संघनायक गुरुदेव श्री प्रियदर्शन मुनि जी महारासा ने फरमाया कि व्यक्ति अगर भगवान से प्रार्थना करें कि हे भगवान मुझ में वह शक्ति और सामर्थ्य दे कि मैं पापों से मुक्त बन सकूं तो पापो को घटाने में अवस्य सफल होगा।हम पहले पाप प्राणतिपात की चर्चा कर रहे है ।इसमें तेऊकाय यानी अग्नि और वायुकाय यानी हवा के जिवो कि विराधना कैसे होती है ,इसे समझने का प्रयास करना है ।जैन दर्शन में हवा और अग्नि को भी जीव माना गया है ।
साधु तो त्रस व स्थावर सभी प्रकार की हिंसा से विरक्त होता है ।मगर श्रावक व सामान्य गृहस्थीं इनकी हिंसा से पूर्ण विरक्त नहीं हो सकते हैं, तो फिर इसकी विराधना से कैसे बचा जाए? तो भगवान फरमाते हैं कि इसमें आप थोड़ा सा विवेक और यतना को अपनाने का प्रयास करें ।
आप जो लाइट पंखा ,टी.वी, ए. सी,कूलर आदि का उपयोग करते हैं उसमें तेऊकाय और वायुकाय के जीवो की हिंसा होती है। उसमें यह आप ध्यान रखें कि मैं आवश्यकतानुसार ही इसका उपयोग करू। इनके अनावश्यक दुरुपयोग से बचता रहूं।
आजकल ए.सी आदि के बड़े तो क्या बच्चे भी इतने आदी हो गए हैं इसके बिना थोड़ी देर रहना भी कठिन लगता है। विचार करें एक किसान का बच्चा जल्दी बीमार पड़ता है या आपका ? तो उत्तर मिलेगा,आपका।कारण यह है कि किसान के बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता ज्यादा होती है और आपके बच्चे की कम ।आपने अपने बच्चों को सुविधावादी बनाया है, जिससे कष्टों को सहन करने में वो इतना सामर्थ्यशाली नहीं बना, जितना एक किसान का बच्चा। किसान का बालक प्रकृति में पला में और बड़ा होता है जिससे वह धूप _ छाव, सर्दी_ गर्मी आदि को आसानी से सहन कर लेता है .
पंखा कूलर एसी आदि साधनों के ज्यादा प्रयोग से एक तो शरीर का स्वास्थ्य भी कमजोर होता है ,और दूसरा जीव हिंसा का कारण भी बनता है। अत: अपने आप को जीव हिंसा से बचाने के लिए इनके अनावश्यक प्रयोग से बचने का प्रयास करें ।अगर ऐसा प्रयास और पुरुषार्थ रहा तो सर्वत्र आनंद ही आनंद होगा।
पदम चंद जैन ने बताया कि धर्म सभा में पर्वाधीराज पर्युषण पर्व जो 14 अगस्त से 21 अगस्त तक मनाए जाने हैं ,इस हेतु प्रथम 3 दिन तेला तप की प्रेरणा वह अष्ट दिवसीय नवकार महामंत्र के अखंड जाप कार्यक्रम में एवं समस्त धार्मिक कार्यक्रम में सपरिवार भाग लेने की प्रेरणा प्रदान की गई ।
धर्म सभा को पूज्य श्री विरागदर्शन जी महारासा ने भी संबोधित किया ।
धर्म सभा का संचालन हंसराज नाबेडा ने किया।
पदम चंद जैन
* मनीष पाटनी,अजमेर*