*बाप रे! भ्रष्टाचार की सारी पराकाष्ठा पार*

-अन्नपूर्णा रसोई में हर माह लाखों रूपए का फर्जीवाड़ा, शुरूआती जांच के नाम पर लीपापोती
-भ्रष्ट अफसरों ने खुद को बचाने के लिए दो ठेकेदारों पर पैनल्टी लगाने और कार्यवाही करने का प्रस्ताव सरकार को भेजा
-40 मिनट के भीतर एक महिला पूरे शहर में घूम-घूम कर खाना खाती है, एक व्यक्ति एक जगह बेटा तो दूसरी जगह बाप बनकर खाना खा लेता है
-दैनिक भास्कर ने मामला उजागर किया, लेकिन भ्रष्ट अफसरों ने बिना कोई ज्यादा पड़ताल किए जांच पूरी कर दी

✍️प्रेम आनन्दकर, अजमेर।
👉बाप रे। भ्रष्टाचार की पराकाष्ठा का जीता जागता उदाहरण इससे बडा नहीं हो सकता है। सब-कुछ मिलीभगत का खेल चल रहा था। जब दैनिक भास्कर ने इस मामले को प्रमुखता से उठाया तो पहले जांच के नाम पर लीपापोती करने की कोशिश की गई। फिर अपने सिर पर ठीकरा फूटने की नौबत आई, तो नगर निगम के भ्रष्ट अफसरों ने दो ठेकेदारों पर पैनल्टी लगाने और कार्यवाही करने का प्रस्ताव स्वायत्त शासन विभाग, जयपुर को भेज दिया। यह मामला अन्नपूर्णा रसोई में हर माह 40 लाख से लेकर 71 लाख रूपए तक फर्जीवाडा होने या फर्जी भुगतान उठने से जुड़ा हुआ है। नगर निगम के मक्कार और भ्रष्ट अफसरों, बेशक ठेकेदारों पर पैनल्टी भी लगाइए और कार्यवाही भी कीजिए, क्योंकि इसके अलावा आप लोग अपने आपको बेदाग साबित करने और खुद पर गिरने वाली गाज से बचाने के लिए इसके अलावा और कर भी क्या सकते हैं। लेकिन यह भी तो बता दीजिए कि इन ठेकेदारों से हर माह कितना-कितना कमीशन खाते थे।

