बाजार में नकली ऑक्सीमीटर बिक रहे हैं धड़ल्ले से, प्रशासन का इस ओर ध्यान नहीं

केकड़ी 26 मई(पवन राठी)
पिछले दिनों से कोरोना के बढ़ते संक्रमण के बीच प्लस ऑक्सीमीटर की मांग भी बढ़ गई है। पहले ऑक्सीमीटर सिर्फ अस्पताल की डिवाइस के रूप में जाना जाता था लेकिन अब यह घर का एक जरूरी गैजेट हो गया है। बाजार में तमाम तरह के ऑक्सीमीटर बिक रहे हैं। बाजार में बिक रहे ऑक्सीमीटर को लोग हाथों-हाथ खरीद रहे हैं लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि इस वक्त बाजार में ढेर सारे नकली ऑक्सीमीटर आ गए हैं जिन्हें खरीदकर इस्तेमाल करना आपके लिए खतरनाक हो सकता है। बाजार में मेड इन चायना ऑक्सीमीटर सस्ते दाम में मिल रहे हैं और लोग बिना सोचे समझे नकली ऑक्सीमीटर खरीद रहे हैं। ऑक्सीमीटर खरीदते समय आपको कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना चाहिए। ऑक्सीमीटर का काम ब्लड ऑक्सीजन के बारे में जानकारी देना है। कोरोना महामारी के बीच बाजार में नकली ऑक्सीमीटर भी आ गए हैं। ये मीटर निर्जीव चीजों जैसे कि पेन, पेंसिल का भी ऑक्सीजन लेवल बता रहे हैं। पेन-पेंसिल, टूथब्रश या अन्य कोई भी वस्तु का भी आक्सीजन लेवल बता रहे नकली पल्स ऑक्सीमीटर, कोरोना मरीजों की ज़िंदगी से खिलवाड़ कर रहे हैं। कोरोना की महामारी में बीमारी की गंभीरता का अंदाजा लगाने का सबसे बड़ा हथियार पल्स ऑक्सीमीटर है। इसके ज़रिये आक्सीजन की मात्रा की जानकारी लेकर कोरोना की गंभीरता का पता लगाया जाता है। हालांकि कुछ मुनाफाखोरों ने कोरोना की आपदा को भी अवसर में बदलते हुए बाज़ार में नकली पल्स ऑक्सीमीटर उतार दिए हैं। कोई बाज़ार में पूरी तरह नकली पल्स ऑक्सीमीटर बेच रहा है तो कोई मानकों की अनदेखी कर इतनी घटिया क्वालिटी का, जिसके ज़रिये सामने आने वाली रीडिंग का कोई मतलब नहीं होता। उल्लेखनीय है कि पल्स ऑक्सीमीटर उंगली को कुछ देर उपकरण में रखने के बाद खून और फेफड़े में आक्सीजन की मात्रा के बारे में बताता है, जबकि नकली व घटिया क्वालिटी वाला उपकरण उंगली की जगह पेन -कागज़, टूथब्रश या उंगली जैसी कुछ भी वस्तु रखने पर कोई एक रीडिंग शो कर देता है, यानि कोई रीडिंग देखकर आप अपनी सेहत को लेकर संतुष्ट तो हो सकते हैं, लेकिन यह फर्जी और गलत रीडिंग आपकी ज़िंदगी को खतरे में डाल सकता है। नकली और घटिया क्वालिटी के पल्स ऑक्सीमीटर का इस्तेमाल करने वाले कोरोना मरीजों को अपनी बीमारी की गंभीरता का अंदाजा तब ही हो पाता है, जब तबीयत ज़्यादा बिगड़ जाती है। कई बार तो हालात इतने बदतर हो जाते हैं कि बीमारी बेकाबू होकर डॉक्टर्स के लिए भी चुनौती बन जाती है। सरकारी अमले को इस गोरखधंधे के बारे में पता तो है, लेकिन वह सब कुछ जानते हुए भी मौत के इस खेल से अंजान बना हुआ है। न तो कहीं छापेमारी की जा रही है और न ही इन मिटर्स की टेस्टिंग हो रही है। नकली ऑक्सीमीटर का यह खेल इन दिनों गांवों व कस्बों इलाकों में ज़्यादा हो रहा है। गांवों व देहात क्षेत्र में कोरोना के मरीज शहरों से अधिक आ रहे हैं ऐसे में