राष्ट्रीय कार्यशाला में बाल साहित्य लेखन का दिया प्रशिक्षण
अजमेर/जो बाल साहित्य बाल मन के निकट होगा, उसी को पढ़ने में बच्चों की रुचि जागेगी। बच्चों को आनंद की अनुभूति करते हुए भारतीय संस्कृति व स्वत्व का बोध कराने वाले तथा जीवन को श्रेष्ठ बनाने वाले संस्कार देने वाले बाल साहित्य की आज आवश्यकता है। नई दिल्ली की आई व्यू संस्था द्वारा रविवार प्रातः जूम पर आयोजित राष्ट्रीय रचनात्मक लेखन कार्यशाला में मुख्य वक्ता के रूप में विचार व्यक्त करते हुए वरिष्ठ बाल साहित्यकार उमेश कुमार चौरसिया ने कहा कि यह उपदेशात्मक नहीं हो इसका भी ध्यान रखना है। संयोजक देवेंद्र पंवार ने बताया कि इस कार्यशाला में चौरसिया ने “बाल साहित्य लेखन का कौशल” विषय पर देश भर के डेढ़ सौ से अधिक युवा रचनाकारों को बाल साहित्य की विविध विधाओं में प्रभावी एवं रुचिकर लेखन के गुर सिखाए। संचालन रश्मि ने किया।