अजमेर। आम आदमी पार्टी राजस्थान ने निर्वाचन आयोग द्वारा मतदाता सूचियों के गहन पुनरीक्षण अभियान की कार्यशैली में अनेक विसंगतियों पर सवाल उठाते हुए सर्वे की निष्पक्षता पर प्रश्नचिह्न खड़ा किया और राजस्थान के मुख्य चुनाव अधिकारी को ईमेल भेज कर अपना विरोध दर्ज करवाया।
प्रदेश महासचिव कीर्ति पाठक ने प्रेस वार्ता कर बताया कि निर्वाचन आयोग द्वारा गहन पुनरीक्षण के तहत किसी भी प्रकार का दावा या आपत्ति केवल प्रारूप क्रमांक 7 में, संबंधित व्यक्ति द्वारा स्वयं की पहचान, वैध मतदाता पहचानपत्र ( वोटर आई डी) एवं शपथ पत्र के साथ ही प्रस्तुत की जा सकती है। साथ ही एक बीएलए एक दिन में सिर्फ 10 आपत्तियां दर्ज करवा सकता है, परंतु बीजेपी सरकार के कार्यकाल में इस प्रक्रिया का पालन नहीं किया जा रहा है। या तो बीएलओ पर मतदाता सूची से नाम काटने का दबाव बनाया जा रहा है, या बिना प्रक्रिया का पालन किए मतदाता सूचियों से नाम काटे जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी ये सवाल उठाती है –
फॉर्म नंबर सात बीजेपी कार्यकर्ताओं को किस ने उपलब्ध करवाये? निर्वाचन आयोग ये पता लगाये कि अजमेर के चुनाव कार्यालय से फॉर्म सड़क तक कैसे पहुंचे? क्या अनुपस्थिति फार्म पर रेंडम हस्ताक्षरों को गंभीर मानते हुए निर्वाचन आयोग द्वारा यूँ मतदाता सूचियों से नागरिकों के नाम हटाने की कार्यवाही करनी चाहिए? क्या निर्वाचन आयोग के पास सिवाय रेंडम व्यक्ति के हस्ताक्षर से वोटर लिस्ट से नाम हटाने के अलावा कोई और मापदंड है, जिस के द्वारा इस प्रकार का फर्जीवाड़ा रोका जा सके?
क्या निर्वाचन आयोग के निर्देश सब को भ्रमित करने के लिए ही हैं और असल में एसआईआर के नाम पर विरोधी पार्टी को वोट करने वाले मतदाताओं को चुन चुन कर हटाया जा रहा है?
प्रदेश सचिव व प्रदेश महिला विंग प्रभारी मीना त्यागी ने कहा कि प्रदेश में ऐसे प्रकरण निर्वाचन आयोग की कार्यशैली पर प्रश्नचिन्ह लगाते हैं। आम आदमी पार्टी अजमेर के माइनॉरिटी विंग जिला अध्यक्ष उस्मान घड़ियाली ने बताया कि अजमेर में एक मामला संज्ञान में आया है, जहां लगभग 244 नागरिकों के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं। यहाँ एक व्यक्ति खेमराज से बीजेपी कार्यकर्ताओं द्वारा अनुपस्थिति के फॉर्म पर हस्ताक्षर करवाये गए, जिस में लगभग 244 व्यक्तियों के नाम वोटर लिस्ट से काट दिए गए। आरोपी व्यक्ति का कहना है कि खाली फॉर्म पर उस से साइन करवाये गए, फॉर्म उस ने बिना पढ़े साइन किए और वो उन बीजेपी कार्यकर्ताओं का नाम भी नहीं जानता है। उन्होंने सरकार पर अल्पसंख्यक समुदाय को निशाना बनाने और निर्वाचन आयोग पर बीजेपी सरकार के दबाव में कार्य करने का आरोप लगाया।