
नव वर्ष में अपने जीवन को सुखी खुशहाल स्वस्थ आनन्द दायक मनाने के लिये निम्न उपायों को अपनाए |
खुशी आदमी के भीतर ही होती है तथा रिलेक्स मन ही प्रगति और खुशहाली का प्रवेशद्वार है| वास्तव में सभी इन्सान और अन्य प्राणी अविनाशी पवित्र और शांती प्रिय आत्मायें हैं और परमपिता परमात्मा की संतान है जिसका कोई रंग नहीं ना ही कोई धर्म ना ही कोई लिंग है|
धर्म का चेहरा तो उनको समाज ने दिया है| याद रक्खें कोई धर्म आपस में घृणा और वैर करना नहीं सिखाता है | आपस में वैमनस्य फैलाने का काम तो तथाकथित धर्म के स्वार्थी ठेकेदार ही करते हैं| सद्दभाव के लिये हर इंसान को बापूजी के भजन ईश्वर अल्लाह एक ही नाम, सबको सन्मति दे भगवान” का सच्चे दिल से पालन करें |
भारत विभिन्नता में एकता अद्धभुत मिसाल है। यहाँ हिंदू मुस्लिम सिख ईसाई बोध जैन फ़ारसी अपनी अपनी आस्था के अनुसार पूजा अर्चना करते हैं। एक दूसरो के पर्व मैं भाग लेते हैं।भाई भाई के रूप मै रहते हैं। धर्म निरपेक्षता हमारे संविधान के मुख्य स्तम्भ है।
सुखी जीवन के लिए सभी को स्नेह, प्रेम और प्यार दें | याद रखे कि आशाओं का जीवन काल अनंत होता है वहीं दूसरी तरफ निराशा और असफलता का जीवनकाल अल्प एवं छोटा होता है इसलिए निराशा और असफलताओं के निराशाजनक वातावरण में आशा का दीपक जलाये रखें और घनघोर अंधकार मे भी प्रकाश की किरणें की खोज करें | अपने आस पास के लोगों के के दुःखदर्द एवं पीड़ा को समझें, उनकी मदद करें उनके दुःख दर्द तकलीफों को दूर करने मै मदद करें और सदेव करुणामय संवेदनशील बने | निराशा को कभी भी अपनी सोच के नजदीक नहीं आने दे | अपने जीवन मै नकारात्मक सोच को छोड़ करके सकारात्मकता को अपनी सोच का अभिन्न अंग बनायें निराशा की भावना को सदा के लिये तिलांजली दें | छोटी से छोटी बातों में भी अच्छाई को ढूढें | अन्धकार मे भी आशा का दीप जलाए रखे |
जब कभीप्रोपका चालू करे तो यह तय कर ले कि इस से किसी का नुकसान तो नहीं होगा। अपने निजी हितों को ताक पर रख कर प्रोपकारी बने। दुसरो के दुःख कम करे।
याद रक्खे कि जीवन में खुशी प्राप्त करने के लिये दूसरों को भी यथाशक्ति खुश रखने का प्रयास करना जरूरी है मित्रों सहकर्मियों के अच्छे काम की प्रशंसा करे | साल मे हर परिस्तिथी में में शांत और रिलैक्स्ड रहूंगा | रिलेक्स रहने के लिये गहरी और लम्बी स्वास ले ओर छोड़े | .अपने मन के अंदर इस बात को धारण कर लें कि ख़ुशी मेरा जन्मसिद्ध मोलिक अधिकार है | चाये कुछ भी हो जाए मै दिन भर खुश रहुगां | जब कभी कोई अनहोनी घटना घट भी जाये तब भी अपने आप को सकारात्मक सोच पर केन्द्रित करते हुयें अपने आप को समझाये कि मेरे साथ इससे भी बुरा हो सकता था ,प्रभुजी को धन्यवाद दें | याद रखे की अगर अग्रज अपनो से छोटे को स्नेह और प्यार देंगे तो छोटे भी आप को जरुर सम्मान देंगे और आप का आदर भी करंगे | बच्चो को उनके अपने हिसाब से जीने का मौका दे, उनके कार्यकलापों मै टीका टिप्पणी नहीं करें | आप उन्हें सलाह तभी ही दें जब वे आप से सलाह मांगे |
क्रोध एक माचिस की तिली के समान है जो दूसरों को जलाने के पहिले खुद ही जलती है | जब कभी आपको गुस्सा आ जाये तोतब अपने मन को समझाये कि क्रोध करके मे खुद का ही नुक्सान कर रहा हूँ | अपने पड़ोसी से नियमित बातचीत करे, उनके प्रति सद्भावना रखते उनके खुशी के लिये प्राथना करें | उनके सुख को बढाने और तकलीफों को कम करने की कोशिश करें इससे आपकी खुशियाँ कई गुणा बढ़ जायेगी और आपके पारस्परिक सम्बन्ध मधुर रहेगें | खुशी प्राप्त करने का एक सूत्र यह भी है की बिना किसी चाहत के दुसरे के अच्छे काम की बार बार उनके सामने और उनकी पीठ पीछे प्रशंसा करें | संभव है कि यदाकदा आपका लालच कुछ समय के लिये आपकी सम्पती को बढा भी दे, किन्तु यह भी याद रखे कि अधिक सम्पति आपके लालच ओर आकांशा को कई गुणा बढा देगी लालच और गलत तरीके से अर्जित यह कमाई आपको अभिमानी बना कर आपको गलत रास्ते पर ले जाकर आपकी मानसिक शांती और आपके स्वास्थ्य को खराब कर देगी | सच्चाई तो यही है कि जो भीआप के पास है उससे आप सदेव खुश रहे | सुख सुविधा के लिये भौतिक साधन अगर आपके पास उपलब्ध नहीं उन्हें हासिल करने लिये ख्याली खबाव बनाने के बजाय उन्हें प्राप्त करने के गम्भीर कोशिश कर मेहनत करें | याद रखे कोशिश करने वालों कभी भी हार नहीं होती हैं।
