सूफी फकीर की डायरी (1)

दिल में कसक हो तो फकीरी मिलती है

शिव शर्मा
आम के एक बगीचे में एक आदमी काम कर रहा था! क्यारी में पौधों को ठीक कर रहा था! उसी बगीचे में एक लड़का निशाना लगाकर आम तोड़ रहा था! आदमी उसके पास जाकर खड़ा हो गया! लड़का उसे देखने लगा! उस आदमी ने पेड़ की डालियों पर नजर टिकाई और आम गिरने लगे! लड़का बोला कि मैंने तो कुछ नहीं किया, यह आम कैसे गिर गए! आदमी बोला–” तेरे लिए रब ने गिरा दिए !”
बस इस एक ही वाक्य से शक्तिपात हो गया! गुरु की नजर उसके दिल में उतर गई! लड़का उसके कदमों में गिर कर बोला कि मुझे भी रब से मिला दे! इस एक ही वाक्य में लड़के के भीतर की सारी रूहानी कसक बाहर आ गई! आदमी हंस दिया और कहा कि तू इबादत को आगे और अपने मन को पीछे कर दे! अपने मन को दुनिया से समेट कर अपने ही रब में उतार दे ! तेरी रूह में ही तेरा रब है!रब से मिलने का यही रास्ता है!
फकीर इतना सरल होता है और मुरीद में भी इतनी कसक होनी चाहिए! लड़का था बुल्ले शाह और आदमी था इनायत शाह! उस दिन आम के बगीचे में जो फकीरी मुस्कुराई वह इतिहास बन गई!
सूफी यानी मन कर्म वचन की शुद्धि! रूहानी कसक! रूहानी जिंदगी! रूहानी करुणा और रूहानी बंदगी!

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