बेटियों को न्याय की मांग को लेकर उपजा आंदोलन

Virodh pradarshanTrimohi ma akatrit Log-दिलीप बीदावत- थार के रेगिस्तान को चीरते हुए बनी भारत-पाक सीमा से सटे एक छोटे से गांव त्रिमोही ने इन दिनों पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। बाड़मेर जिले की गडरारोड़ तहसील के इस गांव की प्रतिभाशाली बेटी डेल्टा मेघवाल के साथ एक शिक्षण संस्थान के हॉस्टल में बलात्कार के बाद उसकी हत्या कर दिए जाने की घटना ने पूरे प्रदेश को आंदोलित कर दिया है। आंदोलन का मकसद देश में बेटियों की सुरक्षा और न्याय की मांग है। न्याय का गला घोंटने के लिए सक्रिय होने वाले धन और राजनीतिक रसूक वालों के हस्तक्षेप के विरोध का गुस्सा आंदोलन को ऊर्जा दे रहा है। डेल्टा की बलात्कार के बाद हत्या की घटना को आत्महत्या में तब्दील कर देने के राजनैतिक दबाव में जांच को प्रभावित करने की कवायद ने रेगिस्तान में दलित समाज को न केवल संगठित किया है बल्कि बेटियों की सुरक्षा और न्याय के हितैषी सभी वर्गों को भी लामबद्ध कर दिया।
डेल्टा की जीवनी और जीवन व सपनों का गला घौंट देने वाली घटना पर गौर फरमाएं तो दूर-दराज के सीमांत क्षेत्र के गांव त्रिमोही में मई 1999 में शिक्षक महेंद्र राम मेघवाल के घर में जन्मी इस बेटी ने गांव की राजीव गांधी पाठशाला में अपनी प्राथमिक शिक्षा प्राप्त की। बेटी में अपार प्रतिभा और उसके स्वयं के आगे बढ़ने के सपनों को भांप कर माता-पिता ने उसे पढ़ाने और आगे बढ़ाने का निश्चय किया। चित्रकला और पैंटिंग के लिए सम्मानित डेल्टा बीकानेर जिले के नोखा कस्बे में जैन आदर्श कन्या शिक्षक प्रशिक्षण संस्थान में बी.एस.टी.सी. का कोर्स कर रही थी। वर्ष 2006 में डेल्टा को उत्कृष्ट चित्रकारी के लिए गृह राज्य मंत्री अमराराम ने सम्मानित किया था। 26 जनवरी 2014 में डेल्टा को उसकी उत्कृष्ट पैंटिंग के लिए राज्य स्तरीय सम्मान मिला। 21000 रूपये के प्रोत्साहन साथ 11 जनवरी 2014 का मुख्य मंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया द्वारा लिखे गए पत्र ने पूरे क्षेत्र को गौरान्वित किया था। मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिधियां ने पत्र में डेल्टा को लिखा था कि उसकी पैंटिंग को सचिवालय की गैलेरी में स्थान मिला है, को पढ़कर उसके हौसलों को पंख लग गए थे। आज डेल्टा नहीं है। उसके परिजनों के पास बचा है मुख्यमंत्री द्वारा लिखा गया वह पत्र। सम्मान वाले छाया चित्र। प्रतिभा को दर्शाने वाली अंक तालिकाएं। डेल्टा के जीवन के कुछ प्रसंग। और आग में धू-धू जल कर राख हुई बेटी की यादें। उसके सपनों को मसल कर मिट्टी में मिलाने वालों के प्रति गुस्सा। अपराधियों को बचाने वालों की कौशिशों के बीच न्याय मिलने की चिंता।
डेल्टा के इस शिक्षण संस्थान में एस.टी.सी. का द्वितीय और अंतिम वर्ष का कोर्स था। चित्रकारी में रंगों का संसार रचने वाली यह प्रतिभा रंगों के त्योहार होली की छुट्टियां बिताने घर गई थी। 28 मार्च को छुट्यिां समाप्त होने के बाद पिता मानोहर लाल बेटी को हॉस्टल छोड़कर गए थे। पिता को इस बात का आभास भी नहीं था कि अगले ही दिन उन्हें बेटी की लाश को लेकर जाना होगा। पिता बेटी को हॉस्टल में छोड़ कर घर पहुंचे ही थे कि डेल्टा का फोन आया। पापा मुझे यहां से वापस ले जाओ। मुझे डर लग रहा है। मुझे लग रहा है कि मेरे साथ कुछ बुरा घटित होगा। पिता ने कहा में कल आकर ले जाउंगा। 29 मार्च को प्रातः डेल्टा की लाश हॉस्टल के टांके में मिली। उसके साथ बलात्कार के बाद हत्या कर लाश को पानी के कुंड में डाल दिया गया, ताकि इसे आत्महत्या करार दिया जा सके।
