अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर तन को स्वस्थ मन को मस्त और आत्मा को पवित्र करने की अनुपम विधा भावना योग
आज दिनांक 22 जून 2022 – भावना योग योगा में एक नया कांसेप्ट जैन दर्शन मूलतः भावना प्रधान दर्शन है। इसके अंतर्गत भावनाओं को प्राथमिकता दी गई है जैसी हमारी भावनाएं होती हैं वैसा ही जीवन में घटित होता है ऐसा जैन संत कहते हैं। दिगंबर जैन मुनि प्रमाण सागर जी महाराज द्वारा रचित भावना योग अपने आप में एक अनूठा प्रयोग है जिसमें हम हमारी भावनाओं का निर्मली करण करते हुए आत्मा का दर्शन करते हुए परमात्मा से मिलते हैं। यह एक ऐसा प्रयोग है जिसमें तन को, स्वस्थ मन को मस्त और आत्मा को पवित्र करने का बहुत ही आसान तरीका है। हम अपने ऑटो सजेशन के द्वारा सबकॉन्शियस माइंड में भरी हुई नेगेटिविटी को अपने सकारात्मक विचारों से पॉजिटिविटी में ला सकते हैं। इसी के चलते आज अंतरराष्ट्रीय योगा दिवस पर एक वृहद कार्यक्रम नाका मदार स्थित समारोह स्थल पर व्रत स्तर पर आयोजित किया गया जिसमें बहुत बड़ी संख्या में महिलाओं, पुरुषों युवा एवं बच्चों ने शिरकत की।
कार्यक्रम के समन्वयक प्रकाश जैन ने बताया योगा के इस कार्यक्रम को मुनि प्रमाण सागर जी महाराज ने निर्देशित किया एवं भावना योग के सारे फंडामेंटल्स क्लियर किए व पूरे विश्व की शांति के लिए मंगल भावना का उद्घोष किया गया जिसे सभी ने सराहा। कार्यक्रम में ब्रह्मचारिणी बहने, अजमेर शहर के गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। हम अपने तन को स्वस्थ रखें, मन को मस्त रखें और आत्मा को पवित्र रखें इसके लिए श्रेष्ठ विधा है भावना योग।
(प्रकाषचंद जैन)
कार्यक्रम संयोजक
मो. 9829332777