कीताब पढना एवं उनका सतत अध्ययन करना सभी के लिए जीवन की सभी अवस्थाओं में सबसे अच्छा और सबसे सस्ता ज्ञानवर्धक साधन है | सुखमय जीवन जीने के लिये अपना लक्ष्य निर्धारित करें, उद्देश्यहीन जीवन नहीं जिए | ईर्ष्यालु नहीं बने,दूसरों की सफलता पर खुश हों, उन्हें बधाई दें | अपने ईगो को छोड़े, मै मै मैं की रट नही लगायें, आपका ईगो आपको नकारा बनाके आपको हिन् भावना से ग्रस्त कर देगा | अपने ईगो के बजाय अपने मन से कहें कि में मुझें सोपें गये सारे काम सफलतापूर्वक कर सकता हूँ |आराम तलब जिन्दगी जीने के बजाय कर्मशील बने, निष्काम भाव से तलीनता के साथ कर्म करें |अपनी गलतियों को मानने में चूक नहीं करें क्योंकी आदमी को अपनी गलतीयों से जीवन का बड़ा सबक सीखने को मिलता है | याद रखे असफलता ही सफलता की पहली सीढ़ी है | दुसरों की गलतियों के लिये उन्हें माफ़ करें,फॉरगिव एन्ड फॉरगेट की निती को अपनायें | जीवन में घटित अवांचित दुर्भाग्यपूर्ण कष्ट पूर्ण घटनाओं को याद नहीं रक्खें उन्हें भूल जाएँ वरन विगत वर्षों की सुखद स्म्रतियों को याद कर मुस्करायें | याद रक्खें कि भावात्मक होकर उत्तेजना में लिये गये निर्णय अधिकतर असफल ही होते है | चिंतन कर सोच विचार करके शांत मन से विवेक पूर्ण निर्णय लें |किसी से कोई अपेक्षा नहीं रक्खें और किसी की भी उपेक्षा भी नहीं करें |“चिन्ता चिता से भी बुरी होती है,चिंता आपके जीवन के हर क्षण को दुखमय बना देगी, और सफलता के सारे दरवाजे भी बंद कर देगी वहीं चिंता आपके व्यकित्त्व को भी हानि पहुंचेगी, आप अपना आत्मविश्वास पूरी तरह से खो देंगे, आप बीमारियों को निमंत्रण देगें और अस्वस्थ हो जायेगे | इसलिए चिंता करने के बजाय आत्मचिंतन करें | आध्यात्मिक इन्सान बने | निरंतर मेडीटेसन का अभ्यास करें | मूर्खों से वाद विवाद और तर्क वितर्क करने से बचे | अपने आत्मसम्मान से कोई समझौता नहीं करें किन्तु आत्म अभिमानी भी नहीं बनें | स्वाभिमान के साथ जीये| अपने निकटतम परिचीतों एवं स्वजनों की भावनाओं,आवश्यकताओं का ध्यान रखें,उनकी अनदेखी नहीं करें | डर और शक के साये में नहीं जीये क्योंकि हकीम लुकमान के पासभी शक शंका का कोई इलाज नहीं है | निर्विवाद रूप से डर और शक आदमी की प्रगति और उन्नति में सबसे बड़ी बाधा है | याद रखें द्रोपदी के दुर्योधन पर कसे तंज और व्यंग ने ही महाभारत के युद्ध को जन्म दिया था इसीलिए कभी भी कटु शब्दों का प्रयोग कभी नहीं करें | किसी पर कभी भी तंज नहीं कसें | हमेशा मीठी वाणी बोले | अच्छा बोले अच्छा सुने और अच्छे वाणी बोले | दूसरों के कार्यों की आलोचना करने की जगह उनके अच्छे कामों की प्रशंसा उनके सामने और उनकी पीठ पीछे करें | जो जैसा है उसे उसी रूप में स्वीकार करें | दूसरों के विचारों का भी सम्मान करें, उन्हें आदर दें | सभी को बिना शर्त स्नेह और प्यार दें |कोई भी काम को अंजाम देने से पूर्व यह मालुम कर लें कि आपके काम से किसी का अहित तो नहीं होगा | अगर आप के प्रस्तावित कामसे किसी को कष्ट या क्षति हो रही हो तो उस काम को नहीं करें | हर एक व्यक्ति का अभिवादन मुस्करा कर करें | खुद हसें और दूसरों को भी हंसाये लाफ्टर को अपने दैनिक जीवन का अभिन्न अंग बनाये | अपने चेहरे को प्रफ्फुलित और सोम्य बनाये रक्खें | खुद जियें और अन्य को भी सुखमय जीवन जीने दें | अपनी असफलताओं के लिये दूसरों को दोष नहीं दें | जब कभी कोई आपका काम करें या आपकी मदद करें तो उन्हें धन्यवाद जरुर दें | अमावस्या की काली रात के बाद पूर्णिमा की शीतल चांदनी आती है उसी तरह जीवन में दुःख के बाद सुख अवश्य आता है वास्तव में तकलीफ और दुःख के समय में ही हमको अपने हितेषी और सच्चे दोस्त की पहचान होती है तथा हमें आत्मचिंतन का भी मोका मिलता है | संतो और महापुरसो की शिक्षा का पालन करें।
परिवार और बच्चो के साथ समय बिताए।
डा. जे.के.गर्ग
पूर्व संयुक्त निदेशक कालेज शिक्षा जयपुर