डेल्टा मेघवाल की हत्या का एक पहलु है कि बीकानेर जिले की नोखा तहसील में ईश्वर चंद वैद द्वारा संचालित जैन आदर्श शिक्षक प्रशिक्षण संस्थान नोखा की वार्डन प्रिया शुक्ला के सहयोग से शारीरिक शिक्षक विजेंद्र सिंह द्वारा संस्थान के हॉस्टल में बलात्कार के बाद हत्या कर दिया जाना। हत्या के बाद उसकी लाश को पानी के अंडर ग्राउंड टैंक में डाल देना। लेकिन इसका दूसरा पक्ष है डेल्टा का दलित समाज से होना। दलित समाज से एक महिला का होना। और अपराधियों का तथाकथित उच्च जातीय और रसूकदार होना। दलित समाज की बेटी का प्रतिभाशाली होना तो उच्चवर्गीय समुदाय की आंख की किरकिरी था ही, लेकिन दलित समुदाय की लड़कियों और महिलाओं के साथ अत्याचार कर कानून से बरी होकर निकलने की फीलिंग अपराधी वर्ग के हौसले को बढ़ती है। ऐसी ही कोशिश की जा रही है डेल्टा मेघवाल के साथ घटित हुई घटना के बाद। हॉस्टल के टांके से बॉडी निकाल पोस्टमार्टम के लिए उसे नगर पालिका की कचरा ढोने वाली ट्रेक्टर ट्रोली में ले जाए जाने को लेकर भी लोगों में गुस्सा है। यह राजकीय भेदभाव का परिचय है, जो दिखता नहीं है। अपराधियों को बचाने की कोशिशें की जा रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट जारी करने वाले डॉक्टरों से पुलिस ने रिऑपिनियन देने को कहा तो डॉक्टरों ने कहा, डेल्टा की मौत पानी में डूबने से भी हो सकती है।
परिजनों की ओर से दर्ज एफआईआर के अनुसार पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की धारा 302, 376 (ग), 201, 34 व एससी / एसटी एक्ट 3 (1)(12), पॉक्सो एक्ट की धारा 5,6 के तहत मामला दर्ज किया। परिजनों ने अपराधियों को गिरफ्तार करने की मांग को लेकर लाश नहीं उठाने के निर्णय को समझाइश व आश्वासन के बाद बदल दिया गया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में पानी में डूबने से मौत नहीं होना पाया गया। इसी बीच दलित अधिकार अभियान पश्चिमी राजस्थान के कार्यकर्ता व दलित एक्टिविस्ट तोलाराम चौहान की पहल पर घटना ने आंदोलन का रूप लिया। दलित समाज के साथ होने वाले अन्याय और अत्याचार को लेकर पैरवी करने वाले संगठन सक्रिय हुए। समाज के अन्य वर्गों का सहयोग मिला। गडरा रोड़ सहित कई कस्बों और शहरों में बंद का विरोध प्रदर्शन, कैंडल मार्च हुए। विपक्षी दलों के नेताओं ने दौरे किए। लेकिन सत्तापक्ष का कोई जिम्मेदार नेता परिजनों से मिलने नहीं गया। जिला प्रशासन ने भी परिजनों से संपर्क करना जरूरी नहीं समझा।
सभी संगठन और दलित एक्टिविस्ट एवं न्याय प्रिय लोगों ने संघर्ष समिति का गठन किया है। संघर्ष समिति का प्रतिनिधि मंडल चार अप्रेल को क्षेत्र के विधायकों को साथ लेकर मुख्यमंत्री से मिले एवं इस घटना की सीबीआई जांच की मांगी की। हमीर सिंह भायल विधायक सिवाना, तरूण राय कागा विधायक चौहटन, जालम सिंह पूर्व विधायक शिव के सहयोग से कमेटी के लोगों को मुख्यमंत्री ने तरजीह नहीं दी। गृहमंत्री गुलाब चंद कटारिया ने न्याय दिलाने का अश्वासन दिया। प्रदेश के एक हजार से अधिक संगठनों ने अपने स्तर पर प्रदर्शन कर न्याय की मांग की। घटना की जांच किस तरफ घूमती है और पीड़िता के परिजनों को न्याय मिलता है या नहीं यह तो आने वाला समय ही बताएगा। लेकिन इस घटना ने यह बता दिया कि प्रदेश भर में चलने वाली शिक्षण संस्थानों, छात्रावासों में बेटियां सुरक्षित नहीं है। निगरानी और मानदंडों के अभाव में अनियंत्रित संस्थानों में आए दिन लड़कियों के साथ ऐसी घटनाएं सामने आती रहती है। कुछ मामले कानून की चौखट तक पहुंचते हैं तो कुछ सामाजिक मान-मर्यादा के नाम पर दबा दिए जाते हैं। कुछ मामलों में अपराधी रसूकदार लोगों और राजनैतिक प्रभाव की कृपा से बचा लिए जाते हैं। और इसका अंत डेल्टा के पिता मनोहर लाल, जो स्वयं एक शिक्षक है, लड़कियों को पढ़ाने के लिए लोगों को प्रेरित करते रहे हैं, के इन शब्दों से होता है कि ’’बेटियों को कोई मत पढ़ाना।’’

दिलीप बीदावत
112, इंदिरा कॉलोनी, बीकानेर
संपर्क: 9460000150
e-mail : [email protected]

1 thought on “बेटियों को न्याय की मांग को लेकर उपजा आंदोलन”

  1. आद्र्निय सम्पदक जि
    बहुत धन्योवद आप्न मुद्द को उजगर किय

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