इनबोर्न एरर्स ऑफ मेटाबॉलिज्म मरीजों की हालत में सुधार के लिये समय पर इसकी जांच जरूरी
जयपुर, 20 सितम्बर, 2024। इनबोर्न एरर्स ऑफ मेटाबॉलिज्म पर 3 दिवसीय नेशनल कॉन्फ्रेंस आईएसआईईएम 2024 शुभारंभ आज यहां झालाना संस्थानिक क्षेत्र स्थित राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर, (आरआईसी) में हुआ और इसका समापन 22 सितम्बर को होगा। यह आयोजन विशेषज्ञों, चिकित्सकों, शोधकर्ताओं और इनबोर्न मेटाबॉलिक विकारों से प्रभावित परिवारों के लिए ज्ञान, इनोवेटिव और नए इलाजों का आदान प्रदान करने किया जा रहा है। आयोजन के पहले दिन विभिन्न सेशन और वर्कशॉप आयोजित की गई, जिसमें इन रोगों के निदान में मौजूदा समय में हुए अपडेट्स और दवाईयों के बारे में तकनीकी जानकारी विषय विशेषज्ञों ने दी।
नेशनल कॉन्फ्रेंस का उदघाटन सवाई मानसिंह मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. दीपक माहेश्वरी ने किया। इस अवसर पर अतिरिक्त निदेशक डॉ. बी.एस चारण, एसिस्टेन्ट डायरेक्टर जनरल हैल्थ सर्विसेज मिनिस्ट्री ऑफ हैल्थ एण्ड फेमिली वेलफेयर, भारत सरकार, डॉ. मधुलिका काबरा एम्स दिल्ली, (एक्जीक्यूनिटव मैम्बर) डॉ. सीमा कपूर, अध्यक्ष आईएसआईईएमई डॉ. प्रियांशु माथुर, आगेनाइजिंग सेक्रेटरी सहित अन्य गणमान्य अतिथि मंच पर उपस्थित रहे। डा. माहेश्वरी ने इस प्रकार के आयोजन को समयानुकूल बताते हुए कहा कि इससे नवागंतुक चिकित्सक एवं अन्य हैत्थकेयर प्रॉफेशनल्स को इस प्रकार के दुर्लभ रोगों के निदान में आए क्रांतिकारक परिवर्तनों की जानकारी मिल सकेगी।
इससे पूर्व हुई वर्कशॉप में मूल मेटाबोलाइट आधारित दृष्टिकोण डॉ. लोकेश कुमार अग्रवाल, ऑर्गेनिक एसिड्यूरिया प्रोफाइलिंग पर डॉ. उषा दवे सहित अन्य वक्ताओं ने उपस्थित डेलिगेट्स को सम्बोधित किया। इस प्रकार की एक और वर्कशॉप में श्रीमती वैशाली मडकाइकर, श्रीमती रंजिनी पार्थसारथी और श्रीमती शीतल महामुंका ने विभिन्न सम्बद्ध विषयों पर व्यख्यान दिए। इसी प्रकार एनबीएस कार्यक्रम डॉ. सीमा कपूर समाज पर एनबीएस का प्रभाव, डॉ. कनिका सिंह स्क्रीन पॉजिटिव रिजल्ट से निपटने के बारे में डॉ. सुवर्णा मागा ने विचार व्यक्त किए।
इससे पूर्व राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर, (आरआईसी) मुख्य ऑडिटोरियम में चार सत्र में पैनल डिस्कशन्स हुए जिनमें वंशानुगत मेटाबॉलिज्म रोग अतीत से वर्तमान तक विषय पर आयोजित पैनल डिस्कशन में डॉ. मधुलिका काबरा, डॉ. सुनीता बिजारनिया, डॉ. हंसश्री पद्मनाभ, डॉ. जयकिशन मित्तल, श्रीमती वैशाली मडकाइकर ने चर्चा की इस सत्र के मॉडरेटर डॉ चैतन्य दातार थे। इसी मंच पर हुए दूसरे पैनल डिस्कशन में जटिल अणु मेटाबॉजिज्म विकार पर केस आधारित चर्चा हुई जिसमें डॉ. उमा राम स्वामी, डॉ. सीमा कपूर, डॉ. आरुषि गहलोत, डॉ. बालामुरुगन ने संदर्भ विषय परमॉडरेटर डॉ. आराधना द्विवेदी द्वारा पूछे गए सवालों के जवाब प्रेजेन्टेशन के माध्यम से दिए। एनर्जी की कमी से जुड़े विकारों पर हुए पैनल डिस्कशन में की कमी से संबंधित विकार केस आधारित पैनल डिस्कशन में डॉ. सुमिता डांडा, डॉ. श्रुति बजाज, डॉ. लोकेश सैनी,डॉ. आकाश शर्मा और श्रीमती अनुजा अग्रवाल ने चर्चा में भाग लिया। मंच संचालन डॉ. उदय कोटेचा ने किया।
उक्त चर्चाओं से यह बात उभर कर आई कि रेयर डिजीज में खासतौर से लाइसोसोमल स्टोरेज डिसऑर्डर से ग्रसित मरीजों की जिंदगी बेहद अशक्त हो जाती है। प्रारंभिक रूप से ऐसा डायफंक्शनल एंजाइम्स की वजह से होता है। ये डिसऑर्डर कई बार क्रॉनिक हो जाते हैं और इससे मरीजों की जिंदगी की गुणवत्ता भी गंभीर रूप से प्रभावित होती है। बीमारी के लिए जागरूकता प्रमुख है, लेकिन मरीजों की हालत में सुधार के लिये समय पर इसकी जांच अहम हिस्सा है। इलाज में देरी से आर्थिक बोझ अधिक बढ़ जाता है। गर्भ धारण करने वाली मां के लिए प्रीनेटल जेनेटिक काउंसलिंग और टेस्टिंग होनी चाहिए। करीब एक साल से रेयर डिजीज को लेकर काफी जागरुकता आई है लेकिन डॉक्टर्स को भी जानकारी नहीं होने से इनके इलाज पर काफी प्रभाव पड़ रहा है। इस आयोजन का मकसद ही यही है कि चिकित्सकों को इस क्षेत्र में आए नवीनतम परिवर्तनों की जानकारी एक छत के नीचे मिल सके।
इसके साथ ही चिकित्सक वक्ताओं की चचाओं में यह बात भी उजागर हुई कि हमारे शरीर को एनर्जी से भरपूर बनाए रखने के लिए तमाम पोषक तत्वों की जरूरत होती है। ये पोषक तत्व हमें खाने पीने की चीजों से मिलते हैं। बेहतर डाइट के जरिए लोग इन पोषक तत्वों की सही मात्रा हासिल कर सकते हैं। हालांकि एनर्जी के लिए शरीर का मेटाबॉलिज्म बेहतर रखना जरूरी है। मेटाबॉलिज्म एक केमिकल रिएक्शन है, जो हमारे फूड को एनर्जी में बदलता है। यह सिस्टम बिगड़ जाए तो शरीर में कमजोरी आ जाती है।