
राज.नगरपालिका संशोधन विधेयक 2022 पर बोलते हुए अजमेर उत्तर विधायक वासुदेव देवनानी ने कहा कि आरपीएससी में गठन के मापदण्ड तय कर चयन पद्धति में पारदर्शिता लाई जाएं। ऐसा नहीं होने से इस मामले में राजस्थान प्रदेश देश के पिछडे राज्यों से भी पिछड जाएगा।
उन्होंने कहा कि भर्तियां एवं चयन निष्पक्ष एवं पारदर्शी हो यह सब चाहते हैं लेकिन यह बात शब्दों में ही बहुत अच्छी लगती हैं। अब तक नगरपालिका के चयन आयोग द्वारा चयन होता था वह निष्पक्ष नहीं होता था यह तो सरकार ने स्वीकार कर ही लिया। संशोधित विधेयक 2009 में लाना, 2011 में उसे विलोपित करना और फिर अब फिर से सदन में लाना निश्चित ही सरकार की ओर से सिस्टम का मखोल उडाया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में 213 निकाय है। निकायों में 627 पद स्वीकृत है जिसमें से 390 पद रिक्त है। ऐसे स्थिति में नगरपालिका और नगरपरिषदों के हाल क्या होंगे यह बताने की आवश्यकता नहीं। रेवन्यू अधिकारी होंगे तब ही तो रेवन्यू एकत्रित कर पाएंगे। रेवन्यू अधिकारियों के 87 में से 50 पद आज भी खाली है जिसके चलते न रेवन्यू एकत्रित हो पा रहा है और न समय पर कर्मचारियों को वेतन का भुगतान ही कर पा रहे हैं। अभियांत्रिकी सिविल के 661 पदों में से 288 पद रिक्त पडे हैं। भ्रष्टाचार चरम पर है और घालमेल का खेला जोरों पर है।
देवनानी ने कहा कि चयन निगम से जो निष्पक्ष भर्तियां कराने की अपेक्षा थी वह भी पूरी नहीं कर पाई। सफाई कर्मिचारियों की नियुक्तियां तक समय पर नहीं कर पाए। रातों रात आपको स्वप्न आया कि चयन आयोग की बजाए आरपीएससी से भर्तियां कराई जाए। आरपीएससी के भी हाल क्या है यह सब जग जाहिर है। एक पूर्व मंत्री के तीन-तीन पारिवारिक सदस्यों के 80-80 प्रतिशत अंक आए है। कैसे आए यह भी जग जाहिर है। अंक देने के नाम पर रिश्वत ली गई, एसीबी द्वारा रिश्वत लेते एक प्रिसिपल और उसके सहयोगी को पकडना व्याप्त भ्रष्टाचार की एक बानगी भर है। आरपीएससी के सदस्य एवं उसके पति तक भ्रष्टाचार के आरोप लगे है। इतना होने के बाद भी सरकार भर्तियां एवं चयन प्रक्रिया आरपीएससी से कराने के लिए आमादा है। आरपीएसी की गठन चयन प्रक्रिया में ही संशोधन करने की आवश्कता है ताकि चयन प्रक्रिया में पारदर्शीता आ सके।
उन्होंने यह भी कहा कि आरपीएसी को देने से पहले यह तय कर ले कि यूपी, एमपी में भी आज समय पर परीक्षाएं हो रही है। इस मामले में बिहार भी हमारे से आगे निकल गया है लेकिन राजस्थान इन पिछडे राज्यों से भी पीछे जाता जा रहा है जो निश्चित ही विचारणीय है। आरपीएससी से परीक्षाएं कराने से पहले इन सब पहलुओं पर विचार अवश्य ही करें नहीं परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहे। यह स्थिति नहीं बने इसके लिए जल्दबाजी नहीं करते हुए इस संशोधन विधेयक को 6 माह के लिए जनमत के लिए प्रसारित करने पर अवश्य ही विचार करें।