
क्या आपने किसी जानवर और पक्षी को कभी खिलखिलाते हुए देखा है ? सच्चाई तो यही है कि ईशवर ने केवल इन्सान को ही हंसी मुस्कराहट का जन्मजात अमूल्य उपहार और विशेषाधिकार प्रदान करके उपक्रत किया है | जो इन्सान मुस्कराते और हंसते हुये जिन्दगी जीता है वो ना तो निराश होते हैं और ना ही कभी भी निराशा की बात करते हैं वो सदेव अपने मन से हमेशा खुश और प्रफुल्लित रहते है यही प्रसन्नता की भावना उसके मन में उत्साह और सोहार्द की सकारात्तमकता की तरगें उनको सुस्वास्थ्य देते हुए उनकी बुध्दि को निर्मल बनाती है। वास्तव में सुखमय जीवन को जीने की पहली शर्त है “हंसते मुस्कराते हुए जीवन को जीना’ | मुस्कराते हुए लोग निश्चिन्त हो कर बड़े-बड़े संकटों को आसानी से पार करके सफलता की सीडी पर आगे बढ़ते ही जाते हैं।यदि कोई आपसे नाराज है तो मुस्कुराकर आप उसके मन को भी जीत सकते हैं । निसंदेह हंसने के लिए न तो किसी प्रशिक्षण की जरूरत होती है और नही किसी नियम की। बस अपने आसपास नजरें घुमाओ और तैयार हो जाओ हंसने के लिए। जीवन हंसी के समुद्र से लबालब है बस जरूरत है तो उस में डूबकर तैरने की। हंसने में कंजूसी आपके अच्छे स्वास्थ्य के लिए शर्तिया हानिकारक है। इसलिए हर व्यक्ति को संकल्प लेना चाहिये कि वे स्वयं मुस्करायेंगे और हंसेंगे और दूसरों को भी हसाएंगे क्योंकि सुखी जीवन का राज है हंसना और हंसाना।