*खाद्य तेल में मिलावट, इंसानों की जीते-जी मौत*

-आखिर किसकी शह पर पार्वती ऑयल मिल वाला मिलावटी खाद्य तेल बनाकर बाजार में बेच रहा था
-क्या अजमेर के स्वास्थ्य और खाद्य विभाग जानबूझकर अनजान बने हुए थे, जो जयपुर से टीम भेजनी पड़ी
-पता नहीं, कब से यह गोरखधंधा चल रहा था और ना जाने कितने हजारों-लाखों लोग मिलावटी खाद्य तेल का उपयोग कर बीमारी के शिकार हो गए होंगे
-आखिर बेचारा उपभोक्ता क्या करे, वह पीपे पर ब्रांड देखते ही तेल खरीद देता है, लेकिन यहां तो ब्रांडेड कंपनियों के नाम से मिलावटी तेल तैयार किया जा रहा था

प्रेम आनंदकर
👉आखिर बेचारा उपभोक्ता कहां जाए? वह बाजार में कोई भी सामान खरीदने जाता है, तो ब्रांड भी देखता और बिल भी लेता है। यदि कोई उपभोक्ता बिल नहीं भी लेते हैं, तो कम से कम ब्रांड तो देखते ही हैं। ब्रांडनेम देखकर वस्तु खरीद लाते हैं। यही हाल खाद्य तेलों का भी है। स्वास्तिक, पोस्टमैन, सोना-सिक्का जैसे अनेक ऐसे ब्रांडनेम हैं, जिन पर उपभोक्ताओं को इस बात का भरोसा होता है कि इनका खाद्य तेल शुद्ध और उच्च क्वालिटी का होगा। लेकिन इसमें उपभोक्ता का क्या दोष है? उसे क्या पता, जिस खाद्य तेल के पीपे को खरीदकर ला रहा है और घर में उस तेल से खाना पक रहा है, वह असली नहीं, नकली तेल है। ऐसा ही गोरखधंधा वर्षों से अजमेर में चल रहा था। दो दिन पहले जयपुर से आई खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने अजमेर के परबतपुरा औद्योगिक क्षेत्र स्थित पार्वती ऑयल मिल पर छापा मारा, तो इस गोरखधंधे का खुलासा हुआ। टीम ने इस मिल में स्वास्तिक, पोस्टमैन जैसी नामी ब्रांडेड कंपनियों के खाली और भरे हुए पीपे बरामद करने के साथ तेल में मिलावट की अनेक सामग्री बरामद की है। बताया जाता है कि इस मिल में पॉम ऑयल की मिलावट की जाती थी। पॉम ऑयल के टैंकर के टैंकर इस मिल में खाली होते थे। छापे के दौरान जो स्थिति सामने आई, उसे देखकर सहज अंदाजा लगाया जा सकता है कि किस तरह नकली और मिलावटी तेल का कारोबार फल-फूल रहा था। खाद्य तेल में मिलावट का सीधा-सीधा मतलब है, इंसानों की जीते-जी मौत। अब सवाल यह उठता है कि आखिर किसकी शह पर पार्वती ऑयल मिल वाला मिलावटी खाद्य तेल बनाकर बाजार में बेच रहा था। क्या अजमेर के स्वास्थ्य और खाद्य विभाग जानबूझकर अनजान बने हुए थे, जो सरकार को जयपुर से टीम भेजनी पड़ी। पता नहीं, कब से यह गोरखधंधा चल रहा था और ना जाने कितने हजारों-लाखों लोग मिलावटी खाद्य तेल का उपयोग कर बीमारी के शिकार हो गए होंगे। यदि सूत्रों की मानें, तो पार्वती ऑयल मिल की एक बड़ी दुकान पड़ाव क्षेत्र में भी है, जहां से तेल की थोक बिक्री वाली सप्लाई करने के साथ-साथ खुदरा बिक्री भी की जाती है। बताया जाता है कि एक-दो बार पहले इस मिल और दुकान पर अजमेर की टीम द्वारा छापा मारा गया था। उस छापे की जांच रिपोर्ट का क्या हुआ, इसका आज तक खुलासा सामने नहीं आया है। लेकिन जिस तरह से कारोबार तेजी से चल रहा था, उसे देखते हुए यह माना जा सकता है कि जब-जब पहले छापे मारे गए थे, तब-तब मामले ’’ले-देकर’’ रफा-दफा कर दिए गए होंगे। यदि पहले छापे मारने के साथ ही कठोर कार्यवाही की गई होती और मिल का लाइसेंस निरस्त कर मिल और दुकान पर ताले ठोक दिए जाते तो शायद यह कारोबार इतना ज्यादा फलता-फूलता नहीं। चलिए फिलहाल इस बात को छोड़ देते हैं कि पहले कठोर कार्यवाही क्यों नहीं की गई। अब चूंकि सरकार के निर्देश पर यह कार्यवाही हुई है, तो उम्मीद लगाई जानी चाहिए कि इस बार कठोर कार्यवाही होने के साथ इस मिल को हमेशा-हमेशा के लिए बंद कर दिया जाएगा, ताकि भविष्य में इसके मिल के मालिक मिलावटी तेल का कारोबार कर इंसानों की जिंदगी से खिलवाड़ नहीं कर सकें। यही नहीं, अब जबकि सरकार ने इस मामले को गंभीरता से लिया है, तो मिलावटी कारोबारी को कानून के तहत कठोर से कठोर सजा दिलाने का प्रयास सरकार को करना चाहिए। यदि सरकार ने प्रदेश में ऐसे मिलावटखोरों की नाक में नकेल कस दी तो यकीन मानिए, मिलावटी कारोबार पर काफी-कुछ अंकुश लग जाएगा।
✍️प्रेम आनन्दकर, अजमेर।
📱08302612247

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