
प्रश्र था जीवन अस्त व्यस्त हो गया है। कार्य की जटिलताएं बढ़ती ही जा रही है तो रामकृष्ण जी ने कहा समय की सही उपयोगिता व उत्पादकता ही आपको मुक्त कर सकती है। तुमको तय करना होगा कि मेरे अनुकल श्रेष्ठ कर्म क्या है। प्रश्र था जीवन अब जटिल क्यों हो गया है? रामकृष्ण जी ने कहा जीवन का विश्लेषण करना बंद करो यह इसे जटिल बना देता है। इसे जीना प्रारंभ करो। प्रश्र था फिर हम सदा दुखी क्यों रहते है ? जबाब था चिंता करना आपकी आदत बन गई है। इसलिए आप खुश नहीं हैं। प्रश्र था अच्छे लोग हमेशा कष्ट क्यों झेलते हैं ? जबाब था कष्ट उनको उनकी शुद्धता दिलाने के लिए मिलता है जैसे सोने को आग में ही जलाकर ही शुद्ध किया जा सकता है। अच्छे लोग परीक्षाओं से गुजरते हैं, लेकिन पीडि़त नहीं होते। उस अनुभव से उनका जीवन कड़वा नहीं बल्कि बेहतर बनता है। अनुभव एक कठिन शिक्षक है। वह पहले परीक्षा लेता है और सबक बाद में देता हैे। प्रश्र था क्या असफलता सही दिशा में बढऩे से ज्यादा दुख देती है? जबाब था सफलता एक ऐसा उपाय है जो दूसरों द्वारा तय किया जाता है। संतुष्टि एक उपाय है जिसे आपको तय करना है। प्रश्र था कि कठिन समय में अपने आपको कैसे उत्साह से भरे? रामकृष्ण जी ने कहा जीवन में हमेशा देखें कि आप कितनी दूर आए हैं, न कि आपको कितनी दूर जाना है। हमेशा अपने को प्राप्त आशीर्वाद गिनें, न कि वह जो आप खो रहे हैं। अधिकांश जब समृद्ध होते हैं, तो वे कभी नहीं पूछते मैं ही क्यों? प्रश्र था तो फिर जीवन से सर्वश्रेष्ठ कैसे प्राप्त कर सकते हैं? रामकृष्ण जी कहा बिना पछतावे के अपने अतीत का सामना करें। अपने वर्तमान को आत्मविश्वास के साथ संभालें। बिना किसी डर के भविष्य की तैयारी करें। लेकिन आचार्य कभी-कभी मुझे लगता है कि मेरी प्रार्थनाओं का उत्तर नहीं मिलता। रामकृष्ण जी ने मुस्कराते हुए जबाब दिया कोई अनुत्तरित प्रार्थना नहीं है। विश्वास रखो और भय को छोड़ दो। जीवन अद्भुत है यदि आप जीना जानते हैं। संकट में धैर्य का धारण कर लेना ही समाधान है।
DINESH K.GARG ( POSITIVITY ENVOYER)
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