भोगों का नाता रोगों से है

गणिनी आर्यिका 105 संगम मति माताजी ने आज प्रवचन देते हुए कहा कि जीवन भोग विलासिता में डूब जाता है और जब भागों में जीवन बीता है तो रोगों से नाता होना स्वाभाविक है विद्यासागर तपोवन में चल रहे 35 दिवसीय णमोकार महामंत्र अनुष्ठान में आज प्रातकाल प्रवचन देते हुए संगम मति माताजी ने कहा कि संसार में आना और जाना लगा रहता है कुछ भी स्थिर नहीं है अगर हमने सुख को स्थिर या स्थाई मान लिया है तो हमारी बहुत बड़ी भूल है
रक्षाबंधन महोत्सव पर विधान अनुष्ठान के माध्यम से जुड़ रहा है जैन समाज
दिनांक 11 अगस्त को विद्यासागर तपोवन में संगम मति माताजी के सानिध्य में रक्षाबंधन महोत्सव मनाया जा रहा है जिसके लिए जोर शोर से तैयारियां चल रही है जैन समाज के लिए रक्षाबंधन पर्व का बड़ा महत्व है
आरती सजाओ प्रतियोगिता का आयोजन किया गया है जिसमें शावक गण आरती सजाकर लाएंगे उन्हें पुरस्कृत किया जाएगा
आज के णमोकार महामंत्र अनुष्ठान में जयकुमार पदमा पंचशील ने माता जी को शास्त्र भेंट किए एवं णमोकार महामंत्र अनुष्ठान में भाग लिया समाज के सभी बंधुओं के साथ मनीष सेठी विपिन चांदीवाल कमल सोगानी संजय कासलीवाल कमल बडजात्या आदि उपस्थित थे

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