नोटबंदी केंद्र सरकार का एक जनविरोधी फैसला था

08 Nov- 1अजमेर 8 नवम्बर। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सचिव एवं राजस्थान प्रभारी विवेक बंसल ने कहा कि नोटबंदी केंद्र सरकार का एक जनविरोधी फैसला था। जिसे कुछ लोगों को लाभ पहुंचाने के लिए लागू किया गया था। नोटबंदी के निर्णय से देश के विकास पर विपरीत असर पड़ा है। देश की विकास दर दो प्रतिशत तक कम हो गई है। इसके एक वर्ष पूरे होने पर कांग्रेस का विरोध प्रदर्शन देष की जनता की आवाज है जो आज तक इससे उबर नहीं पाई है। जब सड़कों पर लोगों का जन सैलाब इस तरह उमड़ेगा, तब भाजपा सरकार की नींद उड़ जाएगी।
बंसल अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के राष्ट्रव्यापि आव्हान के तहत जिला कांग्रेस कमेटी की ओर से बुधवार नोटबंदी लागू करने का एक वर्ष पूर्ण होने पर काला दिवस के रूप में मनाने और जिला मुख्यालय पर रैली और विरोध प्रदर्शन के बाद मदार गेट पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं और जनता को सम्बोधित कर रहे थे। उन्होने कहा कि एक लोकतान्त्रिक सरकार द्वारा बिना किसी पर्याप्त तैयारी के इस तरह से व्यापक रूप से जनता और देश की अर्थव्यवस्था को प्रभावित करने वाला फैसला लेना दुर्भाग्यपूर्ण है। मोदी सरकार के लिए नोटबंदी के नाकामियों से पीछा छुड़ाना आसान नहीं है उन्हें राजनीतिक और आर्थिक दोनों मोर्चो पर सरकार को जवाब देना पड़ेगा और उन्हे देष की जनता को जवाब देना चाहिये देष के कई चैराहों पर जनता मोदी को तलाष रही है।
उन्होने कहा कि पिछले साल अमित शाह ने चुनाव के दौरान नरेंद्र मोदी के काला धन वापस लाने के बाद हर परिवार के खाते में 15-15 लाख रूपए जमा करने की बात को “चुनावी जुमला” बता दिया था। जब नोटबंदी की घोषणा की गयी थी उस समय देश में 500 व 1000 रुपये के नोट चलन में थे, उसका मूल्य 15.50 लाख करोड़ रूपयों था जिसमें से लगभग 14 लाख करोड़ की राशि के नोट बैंकों में जमा किया जा चुके हैं तो प्रधानमंत्री बताऐं कि वो कालाधन कहां गया जो वह नोट ब्रदी के बदले तलाष रहे थे।
रैली को सम्बोधित करते हुऐ शहर कोग्रस अध्यक्ष विजय जैन ने कहा कि जनता का ध्यान महंगाई, बेरोजगारी व सरकार की विफलता से हटा कर दूसरे ओर ले जाने के लिए नोटबंदी का फैसला किया गया था मगर एक साल बाद भी देश की जनता, व्यापारी, गरीब वर्ग प्रधानमंत्री मोदी के इस आर्थिक आपातकाल से त्रस्त है। नोटबंदी को एक वर्ष पूरा हो चुका है परन्तु ना तो काले धन पर नकेल लगी और नई मुद्रा में नकली नोट अर्थव्यवस्था का हिस्सा बन चुके है और नोटबंदी के दौरान आतंकवादियों के पास भी 2000 रुपये के नए नोट मिले हैं। मोदी ने यह भी दावा किया था कि नोटबंदी के बाद भ्रष्टाचार पर अंकुश लगेगा और लेन-देन डिजीटल हो जाएगा, परन्तु देश में भ्रष्टाचार के आयाम स्थापित हो रहे है और भाजपा शासित राज्यों में भ्रष्टाचार को संस्थागत करने और भ्रष्टाचारियों को संरक्षण दिए जाने के लिए कानून तक बनाने के प्रयास तत्परता से जारी है।
देहात अध्यक्ष भूपेन्द्र सिंह राठौड़ ने कहा कि बैंकों व एटीएम के बाहर आमजनता ने घण्टों से दिनों तक भूखे-प्यासे खड़े रहकर अपनी गाढ़ी कमाई के नोटों को बदलवाने के लिए संघर्ष किया और इस दौरान लगभग 100 से ज्यादा लोग बेमौत मारे गए। नोटबंदी के इस फैसले ने देश की अर्थव्यवस्था को गहरा आघात पहुँचाया है। देश के पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने संसद में कहा था कि ‘‘इस फैसले से देश की विकास दर दो प्रतिशत तक गिर जाएगी’’ पूरी तरह से सही साबित हुआ है। सरकार के इस फैसले से लघु व मध्यम उद्योग बंद हो गए है, बेरोजगारी बढ़ी है और कृषि पर भी विपरीत प्रभाव पड़ा है।
