। उनके भाषण के मुख्य बिंदु देश की सुरक्षा और आर्थिक मजबूती पर केंद्रित थे।
प्रमुख अंश और संदेश देश की रक्षा और सम्मान:——
“हम रहें या न रहें, लेकिन हमारा देश मजबूत रहना चाहिए”
कृषि और खाद्यान्न:——
चौथे पंचवर्षीय योजना में कृषि विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई, ताकि देश अनाज के मामले में आत्मनिर्भर बन सके।महंगाई और आर्थिक अनुशासन: बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने और घाटे की वित्त व्यवस्था (deficit financing) से बचने का संकल्प लिया गया।
सामूहिक एकता:——
देश के नागरिकों से मिलकर देश की कठिनाइयों का सामना करने और पूरी ईमानदारी से अपने कर्तव्यों का पालन करने की अपील की गई। लाल किले की प्राचीर से लाल बहादुर शास्त्री ने पाकिस्तान को ललकारा, ‘जय जवान जय किसान . अनाज की बचत के लिए उन्होंने सप्ताह में
एक दिन उपवास करने की अपील की थी .
इंदिरा गांधी (विभिन्न वर्ष)मुख्य अंश:—-
राष्ट्रीय अखंडता, एकता और देश की संप्रभुता की रक्षा पर सबसे अधिक जोर।संदेश: देश के आंतरिक और बाहरी खतरों के खिलाफ मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति और आत्मनिर्भरता का आह्वान।
भूतपूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने लाल किले की प्राचीर से अपने स्वतंत्रता दिवस के भाषणों में देश की एकता, गरीबों के उत्थान और आत्मनिर्भरता पर विशेष जोर दिया। उनके भाषणों में राष्ट्रीय सुदृढ़ता और शांति का संदेश प्रमुख रहता था।
भाषण के मुख्य विचार और अंश राष्ट्रीय एकता और अखंडता: उन्होंने हमेशा देशवासियों को जाति, धर्म और भाषा से ऊपर उठकर एकजुट रहने की सीख दी। उनका कहना था कि देश की आजादी और उसकी रक्षा तभी संभव है जब हम सब मिलकर एक मजबूत ताकत के रूप में खड़े रहें।
गरीबों और कमजोर वर्ग का उत्थान:—- उनके भाषणों में समाज के सबसे निचले पायदान पर खड़े व्यक्ति की मदद करने की प्रतिबद्धता झलकती थी। उन्होंने कहा था कि यदि भारत के गरीब मजबूत होंगे, तो पूरा देश मजबूत होगा।
शांति और शक्ति:—– उन्होंने स्पष्ट किया था कि भारत एक शांतिप्रिय देश है, लेकिन शांति का अर्थ कमजोरी नहीं है। शांति को बनाए रखने के लिए आत्मनिर्भरता, आत्मविश्वास और आंतरिक शक्ति की आवश्यकता होती है।
युवाओं और भविष्य के प्रति अपेक्षाएं: —– उन्होंने बच्चों और युवा पीढ़ी को देश का भविष्य बताते हुए उन्हें समान अवसर देने और देश निर्माण में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया था।प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने 15 अगस्त को जनता से राष्ट्र की एकता को कमजोर करने वाली विघटनकारी शक्तियों के सामने दृढ़ रहने का आह्वान किया। श्रीमती इंदिरा गांधी जनता को शांति और सद्भाव पर भाषण देती हैं। श्रीमती गांधी भारत और उसके पड़ोसी देशों जैसे पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल और श्रीलंका के बीच संबंधों
को बढ़ाने पर जोर दिया!
