जिस युवा का नाम शुरुआती दौर में ही देश के आमचुनाव के लिए चले, उस युवा की काबिलियत क्या होगी ? सागर शर्मा काबिल युवा हैं, जिले के युवा उसे पसंद कर रहे हैं, अपना नेता मान रहे है। सोशल मीडिया, प्रिंट, इलेक्ट्रोनिक और गरीब के चुल्हे से लेकर अमीरों के ऑफिस तक जिस युवा का नाम सिर्फ इसलिए चले की वो विकास, सद्भाव और आमजन हिताय की बात करता है। जो अजमेर जिले के युवाओं के हक के लिए आवाज उठाता हो, जिसे गरीब की परेशानियां पता हो, जो उन्हें दूर करने के लिए जयपुर शहर की मेट्रो लाइफ को छोड़कर गांव-मजरों में लगातार घूमें, जो सिंगापुर से पढ़ाई करने के बाद भारी-भरकम तनख़्वाह वाली नौकरी सिर्फ इसलिए छोड़ दे ताकि गांव-मजरों में जाकर आमजन को वक्त दे सके, उनकी पीड़ा सुन उसे दूर कर सके। उसकी सोच का अंदाजा लगाया जा सकता है ? बात नेता पुत्र की नहीं, बात काबिल युवा नेतृत्व की हो और जिले के युवा जानते हैं किसके हाथों में नेतृत्व देना है। इसलिए युवा नेतृत्व पर किसी को क्यों दिक्कत होनी चाहिए ?
*मंत्री डॉक्टर रघु शर्मा को मेहनत ने पहुंचाया इस मुकाम पर*
यदि मेहनत के बाद मिले परिणाम पर छप्पर फटे या कुछ ओर हो ? ये कोई परेशानी का सबब नहीं! डाॅक्टर रघु शर्मा ने हारते-जीतते, मेहनत, प्रयासों और बिना गाॅडफादर यहां तक का सफर तय किया है। अब इतने संघर्ष के बाद केबिनेट मंत्री बनना अपने को नहीं लगता छप्पर फटने जैसा है। डाॅक्टर रघु शर्मा मनोनित नेता नहीं बल्कि, लाखों लोगों के प्रतिनिधी है। जिन्हें आवाम ने दिलो-जान से एक ही साल में दुआओं से मालामाल किया है। अब आवाम की दुआएं किसी को कामयाबी के शिखर पर पहुंचा दे तो उसका कोई क्या करे ?
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*एम. इमरान टांक*
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