इससे पूर्व कांग्रेस कार्यकर्ता सैकड़ों की तादाद में गांधी भवन पर पर इकट्ठा हुए और अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सचिव विवेक बंसल शहर कांग्रेस अध्यक्ष विजय जैन देहात कांग्रेस अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह राठौड़ के संयुक्त नेतृत्व में नोटबंदी के विरोध में सरकार विरोधी नारे लगाते हुए हाथों में विरोध की तख्तियां लिए हुए रैली के रूप में गांधी भवन से रवाना हुए रैली शहीद स्मारक, क्लॉक टावर थाना, पड़ाव, प्लाजा रोड, न्यू मजिस्टिक रोड, कवंडसपुरा होते हुए मदार गेट पहुंचकर सभा में परिवर्तित हो गई रैली में कांग्रेस कार्यकर्ता केंद्र की भाजपा सरकार के विरुद्ध जबरदस्त नारेबाजी करते हुए चल रहे थे कांग्रेसियों के उत्साह एवं जबरदस्त गुस्से के मद्देनजर पुलिस प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद था बड़ी तादाद में पुलिसकर्मी रैली में चल रहे थे।
जहां रैली को पूर्व सांसद प्रभा ठाकुर, प्रदेष कांग्रेस उपाध्यक्ष एवं अजमेर प्रभारी प्रमोद जैन भाया सचिव सुनिल पारवानी, सुरेष मिश्रा, सुरज्ञान सिह घोसल्या, गंगा देवी, महेंद्र सिंह रलावता, विधायक राम नारायण गुर्जर, डा. गोपाल बोहेती, ललित भाटी, कमल बाकोलिया, हेमंत भाटी, नाथूराम सिनोदिया, हाजी कयुम खान रामस्वरूप चैधरी, ब्रह्मदेव कुमावत, सचिन सांखला आदी ने सम्बोधित किया।
रैली में प्रमुख रूप से कुलदीप कपूर, फकरे मोइन, विष्णु माथुर, प्रमिला कोशिक, प्रताप यादव, अमोलक छाबड़ा, गुलाम मुस्तफा, बलराम शर्मा, गिरधर तेजवानी, विजय नागौरा विपिन बैसिल, मुजफ्फर भारती, अंकुर त्यागी, श्याम प्रजापति, ललित भटनागर, नौरत गुर्जर, सुकेश काकरिया, आरिफ हूसैन, महेश ओझा, फिरोज खान, अषोक बिंदल, शैलेंद्र अग्रवाल, सबा खान, महेश चैहान, प्रियदर्शी भटनागर, मयंक टंडन, रश्मि हिंगोरानी, दयानंद चतुर्वेदी, नवीन सोनी, अतुल महेश्वरी, अब्दुल रशीद, राजकुमार पाण्डया, सोनल मोर्य, मंजू बलाई, रवि शर्मा महेश हांकला, लोकेश शर्मा, यासीर चिश्ती, सागर मीणा, दीनदयाल शर्मा, महेंद्र जोधा, राकेश धाबाई, रागिनी चतुर्वेदी, संजय जैन, राजनारायण आसोपा, राजेन्द्र नरचल, मंजू सोनी, राजकुमार वर्मा, अभिलाषा बिश्नोई, महेश भाटी, निमेष चैहान, राजकुमार कलवानी, राकेश चैहान, सुरेश्वर शैली, बालमुकुंद टांक, मुनीर तंबोली, मनोज कंजर, समीर शर्मा, लक्ष्मी धोलखेड़िया, सर्वेश पारीक, कैलाश कोमल, द्रोपदी कोली, ललित वर्मा, चंदन सिंह, मनीष शर्मा, मनोज खंडेलवाल, निर्मल बैरवाल, धीरज यादव, दीपक धानका, दिलिप सामनानी, बाबर खान, अरुणा कच्छावा, मनोज कोटिया, मामराज सेन, मनीष सेठी, देशराज मेहरा, नीरज यादव, चंद्रप्रकाश बालोटिया, महेंद्र धानका, हेमंत ठोमरे, अतुल अग्रवाल, वेद चैधरी, दिनेश के शर्मा, हनीश मारोठिया, उमेश शर्मा, हरीश हिंगोरानी,इशवर राजोरिया, अशोक सुकरिया, अनिल कशयप, मनोज भाटी, राजकुमार बाकोलिया, मनीष सेन, अंकित मालवी, ईशवर टहलयानी, गिरिजा यादव ,राजकुमार गर्ग, त्रृषिराज, मनीष चैरासिया, दिलिप यादव सहित सैंकड़ों की तादात में कांग्रेसजन मौजूद थे।

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