मोरारी जी देसाई के भाषण के मुख्य अंश
प्रधानमंत्री के रूप में मोरारजी देसाई ने 15 अगस्त (विशेषकर 1977 और 1978 में) लाल किले से राष्ट्र को संबोधित किया था। उनके भाषण के मुख्य बिंदुओं में लोकतंत्र की बहाली, जनता की निर्भरता, और देश की अटूट एकता शामिल थे। कतंत्र और भयमुक्ति:—-आपातकाल के बाद सत्ता में आई सरकार के दौरान उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि देश का आम नागरिक इतना निडर होना चाहिए कि वह सरकार या सबसे बड़े पद पर बैठे व्यक्ति की गलती भी बिना डरे सामने रख सके। देश की अमरता:— उन्होंने विश्वास जताया कि भारत एक ऐसा देश है जिसकी संस्कृति और बुनियादी ताकत को कभी कोई नहीं मिटा सकता, इसलिए नागरिकों को कभी निराश नहीं होना चाहिए। जनता की जिम्मेदारी:—- जनता पार्टी की सरकार मिलने के बाद उन्होंने देशवासियों को याद दिलाया कि देश को चलाने की असली ताकत जनता के हाथ में है और शासन को पूरी ईमानदारी से देशहित में काम करना चाहिए।
15 अगस्त को राजीव गांधी के भाषण के प्रमुख अंश
पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त) पर लाल किले से अपने भाषणों में देश की एकता, लोकतंत्र की मजबूती, तकनीकी विकास और भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़े कदम उठाने पर जोर दिया था।
उनके भाषणों के प्रमुख अंश :—-
राष्ट्रीय एकता और अखंडता देश की रक्षा और एकता सर्वोपरि है। उन्होंने स्पष्ट किया था कि भारत को कमजोर या टूटने नहीं दिया जाएगा और इसके लिए हर संभव कुर्बानी दी जाएगी।विविधता में ही देश की असली ताकत है, और सभी जातियों व धर्मों को मिलकर देश को आगे बढ़ाना चाहिए।लोकतंत्र और प्रशासनिक सुधार अपने ऐतिहासिक भाषणों में उन्होंने भ्रष्टाचार पर प्रहार करते हुए व्यवस्था में सुधार की बात कही थी।देश में निष्पक्ष चुनाव, स्वतंत्र न्यायपालिका, मुक्त प्रेस और मजबूत प्रजातंत्र को भारतीय संविधान की मूल नींव बताया।युवाओं और भविष्य की तकनीक सोच देश के युवाओं को आगे आने और आधुनिकता तथा कंप्यूटर क्रांति के जरिए भारत को एक नई दिशा देने का आह्वान किया। लाल किले से सबसे युवा पीएम राजीव गांधी ने पहले ही भाषण में किया था ‘सत्ता के दलाल’ का इस्तेमाल. 15 अगस्त 1989 को उन्होंने ये ऐतिहासिक भाषण दिया था। उन्होंने कहा था कि भारत को हम टूटने नहीं देंगे। देश के लिए जान हाजिर है। हम कोई भी कुर्बानी के लिए तैयार हैं.
पूर्व प्रधानमंत्री पी.वी. नरसिम्हा राव का भाषण
और पूर्व प्रधानमंत्री पी.वी. नरसिम्हा राव का संबंध उनके प्रधानमंत्री कार्यकाल के दौरान लाल किले से दिए गए ऐतिहासिक स्वतंत्रता दिवस भाषणों से है। बाबरी मस्जिद विध्वंस और 1993 के मुंबई बम धमाकों के बाद, उन्होंने 15 अगस्त 1993 को लाल किले से देश को संबोधित करते हुए सामाजिक एकता और देश का ताना-बाना टूटने न देने का कड़ा संदेश दिया था।लाल किले से मुख्य संबोधन 15 अगस्त 1993 का भाषण:—–
बाबरी विध्वंस के बाद के तनावपूर्ण माहौल में देश की एकता और अखंडता पर जोर दिया।
आर्थिक सुधारों का जिक्र:—–
देश की कठिन आर्थिक स्थिति और उदारीकरण के फैसलों को मजबूती से सामने रखा।सुरक्षा और आतंकवाद:—–
पड़ोसी देश पाकिस्तान को लाल किले से कड़ी
चेतावनी दी।उदारीकरण के रास्ते खोलने वाले नरसिम्हा राव के सामने एक ऐसा गंभीर संकट आया कि वह मंदिर-मस्जिद के मामलों में उलझ गए.
