
नज़रें तो आसमान पर रखते हो,
ये क्या, एक ठोकर से डरते हो।
जीने का हुनर ही है अस्ल तालीम,
मरने से पहले ही क्यों मरते हो।
हम समंदर पीने का हुनर रखते हैं,
एक जाम की क्या बात करते हो।
शक्ल है तुम्हारी आदम-जात की,
हरकत से हैवान-से लगते हो।
माना कि गुलों से नहीं है उल्फत, ‘श्याम’
भला गुलशन को क्यों उजाड़ते हो। 00
श्याम कुमार राई “सलुवावाला”