व्यक्ति को जीवन में कभी ईर्ष्या नहीं करनी चाहिये -108 उपाध्याय वृषभानंद जी मुनिराज
आज दिनांक 15 जून 2024 – परम पूज्य आचार्य श्री 108 वसुनंदी जी मुनिराज के परम प्रभावक शिष्य श्री 108 उपाध्याय वृषभानन्द जी मुनिराज ससंघ श्री 1008 दिगम्बर जैन अतिष्य क्षेत्र पार्ष्वपुरी श्रीनगर अजमेर में विराजमान है।
यह जानकारी देते हुए मंत्री विनित कुमार जैन ने बताया कि आज की धर्मसभा में मंगलाचरण संगीतकार विजय भैया द्वारा व आचार्य विद्यानन्नद जी एवं वसुनन्दी जी के चित्र के समक्ष दीप प्रज्जवलन एवं चित्र अनावरण नरेन्द्र कुमार प्रवीण कुमार राहुल कुमार प्रमोद कुमार दनगसिया परिवार के द्वारा किया गया।
इसी क्रम में आज परम पूज्य आचार्य श्री 108 वसुनंदी जी मुनिराज के परम प्रभावक शिष्य श्री 108 उपाध्याय वृषभानन्द जी मुनिराज का 68 वां अवतरण दिवस मनाया गया जिसमें प्रातः 6ः00 बजे अभिषेक, शांतिधारा, प्रातः 7ः00 बजे नित्य नियम पूजन व विधान तत्पष्चात् श्री 108 उपाध्याय वृषभानन्द जी मुनिराज के अवतरण दिवस पर मुनिराज का पाद् पक्षालन किया गया व उन्हें सुसज्जित तरीके से जिनवाणी भेंट की गई साथ ही 11 पूर्ण्याजक परिवार द्वारा मुनिराज को अर्घ, चावल अर्पित किये गये।
इस अवसर पर पूज्य उपाध्याय श्री को श्री जिनशासन तीर्थ क्षेत्र कमेटी नाका मदार अजमेर के द्वारा आगामी वर्ष 2024 के चातुर्मास के लिए श्रीफल भेंट किया गया। विनीत कुमार जैन मंत्री श्री जिनषासन तीर्थ क्षेत्र द्वारा श्रीफल भेंट करते हुए महाराज जी के अवतरण दिवस पर अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए गुणानुवाद अनुवाद किया गया। इस अवसर पर पूज्य उपाध्याय श्री के द्वारा संपूर्ण समाज को संपूर्ण कमेटी को एवं उपस्थित श्रद्धालुओं को दोनों हाथों से आशीर्वाद प्रदान किया।
इस अवसर पर श्री 108 उपाध्यक्ष वृषभानन्द जी मुनिराज ने धर्मसभा को सम्बोधित करते हुए कहा कि कितना भी बड़ा महल, अटृालिका क्यो न हो, कितनी छोटी गरीब की झोपड़ी क्यों न हो उसमें एक न एक दरवाजा अवष्य होता है, इसी प्रकार प्रत्येक व्यक्ति के अन्दर गुण-अवगुण अवष्य होते है। गुणों को ग्रहण करने वाला व्यक्ति सद्गृहस्थ कहलाता है। व्यक्ति को जैसी संगति मिलती है वैसी ही परिणति उसकी हो जाती है। सज्जन व्यक्ति दुर्जन व्यक्ति के जीवन में से भी गुण खोज लेता है, व्यक्ति को कभी घबराना नहीं चाहिये। समस्याओं में ही आपकी परीक्षा होती है। जो समस्याओं के आने पर अपना संतुलन खो देते हैं वह जीवन में आनंद की अनुभूति नहीं कर पाते और जो आंनद की अनुभूति करते है वे समस्याओं के आने पर साहस, धैय रखकर उनसे डटकर मुकाबला करते है। व्यक्ति को जीवन में कभी ईर्ष्या नहीं करनी चाहिये। ईर्ष्यालु व्यक्ति कभी भी सुखी नहीं रह सकता, वह कभी भी गुणांें को ग्रहण नही करता। दूसरों का सुख वह देख नहीं सकता।
इसी क्रम में कल दिनांक 16 जून रविवार को प्रातः 6ः30 बजे अभिषेक शांतिधारा व शांतिविधान, प्रातः 8ः30 बजे श्री 108 उपाध्यक्ष वृषभानन्द जी मुनिराज के प्रवचन, प्रातः 9ः30 बजे आहरचर्या, दोपहर 3ः00 से 4ः30 बजे स्वाध्याय, सांय 5ः00 से 5ः30 बजे तक प्रतिकम्रण, सांय 6ः30 बजे आनन्द यात्रा व 7ः30 बजे आरती का कार्यक्रम श्री 1008 दिगम्बर जैन अतिष्य क्षेत्र पार्ष्वपुरी श्रीनगर अजमेर पर आयाजित किया जायेगा।
भवदीय
(विनित कुमार जैन)
मंत्री
मो. 9414281335