देवगौड़ा जीके भाषण के प्रमुख अंश
अगस्त 1996 को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री एच.डी. देवगौड़ा ने भाषण में मुख्य रूप से भारतीय लोकतंत्र की मजबूती, आम न्यूनतम कार्यक्रम और सामाजिक न्याय पर जोर दिया।
सेनानियों को नमन: देश की आजादी के लिए किए गए लंबे संघर्ष और ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ से लेकर 1947 तक की ऐतिहासिक यात्रा के बलिदानों को याद किया।
राष्ट्रीय एकता और मूल्य: देश को मजबूत बनाए रखने के लिए आपसी एकता, भाईचारे और देशहित के मूल्यों को सर्वोपरि रखने की अपील की।
प्रधान मंत्री इन्द्र कुमार गुजराल के भाषण के प्रमुख अंश
15 अगस्त 1997 को भारत की आजादी की 50वीं वर्षगांठ पर लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री इंद्र कुमार गुजराल ने देश को संबोधित किया। उनके भाषण के मुख्य अंश विविधता में एकता पर जोर, गांधीवादी मूल्यों को अपनाना, और देश के आर्थिक विकास व युवाओं की शक्ति पर आधारित थे।
भाषण के मुख्य बिंदु विविधता और एकता: —-
भारत की ताकत उसकी अलग-अलग भाषाओं, संस्कृतियों और विचारों का सम्मान करने में है। देश में एकरूपता थोपने से राष्ट्रीय एकता खतरे में पड़ सकती है।
गांधीवादी मूल्य: महात्मा गांधी के सत्य और अहिंसा के मार्ग पर चलने तथा देश की मूल सभ्यता और संस्कृति से जुड़े रहने का आह्वान किया
युवा शक्ति:—-
देश के युवाओं की ऊर्जा और उत्साह को राष्ट्र निर्माण की सबसे बड़ी ताकत बताया।आर्थिक विकास: विकासशील देशों की तरक्की और गरीबी के खात्मे के लिए निरंतर आर्थिक सुधारों पर जोर दिया ।
अटल बिहारी वाजपेयी (1999)मुख्य अंश: —
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने लाल किले की प्राचीर से अपने स्वतंत्रता दिवस (विशेषकर 1998, 1999, 2001 और 2003) के संबोधनों में देश की सुरक्षा, शांति, और विकास पर जोर दिया।
विचार शांति और संवाद की पहल:—-
“हमें लड़ते-लड़ते 50 साल हो गए और कितना खून बहाना बाकी है? लड़ना है हम दोनों को गरीबी से, बेरोजगारी से !
“पड़ोसी देशों के साथ संबंध:—– आतंकवाद को हम समाप्त करके रहेंगे। देश की एकता और अखंडता पर आंच नहीं आने दी जाएगी
विकास और आत्मनिर्भरता:-—-“भारत अब रुकने वाला नहीं है। विज्ञान, तकनीक और हमारे मेहनतकश किसानों-युवाओं के दम पर देश नई ऊंचाइयों को छुएगा ! आज भारत विज्ञान, अंतरिक्ष, खेल, शिक्षा और तकनीकी के क्षेत्र में नई ऊंचाइयां छू रहा है। लेकिन देश की असली ताकत उसके युवा हैं।
कारगिल विजय के तुरंत बाद दिया गया यह भाषण देश के शौर्य और अजय विश्वास से भरा था।संदेश: भारत शांति चाहता है लेकिन राष्ट्र की सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
15 अगस्त को मनमोहन सिंह के भाषण
पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने अपने कार्यकाल (2004 से 2013) के दौरान 15 अगस्त को लाल किले से कुल 10 स्वतंत्रता दिवस भाषण दिए। इन भाषण में मुख्य रूप से गरीबी उन्मूलन, आर्थिक विकास, और राष्ट्रीय सुरक्षा पर जोर दिया गया।प्रमुख विषय और बिंदु आर्थिक वृद्धि और समावेशी विकास: देश की आर्थिक तरक्की, आम आदमी तक संसाधनों का लाभ पहुंचाने और कृषि व ग्रामीण विकास पर जोर।गरीबी और अज्ञानता से मुक्ति: देश को गरीबी, भूख, बीमारी और निरक्षरता से पूरी तरह मुक्त करने का संकल्प।धर्मनिरपेक्षता और एकता: संकीर्ण विचारधाराओं से ऊपर उठकर देश की एकता, अखंडता और धर्मनिरपेक्ष मूल्यों को मजबूत करने की अपील।वर्ष 2013 में लाल किले की प्राचीर से दिए गए उनके भाषण का एक अंश देखने के लिए:—
ने लाल किले से गिनाईं सरकार की उपलब्धियां, आज तक मनमोहन सिंह ने लाल किले से भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई का लिया था संकल्प
मनमोहन सिंह ने साल 2013 में लाल किले से अपने भाषण में भारत को “गरीबी, भूख, बीमारी और अज्ञानता” से मुक्त करने की बात कही. उन्होंने कहा कि देश पिछले 10 वर्षों से
ने लाल किले से गिनाईं सरकार की उपलब्धियां, अगस्त, 1947 को शुरू हुई हमारी यात्रा अब 65 साल पुरानी हो चुकी है। इन 65 वर्षों में हमने बहुत कुछ हासिल किया है।
नरेंद्र मोदी (2014 – वर्तमान)मुख्य अंश:—
“प्रधान सेवक” के रूप में शुरुआत, ‘स्वच्छ भारत अभियान’, ‘मेक इन इंडिया’, ‘पंच प्रण’, और 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का रोडमैप।
संदेश:—-
सबका साथ, सबका विकास, भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस, और स्वदेशी तकनीक पर बल।