धर्मेश जैन हो सकते हैं एडीए चेयरमेन?

लोकसभा चुनाव का परिणाम आगामी 4 जून को आना है, मगर अभी से राज्य में राजनीतिक नियुक्तियों की कवायद आरंभ हो गई है। अजमेर के लिए सर्वाधिक महत्वपूर्ण है अजमेर विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष पद पर नियुक्ति। अब तक तीन नाम प्रमुख रूप से लिए जा रहे हैं। विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी खेमे के अजमेर नगर निगम के पूर्व महापौर धर्मेन्द्र गहलोत व षहर भाजपा अध्यक्ष रमेष सोनी के नाम षीश पर हैं। इस बीच पिछले दिनों जब नियम आयुक्त के हल्फनामे में अजमेर नगर परिशद के पूर्व सभापति सुरेन्द्र सिंह षेखावत के बारे में अपमानजनक टिप्पणी का मसला उठा तो यह तथ्य भी उजागर हुआ कि षेखावत ने भाजपा सरकार बनने पर अजमेर विकास प्राधिकरण का अध्यक्ष बनाए जाने का आष्वासन पर ही अजमेर उत्तर से अपना नामांकन वापस लिया था। इस बीच यह पक्के तौर पर माना जा रहा है कि विधानसभा चुनाव में गैर सिंधी सामान्य वर्ग में पनपे असंतोश को षांत करने के लिए किसी वैष्य को प्राधिकरण अध्यक्ष बनाने जाने पर विचार हो रहा है। दावा ब्राह्मण वर्ग का भी बनता है, मगर उसमें पार्शद ज्ञान चंद सारस्वत के भाजपा छोड देने व पार्टी से निलंबित पूर्व पार्शद जे के षर्मा जैसे दावेदारों ने खुद की अपना दावा कमजोर कर लिया है। वैष्यों में भाजपा के पास धर्मेष जैन का नाम षीर्श पर है। ज्ञातव्य है कि अजमेर नगर सुधार न्यास के अध्यक्ष रह चुके हैं, मगर एक फर्जी सीडी के चक्कर में अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाए थे। बाद में उन्हें क्लीन चिट भी मिल गई। यदि उनके दावे को सही माना जाए तो अधूरे कार्यकाल में भी उन्होंने पूर्व अध्यक्ष औंकार सिंह लखावत से भी अधिक विकास करवाया। स्वाभाविक सी बात है कि वे दुबारा अध्यक्ष बनना चाहेंगे। बताया जाता है कि संघ उनके जैसे अनुभवी नेता को मौका देने की पैरवी कर रहा है। उसे कितनी कामयाबी मिलती है, यह समय में गर्भ में छिपा है। उनका नाम दिल्ली से भी आ सकता है। जानकारी यह भी है कि ब्राह्मण प्रश्ठभूमि के आधार पर पूर्व पार्शद भारती श्रीवास्तव ने भी दावा कर रखा है, जिन्हें देवनानी का भी वरदहस्त हासिल है। यदि देवनानी की चली तो उनकी लॉटरी भी लग सकती है।

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