यह गोरख धंधा शहरों से अधिक गांवों और कस्बों में पनप रहा है। ब्रांडेड कंपनियों का पल्स ऑक्सीमीटर बारह सौ रूपये से लेकर दो हज़ार रूपये के बीच का है, लेकिन पूरी तरह नकली यह उपकरण महज़ तीन सौ से पांच सौ रूपये में मिल रहा है, जबकि मानक की अनदेखी कर घटिया क्वालिटी वाला पल्स ऑक्सीमीटर पांच सौ से सात सौ रुपए में मिल रहा है। दरअसल, पल्स ऑक्सीमीटर किसी भी व्यक्ति के खून में आक्सीजन का लेवल बताता है। यह एक तरीके की इलेक्ट्रानिक डिवाइस होती है, जिसके जरिये फेफड़ों के सही काम करने का भी अंदाजा खून में आक्सीजन का लेवल देखकर लगाया जाता है। अगर किसी कोरोना पॉजिटिव के शरीर में आक्सीजन का लेवल सही है तो वह होम आइसोलेशन में रह सकता है और उसकी ज़िंदगी को कोई खतरा नहीं होता, लेकिन अगर बीमारी ने फेफड़े पर अपनी पकड़ बना ली है तो उसका असर सांस लेने पर पड़ता है और आक्सीजन लेवल तेजी से गिरने लगता है। इसके बाद मरीज को आईसीयू में वेंटिलेटर पर रखा जाता है। उसे ऑक्सीजन दिया जाता है। विशेषज्ञों के मुताबिक़ आक्सीजन लेवल 88 फीसदी से कतई कम नहीं होना चाहिए। यह जितना नीचे जाता है, मरीज के लिए खतरा उतना ही बढ़ता जाता है। उनके मुताबिक़ 90 फीसदी से ज़्यादा का आक्सीजन लेवल बेहतर माना जाता है। पल्स ऑक्सीमीटर में हाथ की किसी भी उंगली को रखा जाता है। उंगली के ज़रिये ही यह डिवाइस आक्सीजन की मात्रा बता देती है। नकली पल्स ऑक्सीमीटर हूबहू असली जैसा दिखता है। इसमें तीन से चार नम्बर्स की रीडिंग ऑटो फीड कर दी जाती है। नकली डिवाइस में आप उंगली रखें या फिर उंगली की तरह दिखने वाले पेन-पेंसिल, टूथ ब्रश- या अन्य कुछ भी। यह फ़ौरन पहले से फीड कोई रीडिंग बता देगा। इसमें जो तीन चार रीडिंग फीड की जाती है, वह ऐसी होती है, जो किसी सामान्य स्वस्थ व्यक्ति में होती है यानि 94-95 और 96 या 97 मरीज़ इन रीडिंग को देखकर खुश होता रहता है और खुद को ठीक समझता है। आपको बता दें कि सही पल्स ऑक्सीमीटर में पेन-पेंसिल और टूथब्रश तो छोड़िये अगर उंगली सही जगह पर ठीक से नहीं रखी गई तो डिवाइस कोई रीडिंग देने के बजाय फिंगर आउट लिखकर डिस्प्ले देने लगता है। घटिया क्वालिटी वाले पल्स ऑक्सीमीटर में भी यही होता है। वह कभी सही काम करता है तो कभी गलत। वह भी उंगली के बजाय दूसरे सामानों पेन -पेंसिल का भी कई बार आक्सीजन लेवल बता देता है यानि घटिया क्वालिटी वाला जो पल्स ऑक्सीमीटर टूथब्रश -चाभी और पेन-पेंसिल का आक्सीजन लेवल बता सकता है, उस पर महामारी के दौर में भरोसा कैसे किया जा सकता है। बाजार में हर कहीं मिल रहे मेड इन चायना प्लस ऑक्सीमीटर की बिक्री से दवा व्यापारी भी परेशान हैं। उनका कहना है कि आम तौर पर दवा कारोबारी तो इससे परहेज करते हैं, लेकिन जनरल स्टोर या गांव-देहात के झोलाछापों के ज़रिये ये जानलेवा पल्स ऑक्सीमीटर धड़ल्ले से बिक रहे हैं। इससे जहां कारोबारियों को आर्थिक नुकसान होता है तो वहीं मरीजों की ज़िंदगी खतरे में पड़ जाती है।

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