बीकानेर,0 7अक्टूबर 2017 । मानसिक स्वास्थ्य के प्रति कार्यस्थल पर भी जागरूकता जरूरी है। कार्य स्थल पर मानसिक स्वास्थ्य विषयक थीम पर ही इस वर्ष
विश्व मानसिक रोग सप्ताह मनाया जा रहा है। यह कहा डॉ के के वर्मा ने। वरिष्ठ आचार्य एवं विभागाध्यक्ष; मानसिक रोग एवं नशा मुक्ति विभाग; स प आयुर्विज्ञान महाविद्यालय एवं संबद्ध चिकित्सालय; पीबीएम बीकानेर डॉ के के वर्मा ने अपने कक्ष के सेमिनार हॉल में आयोजित प्रेस कान्फ्रेन्स में यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि थीम के अनुसार सप्ताह में विभिन्न क्षेत्र के कार्यस्थलों पर जाकर मनोरोग चिकित्सकों का दल वहां के कर्मचारियों की विषयसंगत समस्याएं जानेगा व निवारण के उपाय बताए जाएंगे। 8/10/17 को सुबह 11 बजे मीडियाकर्मियों से; 9/10 को सुबह 7:30 बजे पुलिस विभाग में आयोजन होगा। प्रदर्शनी 10/10 को सुबह 6 बजे वरिष्ठ नागरिक भ्रमण पथ पर तथा दोपहर में साढ़े तीन बजे वायुसेना विभाग में कर्मचारियों से सेमिनार में मानसिक स्वास्थ्य पर व 11/10 को बीएसएफ; 12/10 को चिकित्साकर्मियों से एवं 13/10/17 को रेलकर्मियों से बातचीत प्रस्तावित है। एक सवाल के जवाब में डॉ वर्मा का कहना था कि मानसिक रोग को जादूटोना व देवी प्रकोप नहीं मानकर मनोरोग चिकित्सक से नियमित इलाज करवाना चाहिए। मनोरोग पर लंबे इलाज के बाद नियंत्रण होता है। इसलिए रोगी व उसके परिजन धैर्य से पूर्ण इलाज करवाएं। इससे पूर्व शिव किसन मींडाराम दम्माणी मनोरोग चिकित्यालय में डॉ के के वर्मा ने सप्ताह का उद्धाटन किया। किया। इस अवसर पर संगोष्ठी हॉल में पोस्टर बनाओ प्रतियोगिता हुई जिसमें बड़ी संख्या में नर्सिंग स्टूडेंट ने थीम पर पोस्टर बनाए।
डॉ वर्मा ने वर्ष 1987 में बनाए मैन्टल हैल्थ एक्ट की जानकारी देते बताया कि यह एक्ट मानसिक रोग से पीड़ित रोगी को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि मानसिक रोग के प्रति कई तरह की भ्रांतियां बनी है कि यह रोग ठीक नहीं हो सकता है। लोग जादू-टोना पर विश्वास करते है और रोगी को चिकित्सक से उपचार नहीं करवाते है। उनका मानना है कि रोगी पर ऊपर की छाया है। वैज्ञानिक युग में ऎसी सोच रहते ,मानसिक रोगी को सामाजिक तौर पर वैधानिक अधिकार देने की दृष्टि से यह जो एक्ट आया है,इसमें सभी प्रकार के प्रावधान रखे गए है। प्रेसवार्ता में डॉ अनंत कुमार सहित विभाग के चिकिस्क/स्टाफ मौजूद रहे।
– मोहन थानवी