आज दिगम्बर जैन समाज ने सभी मंदिरों मैं जाकर सुंगध दशमी का पर्व मनाया आज दसलक्षण धर्म के सातवें दिवसपर सुबह मंदिरों मैं उत्तम तप धर्म की पूजा भी बड़े भक्ति भाव पूर्वक आयोजित कि गयी। पंचायत गोधा का धड़ा नसिया मैं इस अवसर पर शांति धारा मुकेश प्रमोद सुनील ललित विजय पांड्या परिवार के द्वारा की गई तथा रजत अष्ट प्रातिहार्य भेंट किये गए।
वैशाली नगर पेट्रोल पंप के पास रिषभायत्न जैन मंदिर जी मैं सुबह पूजा के बाद उपस्तिथ श्रावक श्राविका आदि को पण्डित सुनील धवल भोपाल ने बताया कि
इच्छाओं का निरोध,अभाव,नाश करना, तप है। वह तप जब आत्मा के श्रद्धान (सम्यग्दर्शन) सहित/पूर्वक होता है, तब ‘उत्तम तप धर्म’ कहलाता है।प्रत्येक दशा में तप को महत्त्वपूर्ण माना है। जिस प्रकार, स्वर्ण (सोना) अग्नि में तपाए जाने पर अपने शुद्ध स्वरूप में प्रगट होता है; उसी प्रकार, आत्मा स्वयं को तप-रूपी अग्नि में तपाकर अपने शुद्ध स्वरूप में प्रगट होता है।मात्र देह की क्रिया का नाम तप नहीं है अपितु आत्मा में उत्तरोत्तर लीनता ही वास्तविक ‘निश्चय तप’ है। ये बाह्य तप तो उसके साथ होने से ‘व्यवहार तप’ नाम पा जाते हैं।तप की महिमा इतनी है, “कि सुरराज (इंद्र) भी इसको करने के लिए लालायित रहते हैं क्योंकि यह कर्म-रूपी शिखर (पर्वत) को तोड़ने के लिए वज्र के समान है । इस अवसर पर मनमोहन जी पाटनी मनोज कासलीवाल सुरेश गदिया प्रसन्न जी बाकलीवाल विजय पांड्या गट्टी जी पारसजी प्रमोद गंगवाल प्रमोद लुहाड़िया शेखर चर्चित, पद्म कासलीवाल आदि उपस्थित थे ।
विजय पांड्या 9783933641
जैन युवा फेडरेशन कोषाध्यक्ष