प्रेम आनंदकर
एक महिला मात्र 40 मिनट के भीतर क्या आठ जगह खाना खा सकती है। उस महिला को 12.05 बजे सुखाड़िया उद्यान तो 12.09 बजे परबतपुरा में खाना खाने वाला कूपन कटा। इसके बाद हर पांच-सात मिनट के अंतर में अन्य स्थानों पर उसने खाना खाया। अव्वल तो एक महिला एक समय में केवल एक जगह ही खाना खा सकती है। चलिए, यह बात भी मान लेते हैं कि उसने दो या तीन जगह थोड़ा-थोड़ा खाना खाया हो, लेकिन क्या यह बात किसी के गले उतर सकती है कि जिस महिला ने 12.05 बजे सुखाड़िया उद्यान खाना खाया, वह मात्र चार मिनट में 12.09 बजे परबतपुरा पहुंचकर खाना खा ले। यह महिला 12.15 बजे प्राइवेट बस स्टैंड, 12.19 बजे रेलवे स्टेशन, 12.28 बजे दहेली गेट, 12.35 बजे शास्त्री नगर, 12.40 बजे माखूपुरा और 12.49 बजे गांधी भवन की अनपूर्णा रसोई में खाना खाती है। अब आपको बता दें। सुखाडिया उद्यान से परबतपुरा करीब 9-10 किमी., परबतपुरा से प्रावेट बस स्टैण्ड करीब 11-12 किमी., प्राइवेट बस स्टैंड से रेलवे स्टेशन करीब 2 किमी., रेलवे स्टेशन से देहली गेट करीब 1.50 किमी. देहली गेट से शास्त्री करीब 2-3 किमी., शास्त्री नगर से माखूपुरा 13 किमी. और माखूपुरा से गांधी भवन करीब 11 किमी. है। वैसे तो भास्कर ने तीन जो एक्सक्लूसिव खबरें छापी हैं, उनमें भ्रष्ट अधिकारियों और ठेकेदारों की मिलीभगत से सरकार के हर माह लाखों रूपए डकारने की पोल खोल दी गई है और इसके लिए भास्कर प्रबंधन की ओर से संवाददाता सुरेश कासलीवाल को 21 हजार रूपए का नगद पुरस्कार भी मिल चुका है। अन्नपूर्णा रसोई मे खाना खाने वाले प्रत्येक व्यक्ति से 8 रूपए लेकर कूपन काटा जाता है और भरपेट भोजन कराया जाता है, जबकि 22 रूपए व्यक्ति के हिसाब से सरकार अनुदान देती है। कांग्रेस शासनकाल में यह योजना इंदिरा रसोई के नाम से चल रही थी, जिसे सत्ता परिवर्तन के बाद भाजपा सरकार ने बदल कर अन्नपूर्णा रसोई कर दिया, क्योंकि उसके पूर्ववर्ती शासन में यह योजना इसी नाम से चलती थी। भ्रष्टाचार के मामले में केंद्र सरकार और राज्य सरकार का सख्त रवैया है, लेकिन किशनगढ़ के एक व्यक्ति द्वारा ठेके पर ली गई अन्नपूर्णा रसोइयों में जमकर भ्रष्टाचार सामने आया है। इस व्यक्ति के पास अजमेर में 17 और किशनगढ़ में 3 रसोइयों के ठेके हैं। यह ठेका एक कांट्रेक्टर के नाम से है। हालात यह हैं कि एक युवक देहली गेट रसोई में खाना खाता है तो बेटा होता है और एक मिनट बाद ही वह एक किलोमीटर दूरी पर प्राइवेट बस स्टैंड रसोई में खाना खाता है तो उसे पिता बता दिया जाता है। इतना ही नहीं, लियाकत पुत्र अब्दुल ने सिर्फ 11 सैकंड में ही देहली गेट और प्राइवेट बस स्टैंड स्थित अन्नपूर्णा रसोई में खाना खाया। नगर निगम ने शहर में चल रही अन्नपूर्णा रसोइयों में अनुदान के नाम पर किए जा रहे फर्जीवाडे की जांच पूरी कर ली है। निगम ने दो ठेकेदारों के खिलाफ पैनल्टी व दंडात्मक कार्यवाही करने के लिए मामला स्वायत्त शासन विभाग को भेजा है। जब यह पूरा मामला उजागर हुआ, तो नगर निगम ने जांच कमेटी बनाई थी। प्रारंभिक जांच में प्रथम दृष्टया संदिग्ध पाई गई संस्था के विरूद्ध पैनल्टी लगाने एवं दंडात्मक कार्यवाही करने की सिफारिश की गई है। जिस तरह से जांच की गई है, उससे ऐसा लगता है कि इसमें पूरी तरह लीपापोती की गई है। जबकि अन्नपूर्णा रसोइयों में अनुदान के नाम पर हर माह करीब 40 लाख से लेकर 71 लाख रूपए का फर्जीवाड़ा सामने आता। जानकारी मिली है कि सरकार ने इस मामले की विस्तृत जांच स्वायत्त शासन विभाग के निदेशक को सौंपी है। जाहिर है, यह बड़ी जांच होगी। इस जांच में हर माह फर्जीवाड़ा कर लाखों रूपए डकारने वाले अधिकारियों और ठेकेदारों के हलक से सरकारी धन वापस निकाला जाएगा या उन्हें कटघरे में खड़ा किया जाएगा या फिर इसमें भी लीपापोती कर मामले को ठंडेबस्ते के हवाले कर दिया जाएगा। इन सवालों का जवाब जांच पूरी होने के बाद ही मिल सकेगा। इसलिए जांच होने तक इंतजार करना होगा।

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